राज्यसभा उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी को चुनौती देने चुनावी मैदान में उतरे बैतूल के अतिथि शिक्षक, पहले 10 विधायकों के हस्ताक्षर की तलाश
नामांकन के लिए उन्हें कम से कम 10 विधायकों का समर्थन चाहिए। इसी समर्थन की तलाश में वे भोपाल में घूम रहे हैं। वे भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं से मिल रहे हैं।
राज्यसभा की इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को चुनाव होगा। भाजपा ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है।
वहीं, हरिपाल बिहारे भी चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। वे निर्दलीय उम्मीदवार बनने के लिए नामांकन फॉर्म ले चुके हैं।
अब सवाल है कि क्या उन्हें 10 विधायकों का समर्थन मिलेगा? या फिर नामांकन से पहले ही उनकी चुनावी चुनौती खत्म हो जाएगी?
कौन हैं हरिपाल बिहारे?
हरिपाल बिहारे मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के रहने वाले हैं। उनकी उम्र 55 साल है और वे अतिथि शिक्षक हैं।
अब उन्होंने राज्यसभा उपचुनाव लड़ने की ठान ली है। इसके लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन फॉर्म भी लिया है।
खास बात यह है कि उनका मुकाबला केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से होगा। पुरी के खिलाफ नामांकन फॉर्म लेने वाले वे अकेले व्यक्ति हैं।
हालांकि, चुनाव मैदान में उतरना उनके लिए आसान नहीं है। अभी उन्हें नामांकन के लिए 10 विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने हैं।
बिहारे का कहना है कि राजनीति सिर्फ बड़े नेताओं के लिए नहीं है। वे आम आदमी की भागीदारी का संदेश देना चाहते हैं।
10 विधायकों के हस्ताक्षर क्यों जरूरी?
हरिपाल बिहारे राज्यसभा उपचुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन उनकी राह आसान नहीं है। निर्दलीय उम्मीदवार बनने के लिए 10 विधायकों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। बिना इन हस्ताक्षरों के वे नामांकन भी नहीं भर पाएंगे।
इसलिए बिहारे दो दिनों से भोपाल में नेताओं से मिल रहे हैं। हाथ में फाइल लेकर वे अलग-अलग विधायकों के पास पहुंच रहे हैं। उनकी कोशिश है कि किसी तरह 10 विधायक समर्थन दे दें। लेकिन अभी तक जरूरी हस्ताक्षर जुटाने की बात सामने नहीं आई है।
Rajya Sabha Election 2026 में बिहारे के सामने फिलहाल यही चुनौती है। चुनाव जीतना तो दूर, पहले उम्मीदवार बनने की शर्त पूरी करनी होगी।
समर्थन जुटाने के लिए भाजपा और कांग्रेस नेताओं से मुलाकात
हरिपाल बिहारे राज्यसभा उपचुनाव लड़ने के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। वे भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के विधायकों से मिल रहे हैं। उनकी कोशिश है कि विधायक दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मदद करें।
बिहारे चाहते हैं कि 10 विधायक उनके नामांकन पर हस्ताक्षर करें। इससे उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा।
बिहारे को भाजपा के कुछ नेताओं से भी समर्थन की उम्मीद है। इनमें वे नेता भी हैं, जो राज्यसभा टिकट की दौड़ में थे। उन्हें उम्मीद है कि ये नेता उनकी बात समझेंगे।
पहले भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं बिहारे
हरिपाल बिहारे पहली बार चुनावी मैदान में उतरने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। इससे पहले वे साल 2023 में मध्य प्रदेश विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। उन्होंने बैतूल जिले की आमला विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।
उस चुनाव में उन्हें एक हजार से कुछ अधिक वोट मिले थे। हालांकि, वे चुनाव जीत नहीं पाए थे। अब उन्होंने राज्यसभा उपचुनाव लड़ने की तैयारी की है। लेकिन विधानसभा चुनाव और राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया अलग होती है।
विधानसभा चुनाव में आम मतदाता अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं। वहीं, राज्यसभा उपचुनाव में निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। इसलिए इस बार बिहारे को आम मतदाताओं के बजाय विधायकों के समर्थन की जरूरत है।
विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं बिहारे
हरिपाल बिहारे के लिए चुनावी मैदान नया नहीं है। वे पहले भी चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। साल 2023 में उन्होंने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ा था। बैतूल की आमला सीट से वे निर्दलीय उम्मीदवार बने थे।
उस चुनाव में उन्हें एक हजार से ज्यादा वोट मिले थे। हालांकि, वे जीत हासिल नहीं कर पाए थे। अब बिहारे की नजर राज्यसभा उपचुनाव पर है। लेकिन इस बार चुनाव की चुनौती बिल्कुल अलग है।
विधानसभा चुनाव में आम जनता वोट देकर विधायक चुनती है। वहीं, राज्यसभा उपचुनाव में सिर्फ निर्वाचित विधायक वोट डालते हैं।
इसलिए बिहारे को अब जनता नहीं, विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। यही उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट
मध्यप्रदेश की यह राज्यसभा सीट एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई है। केंद्रीय मंत्री मुरुगन ने 13 अक्टूबर 2026 को इस्तीफा दिया था। वे अप्रैल 2024 में मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक चलना था। लेकिन उन्होंने समय से पहले ही राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी।
इसके बाद इस सीट पर उपचुनाव की नौबत आ गई। अब भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर दांव लगाया है। पुरी फिलहाल केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हैं।
राज्यसभा उपचुनाव कब होगा?
मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की तारीख तय हो गई है। चुनाव आयोग ने पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 2 नवंबर 2026 है। इसके बाद 12 नवंबर को वोटिंग होगी। वोटों की गिनती भी उसी दिन होगी।
अब हरिपाल बिहारे के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है। उन्हें 2 नवंबर तक जरूरी विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने होंगे। इसके बाद ही वे अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। अगर हस्ताक्षर नहीं मिले, तो उनकी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। ऐसे में चुनाव लड़ने का सपना नामांकन से पहले टूट सकता है।
FAQ
- मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट पर मतदान कब होगा?
मतदान 12 नवंबर 2026 को होगा। मतों की गिनती भी उसी दिन होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 2 नवंबर है। - निर्दलीय उम्मीदवार हरिपाल बिहारे को नामांकन के लिए क्या चाहिए?
हरिपाल बिहारे को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकित होने के लिए कम से कम 10 विधायकों का समर्थन प्राप्त करना होगा। उन्हें इन विधायकों के हस्ताक्षर की जरूरत है। - यह राज्यसभा सीट क्यों खाली हुई?
यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के 13 अक्टूबर 2026 को इस्तीफे के कारण खाली हुई है। वे अप्रैल 2024 में चुने गए थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक होना था।