MP पुलिस से हटेंगे 122 गैरजरूरी DSP पद, बदलेगा पूरा ढांचा, साइबर विंग में बढ़ेंगे
समझें क्या है पूरा मामला…
- मध्य प्रदेश पुलिस के ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
- पुलिस मुख्यालय ने 122 ऐसे डीएसपी पद चिन्हित किए हैं, जो अब जरूरी नहीं रहे।
- एंटी-डकैती जैसे पद इनमें शामिल हैं।
- इन पदों को खत्म कर बड़ा हिस्सा साइबर विंग को दिया जाएगा।
- प्रस्ताव जांच के बाद शासन को भेजा जाएगा।
15 साल से बेकार पद
मध्य प्रदेश को डकैत मुक्त हुए 15 साल हो चुके हैं। इसके बावजूद डीएसपी एंटी डकैती का पद कागजों में बना हुआ है। डेढ़ दशक से इस पद पर कोई तैनात नहीं हुआ।
डीएसपी लाइन और डीएसपी लीव रिजर्व जैसे पद भी बेकार हो चुके हैं। इन्हें देखते हुए पुलिस पहली बार पुराने ढांचे में सुधार करने जा रही है। दशकों बाद प्रशासनिक ढांचे में इतना बड़ा बदलाव हो रहा है।
पुराने समय की जरूरतों को देखकर बनाए गए कई पद अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं। न इन पर कोई अधिकारी तैनात है, न इनका कोई काम बचा है। पुलिस विभाग का मानना है कि इन पदों पर होने वाला बजट अब बेहतर इस्तेमाल में लाया जा सकता है। यही सोच पूरे पुनर्गठन की बुनियाद बनी है।
कैसे तय हुए 122 पद
पीएचक्यू की नीति निर्धारण समिति ने इन पदों की पहचान की। कई जिलों में महिला अपराध और अजाक (AJAK – अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण प्रकोष्ठ) के लिए अलग-अलग डीएसपी पद हैं। जबकि एक ही अफसर दोनों जिम्मेदारियां संभाल सकता है।
एडीजी प्रबंध योगेश चौधरी ने बताया कि प्रशासन शाखा ने डीएसपी पदों की समीक्षा कर जरूरत के हिसाब से बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव अब प्रबंध शाखा को भेजा गया है। जांच के बाद इसे सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
पुराने और गैरजरूरी पदों को हटाकर जो नए पद बनाए जाएंगे, उनमें सबसे ज्यादा फायदा साइबर विंग को मिलेगा। साइबर टीम में डीएसपी से लेकर सिपाही तक के पद बढ़ाए जाएंगे। इससे ऑनलाइन ठगी और दूसरे साइबर अपराधों की जांच में तेजी आएगी।
फिलहाल मध्य प्रदेश पुलिस में डीएसपी स्तर के 1009 और एएसपी स्तर के 265 पद मौजूद हैं।
साइबर विंग को मिलेगा बल
खत्म होने वाले पदों की जगह नए पद अलग से नहीं बनेंगे। इनका बड़ा हिस्सा साइबर विंग को मिलेगा। यहां डीएसपी से लेकर सिपाही तक के पद बढ़ाए जाएंगे। इससे साइबर अपराधों की जांच में तेजी आएगी।
63 पद खत्म कर साइबर विंग में 115 नए पद जोड़े जाएंगे। इनमें 8 डीएसपी पद भी शामिल होंगे। यह मप्र पुलिस के इतिहास में पहली बड़ी सर्जरी मानी जा रही है।
साइबर में कितने नए पद
साइबर विंग में हर स्तर पर स्टाफ बढ़ाया जाएगा। 15 डीएसपी सेंटरों पर 20 नए इंस्पेक्टरों के पद मिलेंगे। इतने ही सेंटरों पर 22 नए सब-इंस्पेक्टर के पद बनेंगे।
10 डीएसपी सेंटरों पर 20 हवलदारों के पद बढ़ेंगे। वहीं 15 सेंटरों पर 45 नए सिपाही तैनात होंगे। इस तरह साइबर विंग का पूरा ढांचा मजबूत होगा।
साइबर विंग में ऐसे बढ़ेगा स्टाफ
| मौजूदा सेंटर | नए पद |
|---|---|
| 15 DSP सेंटर | 20 इंस्पेक्टर |
| 15 DSP सेंटर | 22 सब इंस्पेक्टर |
| 10 DSP सेंटर | 20 हवलदार |
| 15 DSP सेंटर | 45 सिपाही |
MP Police अब पुराने अपराधों के बजाय नए साइबर अपराधों से निपटने के लिए अपना ढांचा तैयार कर रही है।
नए जिलों को मिलेगा DSP
40 नए डीएसपी हेडक्वार्टर पद बनाए जाएंगे। ये जिलों में दफ्तर प्रबंधन और ट्रैफिक की जिम्मेदारी देखेंगे। 8 नए सब डिवीजन भी बनेंगे, जहां सीएसपी (CSP – City Superintendent of Police) और एसडीओपी (SDOP – Sub-Divisional Officer of Police) तैनात होंगे।
पीएचक्यू के लिए 4 नए पद बनेंगे। हाईकोर्ट समन्वय के लिए 3 नए डीएसपी पद जोड़े जाएंगे। साथ ही 4 नए जिलों में महिला अपराध और अजाक के लिए डीएसपी पद बनेंगे।
जनता को क्या फायदा
57 जिलों में प्रस्तावित साइबर थानों को सीधे जांच अधिकारी मिल जाएंगे। नई भर्ती प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना होगा। फ्रॉड के मामलों में तुरंत फ्रीजिंग और रिकवरी हो सकेगी।
40 जिलों में डीएसपी हेडक्वार्टर बनने से पेंडिंग केस जल्दी निपटेंगे। ट्रैफिक की निगरानी भी तेज होगी। इससे आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
अभी कई जिलों में साइबर शिकायतें दर्ज होने के बाद जांच अधिकारी मिलने में समय लगता है। नए ढांचे के बाद यह देरी कम होने की उम्मीद है। खासकर आर्थिक ठगी के मामलों में तुरंत कार्रवाई मुमकिन होगी। इससे पीड़ितों को पैसा वापस मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
आगे क्या होगा
फिलहाल मप्र पुलिस में डीएसपी स्तर के 1009 पद हैं। एसएसपी स्तर के 265 पद मौजूद हैं। प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
मंजूरी के बाद ही नए पदों पर एमपी पुलिस में भर्ती शुरू होगी। इससे साइबर अपराध रोकने में मदद मिलेगी। पुलिस के पुराने ढांचे में यह सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
फिलहाल एंटी डकैती जैसे पदों पर तैनात अधिकारियों को कहां जिम्मेदारी (mp police bharti) दी जाएगी, इस पर अभी अलग से फैसला होना बाकी है। विभाग का जोर इस बात पर है कि किसी अफसर का पद खत्म होने से करियर पर असर न पड़े। पूरी प्रक्रिया शासन की मंजूरी और आगे के आदेशों पर निर्भर करेगी। एमपी पुलिस न्यूज
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