एमपी पुलिस का सुस्त एक्शन, फीडबैक में कड़वा रिएक्शन
News in Short
- एक जनवरी 2026 से 25 मार्च 2026 तक गृह विभाग को कुल एक लाख 14 हजार 814 ऑनलाइन शिकायतें मिली।
- 32% शिकायतों को नहीं सुलझाया जा सका, इनमें अग्नि दुर्घटनाओं, पुलिस इकाइयों से संबंधित शिकायतें शामिल हैं।
- साइबर पुलिस ने 1,175 शिकायतों में से केवल 36.60% ही सुलझाई गई।
- रेलवे पुलिस से संबंधित 40.94% और सशस्त्र बलों से जुड़ी 23.81% शिकायतों का ही समाधान किया जा सका।
- गृह विभाग और पुलिस इकाइयों की दक्षता शिकायतों के समाधान में कमजोर रही है।
News in Detail
मध्यप्रदेश की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा रही पुलिस जनता की समस्याएं सुलझाने में पिछड़ रही है। यही नहीं, शिकायतों का संतोषजनक समाधान भी नहीं कर पा रही है। ऑनलाइन शिकायतों के समाधान के फीडबैक का आंकड़ा भी पुलिस दक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। अफसर अग्नि दुर्घटना, सीआईडी जांच, साइबर, नागरिक सुरक्षा एवं होमगार्ड और सशस्त्र बलों से संबधित शिकायतों का संतुष्टिपूर्ण समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
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अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी
पुलिस और अन्य इकाइयों से संबंधित ऑनलाइन शिकायतें सीएम हेल्पलाइन डेशबोर्ड पर दर्ज होती हैं। इन शिकायतों की निगरानी गृह विभाग के पोर्टल पर भी होती है। इनमें पुलिस के अलावा फायर ब्रिगेड, कार्मिक, डायल 112, पुलिस दूरसंचार, प्रदेश से बाहर आपदाग्रस्त लोग, ट्रैफिक पुलिस, सीआईडी, जीआरपी, सशस्त्र बल, साइबर पुलिस, सैनिक कल्याण, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा जैसी सेवाएं शामिल हैं।
इनसे संबंधित शिकायतों को पीढ़ित या आमजन सीधे ही ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। इनके समाधान के लिए गृह विभाग द्वारा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीएचक्य में पदस्थ डीआईजी (प्रशासन) सत्येन्द्र शुक्ल के अनुसार पुलिस मुख्यालय शिकायतों के निराकरण पर लगातार मॉनिटरिंग करता है। इसके लिए पूरी इकाई कार्य कर रही है। कुछ शिकायतों में कानूनी प्रावधानों की वजह से निराकरण में देरी होती है। इसमें लगातार कसावट की जा रही है।
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उलझी रहीं 32 फीसदी शिकायत
गृह विभाग तक 1 जनवरी 2026 से 25 मार्च 2026 के बीच 114814 ऑनलाइन शिकायतें पहुंची हैं। इनमें से केवल 67.85 फीसदी शिकायतों पर ही सुनवाई हुई और 32 फीसदी से ज्यादा शिकायत समाधान के बिना ही रह गईं। इनमें भी कुछ इकाइयों से संबंधित एक भी शिकायत का संतुष्टिपूर्ण निराकरण नहीं किया जा सका है। अग्नि दुर्घटनाओं से संबंधित 34, शीर्ष अधिकारियों से संबंधित 20, कार्मिक इकाई की 166, पुलिस रेडियो इकाई की 7, सीआईडी संबंधित 2 शिकायतें आई थीं। इनमें से एक का भी समाधान नहीं किया गया।
समस्याओं के समाधान में नहीं संतुष्टि
पीढ़ितों की शिकायतों की सुनवाई में गृह विभाग की दक्षता भी सवालों के घेरे में है। इनमें गृह विभाग की इकाइयों और पुलिस परिवारों से संबंधित शिकायतें भी शामिल हैं। जीआरपी यानी रेलवे पुलिस को साल 2026 के 84 दिनों में 342 शिकायतें मिली हैं। इनमें से केवल 40.94 फीसदी ही संतुष्टि के साथ सुलझाई जा सकी हैं। सशस्त्र बलों से संबंधित 21 शिकायत ही सामने आई हैं। इनके समाधान में अफसरों की दक्षता बेहद कमजोर रही और केवल 23.81 फीसदी का ही निराकरण किया जा सका।
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शिकायत सुलझाने में पिछड़ी पुलिस
सरकार लगातार साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए संसाधन बढ़ा रही है लेकिन अब भी ऐसी शिकायतें का हल तलाशने में पुलिस पीछे हैं। साइबर पुलिस 1175 शिकायतें में से केवल 36.60 ही निपटा पाई है। होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा संबंधी 83 में से केवल 20 फीसदी और सैनिक कल्याण इकाई संबंधी 7 में से 14 फीसदी शिकायतों का ही संतोषजनक समाधान किया गया है।
अग्नि दुर्घटनाओं में रिस्पांस जीरो
राजधानी भोपाल और व्यावसायिक शहर इंदौर में बीते कुछ महीनों में लगातार अग्नि दुर्घटनाएं हुई हैं। इनसे संबंधित 17 शिकायतें इंदौर में और 19 शिकायत भोपाल में दर्ज हुई हैं। प्रदेश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण शहर होने के बावजूद इन दोनों ही शहरों में अग्नि दुर्घटनाओं से जुड़ी शिकायतों पर पुलिस और गृह विभाग का रिस्पांस शून्य रहा है। यानी 36 शिकायतों में से एक का भी संतुष्टिपूर्ण समाधान नहीं किया जा सका है।
सीएम हाउस के निर्देश पर धीमा एक्शन
पुलिस से संबंधित मामलों की 1992 शिकायतें सीएम हाउस पहुंची हैं। इनमें सबसे ज्यादा 281 शिकायतें राजधानी भोपाल की हैं। जबकि राजगढ़, विदिशा, सीहोर और इंदौर टॉप 5 जिलों में शामिल हैं। सीएम हाउस के माध्यम से आने के बावजूद इनमें से केवल 55फीसदी शिकायतों का ही समाधान किया जा सका है। इससे समझा जा सकता है ऑनलाइन दर्ज होने वाली आमजन की शिकायतों पर पुलिस रिस्पांस की स्थिति क्या होगी।
साइबर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल
साइबर पुलिस (cyber police ) से संबंधित 1189 शिकायतें पोर्टल पर दर्ज हुई हैं। अधिकारियों का फोकस इनमें समाधान से ज्यादा आंकड़ा घटाने पर रहा है। यही वजह है कि इनके निराकरण से केवल 37 फीसदी शिकायतकर्ता ही संतुष्ट हैं। भोपाल में 100 शिकायतें, इंदौर में 92, छिंदवाड़ा में 81, धार में 61 और सीधी में 51साइबर पुलिस से संबंधित शिकायतें दर्ज हुई हैं।
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होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा में बेरुखी
होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा से संबंधित इकाइयों की 85 शिकायतें ऑनलाइन पहुंची हैं। इन पर भी अधिकारियों द्वारा बेरुखी दिखाई गई है। इंदौर, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में एक भी शिकायत का संतुष्टिपूर्ण समाधान नहीं किया गया है। वहीं उज्जैन संभाग में 15, जबलपुर में 33, भोपाल में 20, रीवा में 22, शहडोल और सागर में 33 फीसदी समस्याओं का निराकरण किया गया है।