एमपी के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की भारी कमी, नीति आयोग ने जारी किए आंकड़ें

Manya Jain | Jun 06, 2026, 14:13 IST
MP Primary School Enrollment Ratio
नीति आयोग की नई रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के नामांकन (Enrollment Ratio) में भारी गिरावट आई है। राज्य का नामांकन दर पिछले दस वर्षों में करीब 30 फीसदी तक गिरकर 76.3% पर पहुंच गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नीति आयोग ने मई 2026 में देश के स्कूलों से जुड़े नए आंकड़े जारी किए हैं।
  • मध्यप्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के नामांकन में भारी कमी दर्ज की गई है।
  • पिछले दस सालों में राज्य का प्राथमिक नामांकन दर करीब 30 प्रतिशत तक गिरा है।
  • साल 2024–25 के आंकड़ों में एमपी की सकल नामांकन दर (GER) 76.3% रही है।
  • नामांकन में आई यह गिरावट पूरे देश में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है।

एमपी के प्राथमिक स्कूलों में तेजी से घटे बच्चे

मध्यप्रदेश में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। राज्य के प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के दाखिले यानी नामांकन में बहुत बड़ी कमी देखी गई है।



नीति आयोग ने मई 2026 में नए आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश का प्राथमिक सकल नामांकन अनुपात (Gross student enrollment Ratio - GER) काफी नीचे गिर गया है।



यह गिरावट राज्य में शिक्षा के स्तर, बच्चों को स्कूल में रोकने के उपायों और सरकारी योजनाओं के असर पर बड़े सवाल खड़े करती है। इतिहास में पहली बार दाखिलों में इतना बड़ा अंतर देखा गया है।



दस सालों में करीब 30 फीसदी नीचे गिरा ग्राफ

अगर हम पिछले एक दशक यानी दस साल पुराने आंकड़ों को देखें तो स्थिति बहुत बेहतर थी। उस समय मध्य प्रदेश का प्राथमिक स्कूल नामांकन दर लगभग 109.3 प्रतिशत के आस-पास हुआ करता था।



लेकिन अब जारी हुए साल 2024-25 के ताजा आंकड़ों में यह केवल 76.3% रह गया है। इसका सीधा मतलब है कि पिछले दस वर्षों में इसमें लगभग 30 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।



नामांकन दर में इतनी बड़ी कमी आने से शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं। उनका मानना है कि इस समस्या पर तुरंत ध्यान देने की बहुत ज्यादा जरूरत है।



हिंदी बेल्ट के बड़े राज्यों में सबसे खराब प्रदर्शन

यह गिरावट देश के अन्य बड़े राज्यों की तुलना में भी काफी ज्यादा है। पूरे भारत में केवल बिहार और उत्तर प्रदेश में ही ऐसी बड़ी गिरावट देखी गई है।



मध्यप्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है। यहां आबादी बहुत ज्यादा है, इसलिए एक फीसदी का बदलाव भी लाखों बच्चों के जीवन को सीधे प्रभावित करता है।



इतने बड़े पैमाने पर बच्चों का मुख्य शिक्षा प्रणाली से बाहर होना नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस गिरावट के पीछे गहरे कारणों को ढूंढना जरूरी है।



छोटे राज्यों ने मारी बाजी

नीति आयोग के इस नए डेटा से एक और दिलचस्प बात सामने आई है। छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे लक्षद्वीप और दादरा एवं नगर हवेली में बच्चों के नामांकन में भारी बढ़त हुई है।



इसके विपरीत हिंदी भाषी बेल्ट के बड़े राज्यों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। मध्यप्रदेश अभिभावक संघ के महासचिव प्रबोध पंड्या ने इस स्थिति पर चिंता जताई है।



पंड्या का कहना है कि इतने बड़े राज्य में नामांकन दर का 109.3% से गिरकर 76.3% पर आना बहुत गंभीर बात है। इससे लाखों बच्चे स्कूल की पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं।



भारी गिरावट के पीछे का कारण?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई बड़े और गहरे कारण हो सकते हैं। इनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:



  • स्कूलों तक पहुंच की कमी: कई ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बच्चों के लिए स्कूलों तक पहुंचना आज भी कठिन है।
  • पलायन की समस्या: रोजगार की तलाश में परिवारों का एक राज्य से दूसरे राज्य में जाना भी बच्चों की पढ़ाई छुड़वा देता है।
  • डेटा की सफाई: कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कागजों पर होने वाले फर्जी नामांकन को हटाने से भी यह संख्या कम हुई है।
  • स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति: प्राथमिक कक्षाओं के बाद बच्चों को स्कूल में रोक कर रख पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

स्थिति सुधारने के लिए क्या करना होगा?

अभिभावक संघ और शिक्षाविदों का कहना है कि सरकार को इस गिरावट को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। यदि बच्चे सच में स्कूल नहीं जा रहे हैं, तो विशेष योजनाएं शुरू करनी होंगी।



इसके लिए मिड-डे मील योजना को और ज्यादा मजबूत करना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के लिए फ्री ट्रांसपोर्ट या बस सेवा की व्यवस्था करनी होगी।



इसके साथ ही गरीब परिवारों के लिए विशेष आर्थिक मदद और जागरूकता अभियान चलाने होंगे। अधिकारियों को घर-घर जाकर सर्वे करना चाहिए ताकि सही कारणों का पता लगाया जा सके।



FAQ

  1. मध्यप्रदेश में प्राथमिक स्कूलों का नामांकन दर (GER) कितना गिरा?
    नीति आयोग के 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश का प्राथमिक सकल नामांकन अनुपात (GER) घटकर 76.3% रह गया है।
  2. मध्यप्रदेश में प्राथमिक नामांकन में गिरावट का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
    विशेषज्ञों के अनुसार स्कूलों तक पहुंच की कमी, परिवारों का पलायन, स्कूल छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति और डेटा प्यूरीफिकेशन जैसे कारण इस गिरावट के पीछे हो सकते हैं।
  3. नामांकन दर बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
    मिड-डे मील योजना को मजबूत करना, ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना, आर्थिक सहायता देना और घर-घर सर्वे कर वास्तविक कारणों की पहचान करना जरूरी माना जा रहा है।

ये भी पढ़ें...



MP NFHS Report: एमपी में महिलाओं के पास बैंक खाते पर मोबाइल नहीं



15 दिन के लिए एकांतवास में जाते हैं भगवान जगन्नाथ, जानें क्यों पड़ जाते हैं बीमार



पेपरलेस काम के लिए तुरंत डाउनलोड करें ये Government Apps, घर बैठे मिलेगी हर सर्विस



MP सिविल सेवा के नियम का ड्राफ्ट जारी: 2 से ज्यादा बच्चे तो सरकारी नौकरी नहीं



Tags:
  • नीति आयोग
  • मध्यप्रदेश
  • नामांकन
  • प्राथमिक स्कूल
  • student enrollment