एमपी में PSU डॉक्टर्स को क्यों नहीं मिलेगा 30% कोटा? हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
उन्हें केवल नियोक्ता के आधार पर इन-सर्विस कोटे के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। वे राज्य सरकार के बजाय केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) में कार्यरत हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने की। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी की।
पन्ना के दूरस्थ इलाके में NMDC अस्पताल में दे रहे सेवाएं
याचिकाकर्ता डॉ. अभिषेक अग्निहोत्री जबलपुर के निवासी हैं। वे NMDC लिमिटेड के डायमंड माइनिंग प्रोजेक्ट अस्पताल में कार्यरत हैं। यह अस्पताल पन्ना जिले के मझगवां में स्थित है। यहां वे जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (GDMO) के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। याचिका के मुताबिक, उन्होंने 17 दिसंबर 2021 को अस्पताल में कार्यभार ग्रहण किया था। वे चार साल से अधिक समय से इस क्षेत्र में चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। यह अस्पताल ग्रामीण और दूरस्थ इलाके में स्थित है। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व के मुख्य बाघ अभयारण्य के नजदीक है। इसके बावजूद उन्हें इन-सर्विस कोटे का लाभ नहीं मिल रहा है।
क्या है इन-सर्विस कोटा और कहां फंसा है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश में NEET-PG प्रवेश प्रक्रिया के तहत 30 प्रतिशत इन-सर्विस कोटा निर्धारित है। इसका लाभ पात्र सेवारत चिकित्सा अधिकारियों को दिया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को प्रोत्साहित करना है। लेकिन मौजूदा नियमों में केवल मध्य प्रदेश शासन के अधीन कार्यरत चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। यानी कोई डॉक्टर प्रदेश के ग्रामीण या दुर्गम इलाके में सेवाएं दे रहा हो। लेकिन उसका नियोक्ता राज्य सरकार के बजाय केंद्रीय PSU हो, तो वह लाभ से वंचित रहेगा। डॉ. अभिषेक अग्निहोत्री ने इसी अंतर को चुनौती दी है।
MBBS के बाद NMDC में नौकरी
याचिका में डॉ. अभिषेक की शैक्षणिक और सेवा संबंधी जानकारी भी दी गई है। उन्होंने दिसंबर 2015 में शासकीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से MBBS किया था। यह कॉलेज जबलपुर में स्थित है। इसके बाद उन्होंने 30 जनवरी 2016 से 29 जनवरी 2017 तक अनिवार्य रोटरी रेजिडेंट इंटर्नशिप पूरी की। उन्हें 15 मार्च 2017 को मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल से स्थायी पंजीकरण मिला। NMDC ने 6 दिसंबर 2021 को उन्हें GDMO के पद पर नियुक्त किया था। NEET-PG 2026 में उन्हें 720 में से 345 अंक मिले हैं। उनकी ऑल इंडिया रैंक 81 हजार 69 है।
आदित्य सांघी ने इन नियमों का दिया उदाहरण
वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने कोर्ट में इन-सर्विस कोटे के उद्देश्य को लेकर दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवारत डॉक्टरों को प्रोत्साहित करना है। ऐसे में केवल नियोक्ता के आधार पर डॉक्टरों के बीच अंतर करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता NMDC जैसे केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम के अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। यह अस्पताल मध्य प्रदेश में ही स्थित है।
इसी प्रदेश में राज्य सरकार के डॉक्टरों को इन-सर्विस कोटे का लाभ मिलता है। सांघी ने ओडिशा और PGI चंडीगढ़ के नियमों के उदाहरण भी पेश किए। उनके मुताबिक, वहां केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत डॉक्टरों को इन-सर्विस श्रेणी में शामिल किया गया है। ये डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देते हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भी सेवा की प्रकृति को आधार बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही सेवा की अवधि और कार्यस्थल को भी महत्व मिलना चाहिए।
काउंसलिंग में शामिल करने की मांग
याचिका में मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम, 2018 की एक परिभाषा को चुनौती दी गई है। यह परिभाषा सेवारत अभ्यर्थियों की पात्रता से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने केंद्रीय PSU में कार्यरत डॉक्टरों को इन-सर्विस कोटे से बाहर रखने पर आपत्ति जताई है। ये डॉक्टर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने ऐसी व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।
वैकल्पिक रूप से नियमों की ऐसी व्याख्या करने का अनुरोध किया गया है। इसमें डॉक्टर की सेवा की प्रकृति, अवधि और कार्यस्थल को भी महत्व दिया जाए। इसके अलावा NEET-PG 2026 की शेष काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति मांगी गई है। याचिकाकर्ता ने इन-सर्विस श्रेणी में अनंतिम पंजीकरण की अनुमति देने का भी अनुरोध किया है।
हाई कोर्ट ने जारी किए नोटिस, 25 नवंबर तक मांगा जवाब
चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने नोटिस जारी किए। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन को जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के रजिस्ट्रार से भी जवाब मांगा गया है।
प्रतिवादियों को 25 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करना होगा। अब सरकार और NBEMS के जवाब से इन-सर्विस कोटे की पात्रता पर उनका पक्ष स्पष्ट होगा। इस याचिका पर आने वाला फैसला अन्य डॉक्टरों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर मध्य प्रदेश में केंद्रीय PSU के अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों पर इसका असर पड़ सकता है।