एमपी में 253 पुल जर्जर, डेडलाइन बीतने के बाद भी PWD की जांच अधूरी

Aman Vaishnav | Jun 29, 2026, 09:20 IST
मध्यप्रदेश में जर्जर पुल
मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रदेश के 253 पुलों को जर्जर घोषित किया जा चुका है। इसमें से 46 बेहद खतरनाक हैं। नियमों के बावजूद अभी तक पुलों का सुरक्षा ऑडिट पूरा नहीं हो पाया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में 253 पुल जर्जर घोषित हो चुके हैं।
  • इन पुलों में से 46 पुल ऐसे हैं जो बेहद खतरनाक श्रेणी में आते हैं।
  • पुल-पुलियों का भौतिक निरीक्षण अभी तक अधूरा है।
  • इस सूची में 3 से 5 साल पहले बने नए पुल और फ्लाईओवर भी शामिल हैं।
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अधर में लटका पुल-पुलियों का सुरक्षा ऑडिट

मध्य प्रदेश में सड़कों पर सफर करना लोगों के लिए डर का सबब बनता जा रहा है। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभागसुरक्षित सफर को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है।



प्रदेश में कई ऐसे मार्ग हैं जहां पुल बेहद खराब हालत में हैं। आंकड़ों की बात करें तो राज्य में कुल 253 पुलों को जर्जर घोषित किया जा चुका है।



स्थिति कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, इनमें से 46 पुलों को बेहद खतरनाक कैटेगरी में रखा गया है।



सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने भी इस मामले में कड़े नियम तय किए हैं। कमेटी ने साफ कहा है कि हर साल पुल और पुलिया का सर्वे होना जरूरी है। वहीं जमीनी हकीकत यह है कि इन सख्त आदेशों के बाद भी विभाग की नींद नहीं खुली है।



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15 जून तक पूरा होना था काम

इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) और एमपी पीडब्ल्यूडी के क्वालिटी कंट्रोल मैनुअल के नियम साफ हैं। इन नियमों के मुताबिक हर साल 15 जून तक राज्य के सभी पुल-पुलियों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से पूरा हो जाना चाहिए।



पुलों की जांच के लिए जिम्मेदारी भी तय की गई है।



  • छोटे पुल और पुलिया के निरीक्षण की जिम्मेदारी सब-इंजीनियरऔर अनुविभागीय अधिकारी यानी एसडीओ की होती है।
  • वहीं बड़े पुलों की मुख्य जांच एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के स्तर पर की जाती है।

इस वार्षिक निरीक्षण के दौरान पुलों के फाउंडेशन, बियरिंग्स, एक्सपेंशन जॉइंट्स और जलमार्ग की गाद-सफाई की बारीकी से जांच करनी होती है।



नियम यह भी है कि जांच की रिपोर्ट को जियो-टैग्ड तस्वीरों के साथ सीधे ब्रिज रजिस्टर और विभागीय सॉफ्टवेयर पर अपलोड करना जरूरी है।



इस पूरे मामले पर पीडब्ल्यूडी के ईएनसी (EnC) आरएएल वर्मा का कहना है कि, यह काम सर्कल स्तर पर देखा जाता है। इसकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है।



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मध्य प्रदेश में जर्जर और संवेदनशील पुलों की स्थिति

विवरणआंकड़े / जानकारी
कुल जर्जर पुल 253
बेहद खतरनाक पुल 46
विशेष मजबूतीकरण के लिए बजट11.41 करोड़ रुपए (मार्च 2026 में स्वीकृत)
बजट के तहत कवर होने वाले पुलों की संख्या50 संवेदनशील पुल
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकाग्वालियर संभाग (22 पुल)

नए पुल भी खराब

हैरानी की बात यह है कि इस संवेदनशील सूची में सिर्फ 50 साल या उससे ज्यादा पुराने पुल ही शामिल नहीं हैं। विभाग के काम की क्वालिटी पर बड़ा सवाल तब उठता है जब महज 3 से 5 साल पहले बने नए पुल भी इस लिस्ट में नजर आते हैं।



  • छतरपुर जिला: यहां वर्ष 2024 में धसान नदी पर बना उच्चस्तरीय पुल भी खराब स्थिति में है।
  • रीवा शहर: साल 2021 में बनकर तैयार हुआ रीवा शहर का फ्लाईओवर भी जर्जर श्रेणी में आ चुका है।

बता दें कि कि मार्च 2026 में प्रदेश के ऐसे ही 50 संवेदनशील पुलों को दोबारा मजबूत करने के लिए 11 करोड़ 41 लाख रुपए की राशि मंजूर की गई थी। इस लिस्ट में सबसे ज्यादा 22 पुल अकेले ग्वालियर संभाग के शामिल थे।



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