गर्मी-उमस से गर्भवती महिलाओं को खतरा: हर 100 में से 27वी महिला बन रही शिकार
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एक बड़ा सर्वे हुआ है।
- बीते छह महीनों में करीब 6.5 लाख गर्भवती महिलाओं की सेहत जांची गई।
- इनमें से 1.75 लाख महिलाओं को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में रखा गया है।
- प्रदेश में कुल 26.9% और भोपाल में 31.1% गर्भवती महिलाएं जोखिम में हैं।
- बढ़ती गर्मी, उमस और वायु प्रदूषण इस खतरे को और ज्यादा बढ़ा रहे हैं।
MP में हर चार में से एक गर्भवती खतरे में
मध्यप्रदेश में गर्भवती महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हुई जांच में यह बात सामने आई है। बीते छह महीनों में 6.5 लाख गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें से 1.75 लाख महिलाओं को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में रखा गया।
प्रदेश में हाई-रिस्क की दर 26.9 प्रतिशत रही। यानी हर 100 गर्भवती महिलाओं में लगभग 27 महिलाएं इस खतरनाक श्रेणी में पाई गईं। भोपाल में स्थिति और गंभीर रही। यहां 31.1 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में मिलीं।
कौन-सी बीमारियां बना रही हैं खतरनाक
हाई-रिस्क श्रेणी में चिह्नित गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, हाई ब्लड प्रेशर और गर्भकालीन मधुमेह सबसे आम कारण रहे। विशेषज्ञों के अनुसार 35 साल से अधिक उम्र में गर्भधारण भी जोखिम बढ़ाता है।
मोटापा, जुड़वा गर्भावस्था और पहले की प्रेग्नेंसी में जटिलताएं भी स्थिति को बिगाड़ती हैं। थायराइड जैसी बीमारियां भी इस श्रेणी में आने का कारण बन रही हैं। देर से शादी का चलन भी इस समस्या को बढ़ा रहा है।
प्लेसेंटा तक पहुंच रहे प्रदूषण के जहरीले कण
भोपाल एम्स के एक हालिया अध्ययन ने चौंकाने वाली जानकारी दी है। वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण जैसे पीएम 2.5 और पीएम 10 सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। ये कण प्लेसेंटा यानी अपरा तक भी पहुंच जाते हैं। इससे सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है।
नतीजा यह होता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व कम पहुंचते हैं। बच्चे के विकास पर सीधा असर पड़ता है।
गर्मी और उमस से ठिगनेपन का खतरा
सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, बढ़ती गर्मी भी गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ा खतरा बन रही है। जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित एक नई रिसर्च में यह बात कही गई है। अध्ययन में दक्षिण एशिया के करीब दो लाख बच्चों पर शोध हुआ। इनमें ज्यादातर भारत के बच्चे थे।
रिसर्च के अनुसार अगर जलवायु परिवर्तन इसी रफ्तार से जारी रहा तो 2050 तक दक्षिण एशिया में 30 से 37 लाख अतिरिक्त बच्चे स्टंटिंग के शिकार हो सकते हैं।
स्टंटिंग क्या होती है
स्टंटिंग यानी ठिगनापन एक गंभीर स्थिति है। इसमें बच्चे की लंबाई उम्र के हिसाब से कम रह जाती है। इससे सिर्फ कद ही नहीं रुकता। बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सीखने की शक्ति भी कमजोर होती है।
उमस वाली गर्मी ज्यादा खतरनाक
रिसर्च में यह भी बताया गया कि गर्मी के साथ नमी यानी उमस हो तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गर्मी और उमस दोनों होने पर बच्चे की लंबाई औसतन 5.1 प्रतिशत तक कम रह सकती है। वहीं सिर्फ सूखी गर्मी में यह आंकड़ा केवल 1.3 प्रतिशत था।
बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उमस वाली गर्मी पड़ती है। इसलिए यहां खतरा ज्यादा है।
गर्भावस्था की आखिरी तिमाही में सबसे ज्यादा जोखिम
रिसर्च में बताया गया कि प्रेग्नेंसी के आखिरी तीन महीने यानी 28वें से 40वें हफ्ते के बीच गर्मी का असर सबसे ज्यादा होता है।यही वह समय होता है जब बच्चे का विकास सबसे तेजी से होता है। इस दौरान उसे सबसे ज्यादा पोषण की जरूरत होती है।
गर्मी और उमस में मां का शरीर खुद को ठंडा रखने में ऊर्जा लगाता है। इससे प्लेसेंटा में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है और बच्चे तक पोषण कम पहुंचता है।
क्या करें गर्भवती महिलाएं
विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक गर्मी और उमस भरे वातावरण से बचाया जाए।समय पर जांच कराना जरूरी है। नियमित देखभाल से हाई-रिस्क स्थिति को पहले पकड़ा जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देने की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अभी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ी को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
एक्सपर्ट कोट्स
डॉ. नसीमा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एम्स भोपाल: "20 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में आ रही हैं। खून की कमी, बीपी, थायराइड और प्रदूषण के साथ-साथ 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण भी खतरा बढ़ा रहा है। समय पर जांच से मां और शिशु दोनों की जान बचाई जा सकती है।" (स्रोत: पत्रिका न्यूज नेटवर्क, भोपाल)
डॉ. हिमांशु भदानी, पीडियाट्रिक विभाग, एम्स दिल्ली: "स्टंटिंग में बच्चे की लंबाई उम्र के हिसाब से कम रह जाती है। इससे सिर्फ कद नहीं रुकता — बच्चे की इम्यूनिटी और सीखने की क्षमता भी कमजोर होती है। इसका मुख्य कारण कुपोषण है।" (स्रोत: आजतक, 09 जून 2026)
FAQ
- हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी क्या होती है और इसके क्या कारण हैं?
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वह स्थिति है जिसमें मां या बच्चे को सामान्य से अधिक खतरा होता है। इसके मुख्य कारण हैं — खून की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, गर्भकालीन मधुमेह, 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण और वायु प्रदूषण। - वायु प्रदूषण गर्भावस्था को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण यानी पीएम 2.5 और पीएम 10 सांस के जरिए शरीर में जाते हैं और प्लेसेंटा तक पहुंच सकते हैं। इससे सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। नतीजतन बच्चे को जरूरी ऑक्सीजन और पोषण कम मिलता है। - गर्मी और उमस से बच्चे का विकास क्यों रुकता है?
उमस भरी गर्मी में गर्भवती मां का शरीर खुद को ठंडा रखने में ऊर्जा लगाता है, जिससे प्लेसेंटा में ब्लड सर्कुलेशन घटता है। इससे बच्चे तक पोषण और ऑक्सीजन कम पहुंचती है।
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