एमपी में निजी स्कूलों के मान्यता नियमों पर बवाल: सिक्योरिटी डिपॉजिट पर भड़के संचालक

Aman Vaishnav | Aug 05, 2026, 10:30 IST
एमपी में निजी स्कूलों के मान्यता नियमों पर बवाल
मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों की मान्यता और नवीनीकरण के नए नियमों पर विवाद शुरू हो गया है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इस नियम का कड़ा विरोध करते हुए इसे स्कूलों पर फालतू का आर्थिक बोझ बताया है।

मध्यप्रदेश के निजी स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन जारी हुई है। इसके जारी होते ही प्रदेश में विवाद शुरू हो गया है।



स्कूल शिक्षा विभाग ने मान्यता, नवीनीकरण, माध्यम बदलने और स्थान बदलने के नियम पहले से सख्त कर दिए हैं।



मकसद है कि निजी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर हो और गड़बड़ियां रुकें।



एसोसिएशन का विरोध

नई गाइडलाइन जारी होते ही प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। संगठन का कहना है कि यह स्कूलों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ है। एसोसिएशन के मुताबिक कक्षा 1 से 8 तक की मान्यता के लिए पहले से ही 40 हजार रुपए की एफडी जमा करानी पड़ती है।



अब 9वीं से 12वीं तक के लिए छात्र संख्या के आधार पर एक लाख रुपए तक की अतिरिक्त एफडी मांगी जा रही है। एसोसिएशन इसे अनुचित बता रहा है और कह रहा है कि नए नियम स्कूल संचालकों को परेशान करेंगे।



नई गाइडलाइन में क्या

बता दें कि अगर किसी निजी स्कूल ने पाठ्यक्रम और कामकाज के लिए मान्यता ली है, तो अब उसे नए नियम मानने होंगे। स्कूलों को इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक व्यवस्था और आईसीटी जैसी सुविधाएं देनी होंगी।



साथ ही प्रयोगशाला, पुस्तकालय और सुरक्षा निधि जैसे प्रावधान भी अनिवार्य किए गए हैं। अब सिर्फ कागजी मान्यता से काम नहीं चलेगा। स्कूलों को जमीन पर सुविधाएं दिखानी होंगी।



वहीं अगर कोई स्कूल शर्तें पूरी नहीं करता, तो पहले नोटिस मिलेगा। सुधार नहीं हुआ तो मान्यता रद्द हो सकती है। साथ ही 2 लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।



राज्य मान्यता समिति

नई व्यवस्था में राज्य स्तर पर एक समिति बनाई जाएगी। इसमें कम से कम तीन सदस्य होंगे। समिति मान्यता, नवीनीकरण, विस्तार और नाम परिवर्तन जैसे मामलों पर फैसला लेगी।



समिति में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव या सचिव शामिल होंगे। आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनायल और मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के वरिष्ठ अधिकारी भी सदस्य होंगे। यानी बड़े फैसले अब पूरी समिति मिलकर लेगी, अकेला अधिकारी नहीं।



आवेदन की प्रक्रिया

मान्यता या नवीनीकरण के लिए स्कूलों को ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। साथ में तय दस्तावेज भी जमा करने होंगे। हर साल 30 सितंबर तक मिले आवेदन उसी सत्र के लिए माने जाएंगे। इसके बाद के आवेदन अगले सत्र के लिए वैध होंगे।



बिना नई मान्यता के कोई स्कूल नई शाखा शुरू नहीं कर सकेगा। आवेदन मिलने के बाद अधिकारी को 45 दिन में फैसला लेना होगा। आवेदन अधूरा हो तो 15 दिन में खामियां बताई जाएंगी।



सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि

नई गाइडलाइन में छात्र संख्या के आधार पर डिपॉजिट तय की गई है। सिर्फ हाईस्कूल वाले संस्थानों को 250 छात्र तक 25 हजार रुपए जमा करने होंगे। 501 से 750 छात्र तक यह राशि 50 हजार और 751 से ज्यादा पर 75 हजार रुपए होगी।



हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी दोनों साथ चलाने वाले स्कूलों के लिए राशि ज्यादा है। 250 छात्र तक 40 हजार और 751 से ज्यादा छात्रों पर पूरे एक लाख रुपए जमा करने होंगे। आवेदन शुल्क भी छात्र संख्या पर तय है, जो 2,500 से 10 हजार रुपए तक जाता है।



अपील का अधिकार

अगर किसी स्कूल का आवेदन रद्द होता है या मान्यता खत्म होती है, तो अपील का रास्ता खुला रहेगा। स्कूल 30 दिन के भीतर आयुक्त, लोक शिक्षण के पास अपील कर सकता है।



आयुक्त के फैसले से संतुष्टि न मिले तो राज्य मान्यता समिति में दूसरी अपील की जा सकती है। हर अपील के साथ पांच हजार रुपए का शुल्क देना होगा। इस तरह स्कूलों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा।



गंभीर मामलों में राज्य मान्यता समिति की मंजूरी से मान्यता पूरी तरह भी खत्म हो सकती है। यानी बार-बार नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई तय है। अब देखना होगा कि सरकार एसोसिएशन की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।



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