MP में प्रोबेशनरी टीचर्स की पात्रता पर संकट: छिंदवाड़ा के बाद हर जिले में जांच
शॉर्ट में समझें पूरा मामला
- 3 साल नौकरी करने के बाद शिक्षकों के दस्तावेजों पर सवाल उठ रहे हैं।
- छिंदवाड़ा DEO ने 45 शिक्षकों के दस्तावेजों में कमियों की सूची जारी की।
- इंदौर, ग्वालियर और भोपाल संभाग में भी शिक्षक परिवीक्षा में खामियां पाई गईं।
- DPI ने जिला छानबीन समिति से नये सिरे से सभी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराया।
- कई जिलों से शिक्षकों की फाइलें नहीं भेजी गईं, DEO ने इस पर नाराजगी जताई है।
भोपाल. मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया फिर सवालों के घेरे में है। छिंदवाड़ा सहित प्रदेश के कई जिलों में नवनियुक्त शिक्षकों के डाक्यूमेंट्स पर संदेह खड़ा हो गया है। तीन साल तक जिन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर शिक्षकों ने नौकरी की, अब परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर स्थायीकरण के समय उन्हीं पर सवाल उठ रहे हैं।
छिंदवाड़ा DEO कार्यालय ने परिवीक्षा प्रतिवेदन में सामने आई गड़बड़ियों पर नाराजगी जताई है। इंदौर, ग्वालियर, भोपाल संभाग से भी वेरिफिकेशन में खामियां मिली हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने अंदेशा जताने के बाद जिला स्तर पर पड़ताल शुरू करा दी है।
छिंदवाड़ा से खुलना शुरू हुई परतें
जबलपुर संभाग के छिंदवाड़ा में DEO कार्यालय ने पत्र जारी किया है। उस पत्र में बताया गया कि 45 नवनियुक्त उच्च माध्यमिक शिक्षक और माध्यमिक शिक्षकों की परिवीक्षा फाइलों में कई कमियां हैं। इनमें से वेतन विवरण, विभागीय जांच प्रमाण पत्र, IFMS, सेवा पुस्तिका में तिथि, कार्यमुक्ति पत्र, BEO साइन जैसे डाक्यूमेंट गायब मिले। राजेश धारे का मार्च 2023 का वेतन दर्शाया गया जबकि सेवा 17 अप्रैल 2023 से शुरू हुई। हरदा से आए शिक्षकों का कार्यमुक्ति पत्र नहीं भेजा गया।
प्रदेशभर में गड़बड़ियां
यह स्थिति सिर्फ छिंदवाड़ा की नहीं है। इंदौर, ग्वालियर, भोपाल संभाग से भी परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर वेरिफिकेशन में खामियां सामने आई हैं। भर्ती और चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति के समय पेश किए गए डॉक्यूमेंट्स अब सवालों के घेरे में हैं। कई संकुलों से अभी तक फाइलें भेजी ही नहीं गई हैं, जिसे DEO ने अत्यंत खेदजनक बताया है।
विभाग ने दिए सख्त निर्देश
एमपी स्कूल शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए नवनियुक्त शिक्षकों के परिवीक्षा अवधि प्रकरणों में पाई गई कमियों की लंबी सूची जारी की है। DEO ने संबंधित शिक्षकों के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के परीक्षण और गलतियों के सुधार के निर्देश दिए हैं। DPI के निर्देशों के आधार पर इन डॉक्यूमेंट्स के पुनर्परीक्षण की जिम्मेदारी जिला छानबीन समिति को दी गई है। साथ ही जिला स्तरीय समिति को नए सिरे से वेरिफिकेशन के लिए आदेशित किया गया है।
वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल
- सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीन साल तक जिन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर शिक्षक नौकरी करते रहे, अब उन पर संदेह क्यों?
- क्या भर्ती के समय डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन ठीक से नहीं हुआ? या स्थायीकरण के समय जानबूझकर कमियां निकाली जा रही हैं?
