मध्य प्रदेश प्राथमिक स्कूलों का ड्रॉपआउट रेट: 23 साल में 15% से घटकर शून्य पर पहुंचा आंकड़ा
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा को लेकर राहत भरी खबर है।
- प्रदेश में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर अब शून्य हो गई है।
- साल 2002-03 में यह दर 15 प्रतिशत थी।
- बीते 23 साल में सरकार ने कई योजनाएं चलाईं।
- इन योजनाओं और अभियानों से बच्चों को स्कूल से जोड़े रखना संभव हुआ।
15% से शून्य तक का सफर
प्रदेश सरकार के आंकड़े बताते हैं कि यह बदलाव धीरे-धीरे हुआ है। हर साल दर में थोड़ी कमी आती गई। आखिरकार प्राथमिक स्तर पर यह शून्य पर पहुंच गई।
हालांकि माध्यमिक स्तर पर अभी भी 6.2 प्रतिशत बच्चे बीच में पढ़ाई छोड़ रहे हैं। सेकंडरी स्तर पर यह आंकड़ा 13 प्रतिशत है। यानी बड़ी कक्षाओं में अभी और काम करने की जरूरत है।
गृह संपर्क अभियान ने दिखाया असर
बता दें कि स्कूल से बाहर हो चुके बच्चों को वापस लाने के लिए गृह संपर्क अभियान चलाया गया था। इसमें शिक्षकों ने घर-घर जाकर सर्वे किया। जो बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे, उन्हें ढूंढा गया।
इसके बाद उन्हें फिर से स्कूल में दाखिला दिलाया गया। इस अभियान से अब तक प्रदेशभर में तीन लाख से ज्यादा बच्चे स्कूलों से जुड़ चुके हैं।
प्रोत्साहन योजनाओं की बड़ी भूमिका
बच्चों को स्कूल से जोड़े रखने में कई योजनाओं ने मदद की है। इनमें साइकिल, स्कूटी और लैपटॉप बांटने जैसी योजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा समेकित छात्रवृत्ति योजना भी अहम रही है। ये योजनाएं खासकर गरीब और दूर-दराज के इलाकों के बच्चों के लिए मददगार साबित हुई हैं।
इन योजनाओं ने बढ़ाया भरोसा
सुपर 100 योजना के तहत मेधावी विद्यार्थियों (मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना) को कक्षा 11वीं और 12वीं में खास कोचिंग दी जाती है। इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।
सेनिटरी नैपकिन योजना के तहत छात्राओं के स्वास्थ्य के लिए हर साल 300 रुपए भेजे जा रहे हैं। इससे छात्राओं की उपस्थिति भी नियमित बनी रहती है।
फ्री लैपटॉप योजना में हायर सेकेंडरी में 75 प्रतिशत या ज्यादा अंक लाने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 25 हजार रुपए मिलते हैं।
ई-हॉस्टल सिस्टम के जरिए छात्रावासों का संचालन अब डिजिटल तरीके से हो रहा है। इससे रिकॉर्ड रखने में पारदर्शिता बढ़ी है।
डिजिटल शिक्षा का विस्तार
सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी (ICT – Information and Communication Technology) लैब बनाई गई हैं।
शैक्षणिक सत्र 2025-26 तक प्रदेश के मिडिल स्कूलों में 4 हजार 163 स्मार्ट क्लास मंजूर की गई हैं। इससे बच्चों को आधुनिक तरीके से पढ़ाई करने का मौका मिल रहा है।
ये खबरें भी पढ़िए...
एमपी में 19 सितंबर को 7500 मेधावी छात्रों को मिलेगी स्कूटी, जानें शर्ते
मुख्यमंत्री स्कूटी योजना: पैसा लेकर स्कूटी नहीं खरीदी तो लौटाने होंगे रुपए, माता-पिता भी फंसेंगे
एमपी श्रम विभाग का बड़ा तोहफा: सरकार दे रही ई-स्कूटी पर 40 हजार की सब्सिडी
सरकारी से प्राइवेट होंगे अस्पताल, 4000 करोड़ के 9 मेडिकल कॉलेज संभालेगी प्राइवेट कंपनियां