मध्यप्रदेश की चिट्ठी: किसानों और कर्मचारियों पर सरकार की रणनीति और विपक्ष की बेचैनी

The Sootr | Mar 07, 2026, 11:03 IST
mp political diary journalist prakash bhatnagar
मध्यप्रदेश के सत्ता के गलियारों में पिछले सप्ताह की हलचल कई संकेत छोड़ गई। विधानसभा के बजट सत्र के समापन से लेकर सरकार के राजनीतिक संदेशों और विपक्ष की बेचैनी तक, हर मोर्चे पर राजनीति का अलग रंग दिखा।

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश भटनागर @ भोपाल

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र वैसे तो 6 मार्च तक चलना था। लेकिन सरकार ने बजट पारित होते ही सत्र को दो दिन पहले ही समाप्त कर दिया। सत्ता पक्ष का तर्क था कि जरूरी काम पूरा हो चुका है, इसलिए सत्र जारी रखने का औचित्य नहीं है।



लेकिन विपक्ष का आरोप बिल्कुल उल्टा था। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि बजट की मांगों पर चर्चा का समय ही नहीं दिया गया और जल्दबाजी में सत्र खत्म कर दिया गया। करीब बाईस विभागों का बजट बिना चर्चा के ही पारित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि विपक्ष ने विरोध दर्ज कराते हुए सदन से वॉकआउट किया।



सियासी विश्लेषकों का मानना है कि सरकार किसी भी तरह के लंबे विवाद से बचना चाहती थी। इसलिए बजट पास होते ही सत्र समेट देने की रणनीति अपनाई गई। होली का त्योहार भी एक कारण था। रंगोत्सव आठ मार्च तक चलना है। ऐसे में होली की छुट्टी से कितने विधायक दो दिन के लिए सदन में हाजिरी लगाते, यह भी एक सवाल था।



c4af096a-22d


विपक्ष की बेचैनी

एमपी कांग्रेस ने विधानसभा के दौरान कई मुद्दे उठाने की कोशिश की। बेरोजगारी, महंगाई और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल भी किए।



सत्ता पक्ष का दावा है कि विपक्ष मुद्दों को लेकर एकजुट नहीं दिखा। सदन के अंदर विरोध जरूर हुआ, मगर उसे व्यापक राजनीतिक अभियान में बदलने की रणनीति अभी तक स्पष्ट नहीं दिखी।



हालांकि 24 फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में कांग्रेस ने एक बड़ी रैली की। लेकिन उसके मंच पर ही चार सौ से ज्यादा लोग मौजूद थे। जाहिर है कांग्रेस में कार्यकर्ताओं से ज्यादा तादाद नेताओं की है।



13913822-5bd


शायद यही उसकी जमीनी कमजोरी का कारण है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि विपक्ष को सरकार के खिलाफ कोई बड़ा जनआंदोलन खड़ा करने के लिए अभी और तैयारी करनी होगी।



किसानों पर फोकस

सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस रणनीति को लेकर रही, जिसमें सरकार लगातार किसानों पर फोकस कर रही है।



सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस साल को किसान कल्याण वर्ष की तरह पेश किया जाएगा। इसी कड़ी में आदिवासी क्षेत्र बड़वानी में कृषि कैबिनेट ने राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बढ़ा दी है।



d3b6aef2-8dd


असल में इसके पीछे दो राजनीतिक संदेश छिपे हैं। एक, ग्रामीण और किसान वोट बैंक को मजबूत करना और दूसरा आदिवासी इलाकों में राजनीतिक पकड़ बढ़ाना। ऐसा नहीं है कि किसानों के बीच या आदिवासियों के बीच भाजपा की पकड़ कमजोर हो लेकिन बीच में कुछ ऐसे विवाद सामने आए थे जिसमें आरएसएस के सहयोगी संगठन भारतीय किसान संघ ने ही एक तरह से विपक्ष की भूमिका अदा कर दी थी।



दूसरा विवाद, आदिवासियों के हिन्दू होने ना होने के सवाल पर चर्चा में रहा। जाहिर है सरकार ने अपनी रणनीति से दोनों क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने का काम शुरू कर दिया।



कर्मचारियों को साधने की कोशिश

सप्ताह के बीच में एक और फैसला सामने आया। सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी।



डीए को बढ़ाकर 58 प्रतिशत करने का फैसला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी माना जा रहा है। मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की संख्या और उनका प्रभाव इतना बड़ा है कि कोई भी सरकार इस वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती।



e3ab5f9b-28e


प्रशासनिक मोर्चे पर सख्ती

रबी सीजन की गेहूं खरीदी शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों की बैठक लेकर साफ संदेश दिया कि खरीदी व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी।



54535710-42d


दरअसल, प्रदेश की राजनीति में किसान और समर्थन मूल्य की खरीदी हमेशा बड़ा मुद्दा रहे हैं। पिछली सरकारों के दौर में खरीदी केंद्रों पर गड़बड़ियों ने कई बार राजनीतिक विवाद पैदा किए हैं। इसलिए इस बार सरकार पहले से ही सतर्क दिखाई दे रही है।



सत्ता के गलियारों में इस सप्ताह की हलचल से तीन बड़े संकेत साफ दिखाई दिए।



  1. एमपी सरकार फिलहाल किसानों और कर्मचारियों पर केंद्रित राजनीति कर रही है।
  2. विधानसभा में विपक्ष की आवाज तो है, लेकिन असर सीमित है।
  3. सरकार प्रशासनिक फैसलों के जरिए अपनी सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रही है।

कुल मिलाकर, यह सप्ताह बताता है कि मध्यप्रदेश की राजनीति फिलहाल शांत जरूर दिखती है, लेकिन सतह के नीचे सत्ता और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति को धीरे-धीरे आकार दे रहे हैं।



NOTE: (लेखक अनादि टीवी में Editor-in-Chief हैं। इस लेख में उनके निजी विचार हैं।)



ये खबरें भी पढ़ें...



राउंडअप-मध्यप्रदेश : हितानंद शर्मा की भाजपा से संघ में वापसी



मध्यप्रदेश की चिट्ठी: बेमकसद हंगामा... इसका फायदा क्या है



मध्यप्रदेश की चिट्ठी: सरकार और संगठन दोनों पर भारी विजय शाह



IPS Transfers MP: पुलिस महकमे में तबादलों की तैयारी, 2020 बैच के IPS को मिलेगी फील्ड पोस्टिंग



Tags:
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
  • राहुल गांधी
  • एमपी कांग्रेस
  • एमपी सरकार
  • होली
  • मध्य प्रदेश विधानसभा
  • प्रकाश भटनागर
  • मध्यप्रदेश की चिट्ठी