महानगरों को छोड़ ठंडा रहा एमपी का प्रापर्टी मार्केट, 13 हजार 920 करोड़ था टारगेट, मिले सिर्फ 11 हजार 854 करोड़
News In Short
- वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्व का लक्ष्य 13 हजार 920 करोड़ था, 22 मार्च तक सिर्फ 11 हजार 854.52 करोड़ ही जुटे।
- लक्ष्य से 2 हजार 065 करोड़ रुपए की कमी है, उपलब्धि महज 85.16 फीसदी रही।
- प्रदेश में रियल एस्टेट में मंदी का सीधा असर रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी कलेक्शन पर पड़ा है।
- उमरिया, श्योपुर, देवास और उज्जैन जैसे 6 जिलों में पिछले साल की तुलना में राजस्व घटा है।
- सिंगरौली, भोपाल और इंदौर ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन पूरे प्रदेश का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।
News In Detail
लक्ष्य बड़ा, हकीकत छोटी
मध्यप्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कलेक्टर गाइडलाइन (एमपी प्रॉपर्टी गाइडलाइन) राजस्व का लक्ष्य 13 हजार 920 करोड़ रुपए रखा था। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा था। लेकिन 22 मार्च 2026 तक सिर्फ 11 हजार 854.52 करोड़ रुपए ही जुटाए जा सके। यानी लक्ष्य से 2 हजार 065 करोड़ रुपए की कमी रह गई। जाहिर है, सरकार के तय टारगेट के मुताबिक प्रदेश में प्रापर्टी की खरीदी नहीं हो सकी है।
बता दें कि विभाग हर साल कलेक्टर गाइडलाइन के राजस्व लक्ष्य में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी करता है। इस साल यही आक्रामक लक्ष्य उसके लिए भारी पड़ता दिख रहा है। पिछले साल इसी अवधि तक 10 हजार 407 करोड़ रुपए जुटाए गए थे। इस बार 11 हजार 872 करोड़ जुट चुके हैं। यानी साल-दर-साल 14.08 फीसदी की वृद्धि तो हुई, लेकिन यह तय लक्ष्य से बहुत दूर है।
रियल एस्टेट में मंदी का असर
जानकारों का कहना है कि प्रदेश में रियल एस्टेट बाजार में मंदी का सीधा असर रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी कलेक्शन पर पड़ा है। घर और प्लॉट की बिक्री धीमी पड़ी है। बड़े शहरों में कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन खरीदार कम हैं। इससे रजिस्ट्री से मिलने वाला राजस्व प्रभावित हुआ है।
देवास जैसे औद्योगिक जिले का राजस्व 264 करोड़ से घटकर 229 करोड़ पर आ गया, यानी सीधे 13.32 फीसदी की गिरावट हुई है।
उज्जैन, जो धार्मिक पर्यटन का केंद्र है, वहां भी 9.69 फीसदी की कमी देखी गई है। जबकि आने वाले सिंहस्थ को देखते हुए उज्जैन में प्रापर्टी में बूम की बातें कही जा रही हैं।
देखिए राजस्व लक्ष्य में पिछड़े जिलों की सूची-
इंदौर-भोपाल की बादशाहत कायम
टॉप 5 जिलों की बात करें तो इंदौर 2413 करोड़ रुपए के साथ पहले स्थान पर है। भोपाल 1719 करोड़ के साथ दूसरे नंबर पर है और 16.69 फीसदी की अच्छी वृद्धि दर्ज की है। ग्वालियर तीसरे और जबलपुर चौथे स्थान पर है। जबलपुर ने 19.77 फीसदी की मजबूत वृद्धि दिखाई है। यह ट्रेंड बताता है कि भविष्य को देखते हुए लोग महानगरों में प्रापर्टी खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।
देखिए राजस्व लक्ष्य में आगे रहने वाले जिलों की सूची-
सिंगरौली का चमत्कार: 512% उछाल
इस पूरे डेटा में सबसे चौंकाने वाला नाम है सिंगरौली। इस कोयला खदान जिले का संचयी राजस्व 99.83 करोड़ से उछलकर 611.27 करोड़ पर पहुंच गया। यानी 512.30 फीसदी की अभूतपूर्व वृद्धि।
उमरिया: सबसे बड़ी चिंता
नकारात्मक प्रदर्शन में उमरिया सबसे आगे है। यहां का राजस्व 38.04 करोड़ से घटकर 23.15 करोड़ पर आ गया, यानी 39.14 फीसदी की भारी गिरावट। श्योपुर में 16.45 फीसदी और देवास में 13.32 फीसदी की कमी चिंताजनक है।
छोटे जिले, बड़ा हौसला
सबसे कम राजस्व वाले जिलों की बात करें तो डिंडोरी और आलीराजपुर जैसे आदिवासी क्षेत्र भले ही राजस्व में सबसे नीचे हैं, लेकिन इनकी वृद्धि दर 12 से 24 फीसदी तक है जो उत्साहजनक है। निवाड़ी, जो प्रदेश का सबसे नया जिला है, वह भी 25 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दिखा रहा है।
मार्च में 18 जिलों की नकारात्मक शुरुआत
एक से 22 मार्च 2026 के बीच 18 जिलों का राजस्व पिछले साल की इसी अवधि से कम रहा। सिंगरौली में 67 फीसदी, शहडोल में 30 फीसदी और मंदसौर में 25 फीसदी की तेज गिरावट दर्ज की गई। यह महीना विभाग के लिए वित्त वर्ष का आखिरी महीना है और इस कमी की भरपाई करना मुश्किल दिख रहा है।
स्रोत: राज्य कर विभाग, मध्यप्रदेश | डेटा: 22 मार्च 2026 तक | इनपुट: विभागीय रिपोर्ट
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