विभाग के अधिकारियों ने अंदेशा जताया है कि प्रदेश में शिक्षक भर्ती के बड़े घपले की सुगबुगाहट है। इसी के चलते जिला स्तर पर ऐसे शिक्षकों की पड़ताल कराई जा रही है।
शिक्षक भर्ती वेरिफिकेशन विवाद के मुख्य फैक्ट्स
- छिंदवाड़ा में खुलासा: DEO कार्यालय ने 11/05/2026 को पत्र 250, 251 जारी कर 45 नवनियुक्त उमाशि-माध्यशि शिक्षकों की परिवीक्षा फाइलों में गंभीर कमियां बताईं।
- डेडलाइन बीती: लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश पर 27 अप्रैल और 05 मई 2026 तक दस्तावेज जमा करने थे, पर फाइलें अधूरी मिलीं।
- प्रमुख कमियां: वेतन विवरण (अप्रैल 2023/अप्रैल 2026), विभागीय जांच प्रमाण पत्र, IFMS, सेवा पुस्तिका में तिथि-कार्यमुक्ति दिनांक, BEO हस्ताक्षर गायब।
- फर्जी वेतन का मामला: राजेश धारे का मार्च 2023 का वेतन दर्शाया गया जबकि सेवा में आने की तिथि 17 अप्रैल 2023 है। अप्रैल 2023 का वेतन विवरण नहीं।
- हरदा कनेक्शन: अशोक कुमार परतेती और अखिलेश अहिरवार की फाइल में DEO हरदा का कार्यमुक्ति पत्र संलग्न नहीं है।
- CR में गड़बड़ी: सरोज बोबडे की 3 वर्षों की सीआर में BEO के हस्ताक्षर नहीं। मस्तराम जम्होरे की 2025-26 की सीआर का दूसरा पेज गायब।
- सरनेम का पेंच: मौसमी नीखरा का सरनेम परिवर्तन संबंधी शपथ पत्र फाइल में नहीं मिला।
- प्रदेशव्यापी समस्या: इंदौर, ग्वालियर, भोपाल संभाग से भी परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर सत्यापन में खामियां मिली हैं।
- DPI का एक्शन: स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला छानबीन समिति को नए सिरे से वेरिफिकेशन के आदेश दिए। DEO ने कहा- "लापरवाही स्वीकार नहीं होगी"।
- संकुल स्तर पर लापरवाही: कई संकुलों से अभी तक फाइलें भेजी ही नहीं गई हैं, जिसे DEO ने अत्यंत खेदजनक बताया।
- 3 साल का सवाल: भर्ती के समय जिन दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हुई, स्थायीकरण के समय उन्हीं पर संदेह जताया जा रहा है।
- प्रतिलिपि भेजी गई: DEO ने पत्र की कॉपी कलेक्टर छिंदवाड़ा/पांढुर्णा, CEO जिला पंचायत, संयुक्त संचालक जबलपुर को भेजी है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती में क्या घपला सामने आया है?
छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में नवनियुक्त शिक्षकों की 3 साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली है। भर्ती के समय जो दस्तावेज सही माने गए, स्थायीकरण के समय उन पर संदेह जताया जा रहा है। इंदौर, ग्वालियर, भोपाल संभाग में भी खामियां मिली हैं। DPI ने जिला छानबीन समिति से नए सिरे से वेरिफिकेशन के आदेश दिए हैं। - छिंदवाड़ा DEO ने किस तरह की कमियां उजागर की हैं?
DEO ने 45 शिक्षकों की फाइलों में कमियां बताई हैं। राजेश धारे का मार्च 2023 का वेतन दर्शाया गया जबकि सेवा 17अप्रैल 2023 से शुरू हुई। हरदा से आए शिक्षकों का कार्यमुक्ति पत्र नहीं है। कई शिक्षकों के IFMS, विभागीय जांच प्रमाण पत्र, BEO हस्ताक्षर, सेवा पुस्तिका में तिथि गायब है। DEO ने इसे 'अत्यंत खेदजनक' बताया है। - अब शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कौन करेगा?
DPI के निर्देशों के आधार पर इन दस्तावेजों के पुनर्परीक्षण की जिम्मेदारी जिला छानबीन समिति को दी गई है। DEO ने जिला स्तरीय समिति को नए सिरे से वेरिफिकेशन के लिए आदेशित किया है। संबंधित शिक्षकों को तत्काल संकुल प्राचार्य को वांछित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
ये खबरें भी पढ़ें....
इंदौर हाईकोर्ट में धार भोजशाला पर सुनवाई पूरी, अब फैसले का इंतजार
शर्म करो इंदौर प्रशासन, आपरेशन सिंदूर में लड़ने वाले आर्मी सूबेदार को 3 साल से घुमा रहा पटवारी
सीबीएसई के 12वीं रिजल्ट पर असमंजस, इंदौर सहित कई केंद्रों पर कॉपियां अभी भी जंच रही
ससुराल में पहली बार जींस पहनने पर सास ने टोका, इंदौर में बहू ने दी जान