8 साल की मासूम बनी दुल्हन, 9 साल का दूल्हा लाया बारात, माता-पिता से पंडित, हलवाई तक सब नपे

Aman Vaishnav | Apr 16, 2026, 13:25 IST
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राजगढ़ के कुशलपुरा गांव में प्रशासन को गुमराह कर आठ साल की बच्ची का विवाह कर दिया गया। पुलिस ने संबंधित लोगों पर केस दर्ज कर लिया है। हैरानी की बात है कि जब टीम मौके पर पहुंची तो एक और बाल विवाह का मामला सामने आया।

राजगढ़ जिले के एक गांव से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 8 साल की बच्ची का विवाह 9 साल के लड़के से कर दिया गया है। यह घटना मंगलवार 14 अप्रैल को हुई।



हैरानी की बात है कि प्रशासनिक टीम एक दिन पहले ही गांव में बाल विवाह रोकने के लिए जांच करने आई थी। इसके बावजूद यह विवाह नहीं रुक पाया।



घटना का खुलासा बुधवार 15 अप्रैल को हल्दी, मेहंदी और बारात के वीडियो वायरल होने से हुआ। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच के लिए टीम भेजी।



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इन सभी को बनाया आरोपी

पुलिस ने इस मामले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने बच्ची के माता-पिता के अलावा टेंट संचालक, घोड़ी वाले, प्रिंटिंग प्रेस वाले, हलवाई और पंडित को भी आरोपी बना दिया है।



प्रशासनिक टीम को किया गुमराह

जानकारी के अनुसार प्रशासन को पहले ही बाल विवाह की खबर मिल गई थी। शादी के एक दिन पहले एक टीम गांव में भी पहुंची थी, लेकिन गांववालों ने दूसरे दूल्हे के बारे में गलत जानकारी देकर टीम को गुमराह कर दिया था।



इसके अगले ही दिन शादी हो गई। इससे प्रशासनिक निगरानी में लापरवाही सामने आई है।



एक और बाल-विवाह का मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी दौरान करनवास थाना क्षेत्र से भी एक और बाल विवाह का मामला सामने आया है। यहां एक 9 साल की बच्ची की सगाई कर उसकी शादी 26 अप्रैल को तय कर दी गई थी।



यह फैसला परिजनों की जानकारी के बिना रिश्तेदारों ने लिया था। इस मामले में झगड़े के नाम पर नौ लाख रुपए की मांग भी की गई। बच्ची के परिजनों ने इस बारे में पुलिस और महिला बाल विकास विभाग से शिकायत की है।



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चोरी-छुपे होने वाली घटनाएं बनी बड़ी चुनौती

महिला बाल विकास अधिकारी श्यामबाबू खरे ने बताया कि, मामले की जांच के लिए टीम भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं, लेकिन चोरी-छुपे होने वाली ऐसी घटनाएं एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।



भोजपुर थाना प्रभारी अजय यादव ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



एमपी में बाल विवाह के आंकड़े

एमपी में बाल विवाह के आंकड़े (मप्र में बाल विवाह) बहुत चिंताजनक हैं। प्रदेश में पिछले पांच सालों में बाल विवाह के मामले घटने के बजाय दोगुने हो गए हैं।



सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2020 में 366 मामले दर्ज हुए थे। साल 2025 तक यह संख्या बढ़कर 538 तक पहुंच गई है। इसका सीधा मतलब है कि एमपी में हर दिन औसतन दो मासूमों का बचपन छीना जा रहा है।



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संविधान और कानून क्या कहता है

भारत में बाल विवाह एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत सख्त सजा का प्रावधान है। लड़कियों के लिए शादी की उम्र 18 और लड़कों के लिए 21 साल है।



अगर कोई इस कानून को तोड़ता है, तो उसे जेल हो सकती है। बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता और पंडित को भी सजा मिलेगी। दोषी को दो साल की जेल औरएक लाख तक जुर्माना हो सकता है। ये कानून बच्चों के फिजिकल और मेन्टल हेल्थ की रक्षा करता है।



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बाल विवाह की शिकायत कहां करें

यदि आपको कहीं भी बाल विवाह होने की जानकारी मिलती है, तो तुरंत मदद लें। आप 181, 1098 (Childline) या 112 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा, Child Marriage Free India पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।



शिक्षा ही बाल विवाह (child marriage prohibition act) को रोकने का सबसे मजबूत हथियार है। लड़कियों को शिक्षित करने से वे अपने हक (child marriage law) के लिए लड़ सकेंगी। समाज को मिलकर इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करना होगा।



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