प्रमोशन में आरक्षण मामला, 42 दिन बाद भी फैसला सुरक्षित, कर्मचारियों को 90 दिन से पहले फैसले की उम्मीद
News in Short
- 17 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी, 31 मार्च तक 42 दिन बीत चुके।
- सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिन की समयसीमा तय की, 18 मई को अवधि पूरी होगी
- समयसीमा अधिकतम है, इससे पहले भी निर्णय सुनाया जा सकता है।
- अप्रैल और मई में कुल मिलाकर लगभग 29 दिन ही खुलेंगे कोर्ट
- हजारों प्रमोशन पर असर होने के कारण जल्द निर्णय की उम्मीद।
Intro
मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में 17 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। 31 मार्च तक 42 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक निर्णय सामने नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 90 दिनों की समयसीमा को लेकर अब कर्मचारियों के बीच नई उम्मीद बनी है कि फैसला इस अवधि से पहले भी आ सकता है। प्रमोशन पर सीधा असर होने के कारण हजारों सरकारी कर्मचारी जल्द निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
News in Detail
42 दिन बाद भी सुरक्षित फैसला, इंतजार जारी
प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े इस अहम मामले में 17 फरवरी 2026 को विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। अब 31 मार्च तक 42 दिन बीत जाने के बाद भी निर्णय का इंतजार बना हुआ है। यह मामला हजारों शासकीय कर्मचारियों के भविष्य और पदोन्नति से जुड़ा हुआ है, इसलिए हर दिन उनके लिए महत्वपूर्ण बन गया है।
90 दिन की समयसीमा, लेकिन अनिवार्य इंतजार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने “हर्ड एंड रिजर्व” मामलों में 90 दिनों के भीतर निर्णय देने की समयसीमा तय की है। जिन मामलों का 90 दिनों में फैसला नहीं सुनाया जाता उन्हें चीफ जस्टिस के पास भेजने के निर्देश हैं। लेकिन इस मामले में चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ही सुनवाई कर रही है। इस मामले में यह 90 दिन की अवधि 18 मई 2026 को पूरी होगी। हालांकि यह स्पष्ट है कि यह 90 दिन की सीमा अधिकतम है, न कि अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि। यानी अदालत चाहे तो इस अवधि से पहले भी फैसला सुना सकती है।
सीमित कार्यदिवस के बीच बढ़ी उम्मीद
अप्रैल में लगभग 19 और मई में करीब 10 कार्यदिवस ही उपलब्ध हैं, जिसके बाद 16 मई से अदालतों के ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने की संभावना है। ऐसे में सीमित समय और बढ़ते कार्यभार के बीच कर्मचारी वर्ग को उम्मीद है कि इस महत्वपूर्ण मामले को प्राथमिकता देते हुए जल्द निर्णय सुनाया जाएगा।
प्रमोशन की आस में कर्मचारी, जल्द फैसले की अपेक्षा
इस मामले से जुड़े हजारों शासकीय कर्मचारी लंबे समय से प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन मामले की गंभीरता और उनके करियर पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए यह उम्मीद जरूर है कि फैसला यथाशीघ्र सामने आए।
नजरें फैसले पर, उम्मीद कायम
फिलहाल सभी की निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हैं। कर्मचारियों के बीच यह विश्वास है कि निर्धारित समयसीमा पर ही नहीं, बल्कि उससे पहले भी निर्णय आ सकता है। प्रमोशन की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों के लिए यह इंतजार महत्वपूर्ण है, और वे सकारात्मक निर्णय की उम्मीद के साथ हाईकोर्ट की ओर देख रहे हैं।
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