एमपी के निजी कॉलेजों के लिए नए नियम: कॉलेज हुआ बंद तो पढ़ाई का खर्च उठाएंगे संचालक, कैंपस शेयरिंग पर भी रोक
कॉलेज बंद करने से पहले क्या करना होगा?
कॉलेज बंद करने के नियमों में इस बार बड़ा बदलाव किया गया है। अब कॉलेज संचालक को उसे बंद करने से 6 महीने पहले सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी। बिना बताए कोई भी कॉलेज बीच सत्र में बंद नहीं हो सकेगा।
अगर किसी वजह से कॉलेज बंद होता है, तो भी छात्रों की पढ़ाई नहीं रुकेगी। विश्वविद्यालय छात्रों का दूसरे कॉलेज में दाखिला कराएगा, ताकि उन्हें खुद कॉलेज तलाशने के लिए भटकना न पड़े। छात्रों की डिग्री या डिप्लोमा पूरा होने तक का पूरा खर्च कॉलेज समिति को उठाना होगा।
इस नियम से उन छात्रों को राहत मिलेगी। जिनकी पढ़ाई कॉलेज अचानक बंद होने से बीच में ही छूट जाती थी।
झूठे शपथ-पत्र पर सीधी एफआईआर
नियमों में गलत जानकारी पर भी सख्ती है। झूठा शपथ-पत्र (हलफनामा) देने वाले संचालकों पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी। इससे फर्जी दावों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
कैंपस शेयरिंग पर रोक क्यों लगाई?
कई कॉलेज एक ही बिल्डिंग में बीएड, लॉ और दूसरे पारंपरिक कोर्स चलाते थे। इससे छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ता था। अब कैंपस शेयरिंग पर रोक लगा दी गई है। यानी हर कॉलेज की लाइब्रेरी, लैब और क्लासरूम अलग-अलग होंगे।
खेल मैदान और आदिवासी क्षेत्रों के लिए राहत
अगर कॉलेज के पास खेल का मैदान नहीं है, तो उसे 2 किलोमीटर के दायरे में मौजूद किसी मैदान के लिए लिखित और रजिस्टर्ड करार करना होगा। इससे छात्रों को खेलकूद की सुविधा मिल सकेगी।
अनुसूचित और दूरदराज के इलाकों में जमीन से जुड़ी शर्तों में 3 साल की छूट मिलेगी। इससे ग्रामीण और आदिवासी छात्रों को अपने घर के पास ही कॉलेज में पढ़ने का मौका मिलेगा।
हॉस्टल में पुलिस पंजीयन क्यों जरूरी?
दूसरा बड़ा फायदा हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा है। अब निजी कॉलेजों के हॉस्टल का पुलिस में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। हॉस्टल में रहने वाले हर छात्र-छात्रा का नाम नजदीकी थाने में दर्ज होगा। यानी हॉस्टल में रहने वाले सभी विद्यार्थियों का पुलिस में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
इस नियम का मकसद है कि पुलिस के पास जानकारी रहे कि कौन-सा छात्र कहां रह रहा है। इसके साथ ही हॉस्टल में जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी।
क्या है हॉस्टल सील करने का नियम?
हॉस्टल में पर्याप्त टॉयलेट, साफ पानी और सुरक्षा के जरूरी इंतजाम होने चाहिए। अगर ये सुविधाएं नहीं मिलीं, तो प्रशासन हॉस्टल खाली करवाकर उसे तुरंत सील कर देगा। यह नियम छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। हालांकि, हॉस्टल सील होने पर वहां रहने वाले छात्रों का क्या होगा, इस बारे में खबर में साफ जानकारी नहीं दी गई है।
संचालकों के लिए क्या बदलेगा
कॉलेज संचालकों की जिम्मेदारी अब बढ़ जाएगी। अगर कॉलेज बंद करना है, तो 6 महीने पहले इसकी जानकारी देनी होगी। कॉलेज बंद होने पर छात्रों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना होगा। गलत शपथ-पत्र देने पर एफआईआर दर्ज होगी। इसके अलावा, अलग-अलग जरूरी सुविधाएं, खेल मैदान के लिए अनुबंध और सुरक्षित हॉस्टल की व्यवस्था भी करनी होगी।
लेकिन सवाल यह है कि क्या इन नियमों से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा?
अभिभावक दाखिला लेने से पहले कॉलेज की लाइब्रेरी, लैब और हॉस्टल की स्थिति खुद देख सकेंगे। नए नियमों में इन सुविधाओं को जरूरी बनाया गया है। हालांकि, इन सुविधाओं की जांच कौन करेगा और यह जांच कैसे होगी, इस बारे में खबर में जानकारी नहीं दी गई है।