एमपी के प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान योजना का करेंगे बहिष्कार: 8 अक्टूबर से आंदोलन की चेतावनी, NABH की शर्त पर विवाद
पैसे अटकने से परेशानी बढ़ रही
भोपाल के कई अस्पतालों का पैसा आयुष्मान योजना में अटका हुआ है। अस्पतालों का औसतन डेढ़ से दो करोड़ रुपए बकाया है। इसी वजह से संगठनों ने आंदोलन का फैसला लिया है। खबरों के मुताबिक, आईएमए अध्यक्ष डॉ. भजनलाल शरणागत ने समस्याएं बताई है। उनके अनुसार पुराने और वर्तमान पोर्टल पर भुगतान अटका हुआ है। इसके अलावा सीपीडी स्तर पर भी कई क्लेम लंबे समय से अटके हुए हैं। क्लेम रिजेक्शन और अनावश्यक कटौती की दिक्कतें भी सामने आई हैं।
इलाज की मंजूरी और क्लेम प्रक्रिया
बता दें इलाज शुरू करने से पहले मंजूरी ली जाती है। इसमें मरीज की बीमारी और इलाज की जानकारी दी जाती है। पैकेज के आधार पर इलाज की मंजूरी मिलती है। मंजूरी के बाद मरीज का इलाज शुरू होता है। इसका खर्च अस्पताल अपने संसाधनों से उठाते हैं। वहीं, इलाज पूरा होने के बाद अस्पताल क्लेम जमा करते हैं।
कटौती और रिजेक्शन से दबाव बढ़ रहा
अस्पतालों का कहना है कि बाद में क्लेम काटे जाते हैं। कई मामलों में वैध क्लेम भी रिजेक्ट किए जाते हैं। इससे अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। अस्पताल संचालकों ने तकनीकी वजहों से हो रहे रिजेक्शन पर भी आपत्ति जताई है। उनके अनुसार तय समय और सर्टिफिकेशन जैसी वजहों से क्लेम रिजेक्ट होते हैं। डॉक्यूमेंटेशन और ट्रिगर से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आती हैं।
संगठन की मांग क्या है
- क्लेम प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
- हर कटौती और रिजेक्शन का स्पष्ट कारण अस्पतालों को बताया जाए।
- क्लेम की जांच योग्य डॉक्टरों से कराई जाए।
- शिकायतों की सुनवाई की बेहतर व्यवस्था बनाई जाए।
- पैकेज दरें इलाज के वास्तविक खर्च के अनुसार तय हों।
- भुगतान की समय-सीमा तय हो।
- संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय हो।
यूपीएचडीए अध्यक्ष की चेतावनी
यूपीएचडीए अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने समय पर भुगतान की मांग की है। साथ ही अस्पताल लंबे समय से इन समस्याओं का समाधान मांग रहे हैं। उनके मुताबिक समाधान न मिला, तो आंदोलन जारी रहेगा। इसके अलावा एक हजार एम्बुलेंस लेकर दिल्ली जाएंगे और जिम्मेदारों से बात करेंगे।
दिल्ली कूच करने की चेतावनी
यूपीएचडीए चेयरमैन डॉ. जीशान अहमद ने वास्तविक मरीजों के क्लेम रोकने पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक तकनीकी वजहों से वैध क्लेम नहीं रुकने चाहिए। उन्होंने कहा कि इलाज कैशलेस हो सकता है, कॉस्टलेस नहीं। इलाज के बाद भुगतान रोकना सही व्यवस्था नहीं है। अस्पताल संगठन ने दिल्ली जाकर संबंधित अधिकारी से मिलने की चेतावनी दी है।
300 अस्पताल के पास NABH सर्टिफिकेट नहीं
नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की वेबसाइट के अनुसार चार शहरों के 739 अस्पताल आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से जुड़े हैं। इन अस्पतालों के लिए नई शर्त 1 अक्टूबर से लागू हुई है। यह नियम भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में लागू है। इन शहरों के अस्पतालों के लिए NABH सर्टिफिकेट जरूरी है। यह नियम पहले 1 अप्रैल से लागू होना था। अस्पतालों को तैयारी के लिए छह महीने का समय दिया गया था। इसके बाद नियम 1 अक्टूबर से शुरू किया गया। इन 739 अस्पतालों में 300 अस्पताल ऐसे हैं, जिनके पास NABH सर्टिफिकेट नहीं है।
कार्रवाई का समर्थन किया अस्पताल संगठन
अस्पताल संगठन वास्तविक धोखाधड़ी पर कार्रवाई के पक्ष में हैं। उन्होंने गलत मामलों में सख्त कार्रवाई का समर्थन किया है। वे चाहते हैं कि वास्तविक मरीजों के क्लेम न रोके जाएं। उनका कहना है कि बीमारी, भर्ती और इलाज सही हों, तो भुगतान मिलना चाहिए।
FAQs
- भोपाल के अस्पतालों का आयुष्मान योजना में पैसा क्यों अटका हुआ है?
भोपाल के अस्पतालों का औसतन डेढ़ से दो करोड़ रुपए आयुष्मान योजना में बकाया है, जिसके कारण अस्पतालों ने आंदोलन का निर्णय लिया है। - अस्पतालों की भुगतान प्रक्रिया में कौन-कौन सी समस्याएं आ रही हैं?
अस्पतालों को क्लेम रिजेक्शन, अनावश्यक कटौती, और विभिन्न तकनीकी समस्याओं जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - UPHDA के अध्यक्ष द्वारा क्या चेतावनी दी गई है?
UPHDA अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल ने समय पर भुगतान की मांग की है और कहा है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वह एक हजार एम्बुलेंस लेकर दिल्ली जाएंगे।