10 हजार पद भरने के लिए IAS-IPS में खींचतान, मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड पर घमासान

Manya Jain | Jul 05, 2026, 13:48 IST
mp police recruitment board row
सीएम मोहन यादव ने पुलिस के 10 हजार पदों पर जल्द भर्ती करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने को लेकर आईएएस और आईपीएस अफसरों में मतभेद सामने आया है। इसके पीछे फिजिकल टेस्ट में हुई डेढ़ साल की देरी बड़ी वजह बनी है।

इधर मध्य प्रदेश में नया पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की तैयारी चल रही है। तो दूसरी ओर सीएम मोहन यादव की बैठक में अफसरों के बीच अधिकार को लेकर मतभेद सामने आया है।



दरअसल एमपी में दस हजार पुलिस पदों पर भर्ती जल्द पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन पिछली भर्ती में फिजिकल टेस्ट के कारण डेढ़ साल की देरी के चलते पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है।



बैठक में क्या तय हुआ

MP पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में सबसे पहले दस हजार खाली पदों का मुद्दा उठा। अफसरों ने माना कि भर्ती में अब देरी नहीं होनी चाहिए। लेकिन चयन प्रक्रिया किसके पास रहे, इस पर राय अलग-अलग रही।



आईएएस अफसरों ने सुझाव दिया कि नया बोर्ड सिर्फ फिजिकल टेस्ट संभाले। उनका कहना था कि लिखित परीक्षा का काम एम्प्लॉयी सिलेक्शन बोर्ड (ESB – Employee Selection Board) के पास ही रहे। तर्क दिया गया कि अगर पुलिस बोर्ड खुद परीक्षा कराएगा तो भी बाहरी एजेंसी की मदद लेनी पड़ेगी। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था से खास फर्क नहीं पड़ेगा।



इधर मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय के अफसरों की सोच इससे अलग थी। उनका मानना है कि भर्ती की पूरी जिम्मेदारी एक ही बोर्ड के पास होनी चाहिए। अभी फिजिकल टेस्ट पुलिस विभाग कराता है और लिखित परीक्षा ESB संभालता है। अफसरों ने इस बंटवारे को खत्म करने की मांग रखी।



फिजिकल टेस्ट क्यों बना मुद्दा

दरअसल बैठक में यह बात खुलकर सामने आई कि पिछली भर्ती में सबसे ज्यादा देरी फिजिकल टेस्ट के कारण हुई। दौड़, मापतौल और अन्य टेस्ट पूरे होने में डेढ़ साल लग गए। इसी वजह से पूरी भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंच गई। हजारों उम्मीदवारों को नतीजों के लिए महीनों इंतजार करना पड़ा। आईएएस अफसरों ने सुझाया कि नया बोर्ड सबसे पहले इसी समस्या को दूर करे।



सीएम का सख्त रुख

मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ कहा कि भर्ती अब और नहीं टलनी चाहिए। उन्होंने अफसरों से कहा कि जल्द प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के सामने रखा जाए। सीएम ने यह भी संकेत दिया कि नवंबर के मध्य तक जरूरी नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं। इससे आवेदकों को लंबे इंतजार से राहत मिलने की उम्मीद है।



गृह विभाग की समीक्षा में भी भर्ती पर जोर

इसी बीच एक अलग बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गृह विभाग के कामकाज की विस्तार से समीक्षा की। शनिवार को सीएम हाउस पर अचानक बुलाई गई, इस बैठक में उन्होंने कहा कि विभागीय फाइलें अब ज्यादा दिन लंबित नहीं रहनी चाहिए। सीएम ने पहली बार सभी लंबित मामलों को निपटाने के लिए समयसीमा तय की।



इस बैठक में भी पुलिस भर्ती प्रमुख मुद्दा रही। सीएम ने खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को भी कहा। बोर्ड का प्रस्ताव अगली कैबिनेट बैठक में लाने के निर्देश दिए गए। इस बैठक में अपर मुख्य सचिव, गृह, संजय शुक्ला, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



सरकार का मानना है कि भर्ती बोर्ड बनने से पूरी प्रक्रिया संस्थागत होगी। परीक्षा आयोजन और चयन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। अफसरों को साफ कहा गया कि जरूरत से ज्यादा देरी अब स्वीकार नहीं होगी। सीएम ने यह भी कहा कि निर्णय लेने की गति बढ़नी चाहिए, खासकर संवेदनशील मामलों में।



अधिकार और नियंत्रण की लड़ाई

दरअसल यह मामला सिर्फ तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं है। असल में यह अधिकार और नियंत्रण की भी लड़ाई है। आईएएस अफसर चाहते हैं कि परीक्षा जैसा संवेदनशील काम ESB के पास रहे। वहीं पुलिस अफसर चाहते हैं कि पूरा नियंत्रण नए बोर्ड के पास हो। यही वजह है कि बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर बहस हुई। मामला अब कैबिनेट के स्तर पर तय होने की बात कही जा रही है।



आगे क्या होगा

अब यह मामला कैबिनेट के स्तर पर तय होगा। वहां तय होगा कि पुलिस भर्ती बोर्ड को कितनी शक्तियां दी जाएं। सरकार की मंशा साफ है कि दस हजार पदों पर भर्ती जल्द पूरी हो। आने वाले हफ्तों में इस पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती बोर्ड क्यों बनाया जा रहा है?
    सरकार चाहती है कि भर्ती प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो। अभी परीक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों में बंटी है। नया बोर्ड इस व्यवस्था को एक जगह लाने के लिए बनाया जा रहा है।
  2. भर्ती में डेढ़ साल की देरी क्यों हुई?
    पिछली भर्ती में फिजिकल टेस्ट पूरे होने में लंबा समय लगा। दौड़ और मापतौल जैसे टेस्ट कराने में देरी हुई। इसी वजह से पूरी भर्ती प्रक्रिया खिंच गई।
  3. 10,000 पुलिस पदों पर भर्ती कब तक पूरी होगी?
    सरकार ने अभी कोई तय तारीख नहीं बताई है। सीएम ने जल्द प्रस्ताव कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए हैं। नवंबर के मध्य तक कुछ नीतिगत फैसले हो सकते हैं।

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