MP पॉलिटेक्निक शिक्षक भर्ती: GATE 2026 और 2004 के पुराने नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती

Neel Tiwari | Jan 20, 2026, 22:58 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने GATE 2026 आधारित पॉलिटेक्निक भर्ती और 2004 के नियमों पर सरकार से जवाब मांगा है। अतिथि विद्वानों ने वैधता पर सवाल उठाए।

NEWS IN SHORT

  • पॉलिटेक्निक शिक्षक भर्ती नियम-2004 की वैधता पर सवाल
  • GATE 2026 को शिक्षक भर्ती का आधार बनाने पर आपत्ति
  • सरकार और AICTE को हाईकोर्ट का नोटिस
  • सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत नियम बनाने पर विवाद
  • हजारों गेस्ट लेक्चरर के भविष्य से जुड़ा मामला

मध्य प्रदेश में पॉलिटेक्निक कॉलेजों की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी कटघरे में आ गई है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में GATE 2026 के आधार पर भर्ती और 2004 के भर्ती नियमों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने सरकार और AICTE को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।



NEWS IN DETAIL

जबलपुर हाईकोर्ट में WP क्रमांक 47423/2025 पर 20 जनवरी 2026 को सुनवाई हुई। सुनवाई जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने की।



यह याचिका राज्य के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में वर्षों से कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं द्वारा दायर की गई है। इसमें न केवल GATE 2026 के माध्यम से प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई है, बल्कि “मध्य प्रदेश तकनीकी शिक्षा पॉलिटेक्निक कॉलेज (शिक्षण कैडर) सेवा (भर्ती) नियम, 2004” की संवैधानिक और कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।



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सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम की सीमा पर बहस

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह और पुष्पेंद्र कुमार शाह ने कोर्ट को बताया कि पॉलिटेक्निक शिक्षक भर्ती नियम-2004 को “मध्य प्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973” की धारा 43(1) के तहत बनाया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह अधिनियम केवल सोसाइटी के पंजीकरण और उसके प्रशासन से संबंधित है, न कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और कैडर संरचना तय करने के लिए।



अनुच्छेद 309 बनाम सोसाइटी अधिनियम

अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अपने कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तों के लिए नियम बनाए। इसके बावजूद सरकार ने अनुच्छेद 309 के तहत नियम न बनाकर सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम का सहारा लिया। जो कानून की मूल भावना के विपरीत है। इस आधार पर भर्ती नियमों को अल्ट्रा वायर्स, मनमाना और असंवैधानिक बताया गया।



GATE 2026 को लेकर मुख्य आपत्ति

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2015 में नियमों में संशोधन कर लिखित परीक्षा को अनिवार्य किया गया और अब उसी के आधार पर GATE 2026 को पॉलिटेक्निक शिक्षक भर्ती का मानदंड बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि GATE परीक्षा का उद्देश्य स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश और फेलोशिप देना है, न कि शिक्षकों की सीधी भर्ती करना। AICTE द्वारा भी पॉलिटेक्निक शिक्षक पदों के लिए GATE को अनिवार्य नहीं किया गया है।



ग्वालियर बेंच में लंबित मामला, फिर भी जारी हुआ विज्ञापन

अधिवक्ताओं ने कोर्ट का ध्यान इस तथ्य की ओर भी दिलाया कि इन्हीं भर्ती नियमों के आधार पर वर्ष 2019 में जारी विज्ञापन को ग्वालियर बेंच में चुनौती दी गई थी, जिस पर अंतरिम रोक भी लगाई गई थी। वह मामला आज भी लंबित है। इसके बावजूद सरकार द्वारा विवाद का अंतिम निपटारा किए बिना समाचार पत्रों में GATE 2026 आधारित नई भर्ती सूचना प्रकाशित करना कानून के खिलाफ है।



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अन्य हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

याचिकाकर्ताओं की ओर से पटना हाईकोर्ट के राम मनोहर पांडे बनाम बिहार राज्य (2019) फैसले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें शिक्षक भर्ती के लिए GATE को अनिवार्य करना असंवैधानिक ठहराया गया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी बरकरार रखा जा चुका है, जिससे याचिकाकर्ताओं के तर्कों को और मजबूती मिलती है।



AICTC और सरकार को जारी हुआ नोटिस

कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए मध्य प्रदेश सरकार और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) को नोटिस जारी कर स्पष्ट जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से 2004 के भर्ती नियमों की वैधता और GATE 2026 के इस्तेमाल पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।



याचिका में भर्ती विज्ञापन रद्द करने की मांग

याचिका में 21 सितंबर 2025 को जारी GATE आधारित भर्ती विज्ञापन को रद्द करने। पॉलिटेक्निक शिक्षक भर्ती नियम-2004 और उसके संशोधनों को अवैध घोषित करने। संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत नए नियम बनाए जाने तक पूरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है।



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हजारों अतिथि व्याख्याताओं के भविष्य पर असर

यह मामला केवल एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था की कानूनी नींव से जुड़ा हुआ है। कोर्ट के अंतिम फैसले का सीधा असर हजारों अतिथि व्याख्याताओं के भविष्य, नियमित भर्ती प्रक्रिया और सरकार की नीति पर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें सरकार और AICTE के जवाब पर टिकी हुई हैं।





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