इंदौर में कैसे रुकेंगे मंत्री और वीवीआईपी, PWD के एक आदेश ने बदली व्यवस्था
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- पीडब्ल्यूडी ने विश्राम गृह आवंटन को लेकर नया आदेश जारी किया है।
- कलेक्टर अब केवल सर्किट हाउस के कमरे ही आवंटित कर सकेंगे।
- बाकी कमरे पीडब्ल्यूडी इंजीनियर के अधीन कर दिए गए हैं।
- इससे वीवीआईपी प्रोटोकॉल व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
- इंदौर में कलेक्टर के पास अब केवल चार कमरे ही बचेंगे।
मध्यप्रदेश शासन में हर जिले में कलेक्टर के पास प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी होती है। वह प्रोटोकॉल का दायित्व संभालता है। इसके तहत मंत्री से लेकर सभी वीवीआईपी और उनके साथ आए सदस्यों के रुकने, सुरक्षा और अन्य इंतजाम किए जाते हैं। वहीं, अब इसमें बदलाव हो गया है। इसकी वजह पीडब्ल्यूडी विभाग का एक आदेश बना है।
पीडब्ल्यूडी ने यह जारी किया आदेश
पीडब्ल्यूडी विभाग के उप सचिव एआर सिंह ने हाल ही में एक पत्र जारी किया है। यह सभी कलेक्टरों के पास पहुंचा है। इसमें पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले भवन और विश्राम भवन के कक्ष कौन आरक्षित कर सकता है, यानी आवंटित करेगा, इसकी सूची तय कर दी गई है।
इसके तहत जिला कलेक्टर को केवल उनके सर्किट हाउस तक सीमित कर दिया गया है। बाकी भवनों के कक्षों का आरक्षण संबंधित जिले के कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी के अधीन किया गया है।
इसी तरह राजधानी भोपाल में भी सर्किट हाउस राज्य प्रोटोकॉल अधिकारी को दिया गया है। साथ ही, राजधानी के अन्य भवनों का अधिकार चीफ इंजीनियर (कार्यालय प्रमुख) पीडब्ल्यूडी को दिया गया है।
इस आदेश का क्या असर है
मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा रेस्ट हाउस पीडब्ल्यूडी के पास हैं। ये अभी तक कलेक्टर के अधीन होते थे और वह प्रोटोकॉल के हिसाब से इन कक्षों का आवंटन वीवीआईपी को करते थे। वहीं, अब उनके पास केवल सर्किट हाउस के कक्ष ही रह जाएंगे, जो न के बराबर होते हैं।
वहीं इंदौर जैसे शहरों में इनमें मुख्य तौर पर सीएम के लिए कमरे आरक्षित रहते हैं। इसी तरह राज्यपाल और अन्य संवैधानिक उच्च पद वालों के लिए भी कमरे सुरक्षित रहते हैं।
इंदौर कलेक्टर के पास केवल 4 कमरे
यदि इंदौर की बात करें तो रेसीडेंसी भवन में 24 कमरे हैं। वहीं, इसमें से कलेक्टर के पास सर्किट भवन के रूप में केवल चार ही कमरे हैं। बाकी रेसीडेंसी भवन, विश्राम गृह आदि के 20 कमरे अब नए आदेश के बाद पीडब्ल्यूडी इंजीनियर के अधीन होंगे। यानी प्रशासन को इन्हें किसी वीवीआईपी को आवंटित करने से पहले पीडब्ल्यूडी से बात करनी होगी।
प्रोटोकॉल संभालने में आएगी समस्या
इस संबंध में सभी जिला कलेक्टर चिंता में हैं। चर्चा यह भी है कि जब वीवीआईपी की सुरक्षा, ठहरने, भोजन और सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी प्रोटोकॉल अधिकारी यानी कलेक्टर की होती है, तो फिर वह यह सब कैसे मैनेज करेंगे?
क्यों किया गया यह आदेश?
बताया जा रहा है कि इस आदेश के पीछे बड़ी वजह यह है कि कलेक्टर के पास ये कक्ष होने से अधिकांश समय पीडब्ल्यूडी अपने अधिकारियों को ये कमरे नहीं दे पाता था। वहीं कलेक्टर के पास भी अतिरिक्त बोझ होता है। ऐसे में यह विकेंद्रित (विभाजित) व्यवस्था की बात कही गई, जिससे छोटी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी इंजीनियर स्तर पर विभाग मैनेज करे।
इसके बाद यह नया आदेश जारी कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि प्रोटोकॉल हमेशा से प्रशासन का अभिन्न हिस्सा रहा है। वहीं, वीवीआईपी इसके लिए सीधे कलेक्टर से संपर्क में रहते हैं। उन्हें ही मैसेज, फैक्स करके कक्ष और अन्य व्यवस्थाएं करवाई जाती हैं।
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