ई साक्ष्य जुटाने में पिछड़ी मध्यप्रदेश पुलिस, भोपाल-इंदौर भी जांच में फिसड्डी
समझें क्या है पूरा मामला...
- नए आपराधिक कानूनों के पालन में मध्यप्रदेश को देश में 21वीं रैंक मिली है।
- यह रैंक पहले से बेहतर हुई है। लेकिन कई राज्य अभी भी आगे हैं।
- केंद्र की त्रैमासिक समीक्षा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
- पुलिस को तय समय में जांच पूरी करने में दिक्कत आ रही है।
मध्यप्रदेश पुलिस नए आपराधिक कानूनों को लागू करने में संघर्ष कर रही है। केस दर्ज होने से लेकर सजा मिलने तक की प्रक्रिया तेज करना इन कानूनों का मकसद था। लेकिन समय सीमा का पालन नहीं हो पा रहा है।
जानकारों का कहना है कि एमपी पुलिस खुद को मजबूत करने में जुटी है। फिर भी अभी और काम करने की जरूरत है। तभी प्रदेश टॉप-10 राज्यों की सूची में जगह बना सकेगा।
क्या हैं नए नियम
केंद्र ने 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता लागू की थी। इसके तहत 10 साल से कम सजा वाले मामलों की जांच 60 दिन में पूरी करनी होती है।
वहीं रेप, मर्डर जैसे गंभीर मामलों में जांच 90 दिन के भीतर पूरी कर चालान पेश करना जरूरी है। इन मामलों में उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है।
पड़ोसी राज्य कहां खड़े हैं
बीएनएस के पालन में पड़ोसी राज्यों ने मध्यप्रदेश से बेहतर काम किया है। महाराष्ट्र को 8वीं रैंक मिली है। गुजरात 11वें और राजस्थान 13वें नंबर पर है।
उत्तरप्रदेश 14वीं रैंक पर है। इन राज्यों की पुलिस ने जांच, चालान पेश करने और ई-साक्ष्य जुटाने में तेजी दिखाई। इसी वजह से इनकी रैंक मप्र से अच्छी रही।
एमपी के कौन से जिले आगे
90 दिन की समय सीमा में जांच पूरी करने में कुछ छोटे जिलों ने अच्छा काम किया है। बड़वानी जिला सबसे आगे रहा। यहां 90% जांचें तय समय में पूरी हुईं।
हरदा में 81.82% और डिंडौरी में 81.71% जांचें पूरी हुईं। नर्मदापुरम और खरगोन भी इस सूची में शामिल हैं।
60 दिन की समय सीमा में भी बड़वानी सबसे आगे रहा है। यहां 85.59% जांचें पूरी हुईं। झाबुआ, हरदा, पन्ना और उमरिया भी अच्छी स्थिति में हैं।
कौन से जिले सबसे पीछे
90 दिन में जांच पूरी करने के मामले में मुरैना सबसे पीछे है। यहां सिर्फ 42.65% जांचें ही पूरी हो सकीं। भिण्ड में यह आंकड़ा 43.24% रहा।
दतिया, मऊगंज और मंदसौर भी पिछड़े जिलों में शामिल हैं। 60 दिन की समय सीमा में रीवा सबसे पीछे रहा है। यहां सिर्फ 50.1% जांचें पूरी हुईं।
मऊगंज, सीधी, मुरैना और छिंदवाड़ा भी इस सूची में आते हैं। इन जिलों में पुलिस को रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है।
भोपाल-इंदौर भी पीछे
प्रदेश की राजधानी भोपाल भी टॉप-10 जिलों में जगह नहीं बना सकी है। यहां 60 दिन में सिर्फ 57% केसों की जांच पूरी हुई है। 90 दिन के भीतर जीआरपी भोपाल ने 51% केसों की जांच पूरी की।
इंदौर ग्रामीण में भी हालत बेहतर नहीं रही। 90 दिन में सिर्फ 58.51% केसों की ही जांच हो सकी। ई-साक्ष्य जुटाने में भी इंदौर टॉप-10 जिलों से बाहर रहा है।
ई-साक्ष्य जुटाने की स्थिति
ई-साक्ष्य जुटाने में बालाघाट, झाबुआ, आगर मालवा और खरगोन जिले की पुलिस ने अच्छा काम किया है। जीआरपी जबलपुर भी इस सूची में शामिल है।
वहीं मैहर, मुरैना, पन्ना और नरसिंहपुर सबसे पीछे रहे। जीआरपी भोपाल भी इस मामले में फिसड्डी साबित हुआ।
FAQ
- मध्यप्रदेश को बीएनएस पालन में कौन सी रैंक मिली है?
मध्यप्रदेश को देश में 21वीं रैंक मिली है। यह रैंक पहले से सुधरी है। फिर भी पड़ोसी राज्यों से पीछे है। - बीएनएस के तहत जांच पूरी करने की समय सीमा क्या है?
10 साल से कम सजा वाले मामलों में 60 दिन की समय सीमा है। गंभीर मामलों में यह सीमा 90 दिन है।
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