मीनाक्षी की उम्मीदवारी पर फैसला अटका, इधर... BJP के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीते
मध्य प्रदेश की 3 सीटों से BJP के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। रिटर्निंग ऑफिसर ने तीनों उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट दिए। इसके बाद तरुण चुघ, महेश केवट, रजनीश अग्रवाल राज्यसभा के लिए चुन लिए गए हैं।
वहीं कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन रद्द होने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। कल, 12 जून को मामले में सुनवाई होगी।
आज का दिन बेहद अहम
बता दें कि आज 11 जून (दोपहर 3 बजे तक) को नाम वापसी का आखिरी दिन था। चुनाव आयोग से मीनाक्षी नटराजन को राहत नहीं मिली है। इसके चलते मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो गए हैं।
मीनाक्षी का पर्चा खारिज होने की पूरी कहानी
9 जून को मध्य प्रदेश विधानसभा में एक अहम सियासी घटनाक्रम हुआ था। राज्यसभा चुनाव के नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) दोपहर 2 बजे रिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer) के कमरे में शुरू हुई थी। बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों के कागजात पहले जांचे गए थे। सभी दस्तावेज सही पाए गए और किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
वहीं जैसे ही कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की जांच शुरू हुई, बीजेपी ने लिखित आपत्ति दर्ज करा दी। आरोप था कि उन्होंने शपथ पत्र में तेलंगाना की एक अदालत में दर्ज निजी परिवाद (शिकायत) का जिक्र नहीं किया।
आपत्ति दर्ज होते ही कमरे में हलचल मच गई। मीनाक्षी नटराजन बाहर निकलीं और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को फोन कर विधानसभा बुलाया। थोड़ी देर में कांग्रेस के बड़े नेता वहां पहुंच गए।
दो दौर में हुई लंबी बहस
दोनों पक्षों के बीच पहले दौर में करीब आधे घंटे तक बहस हुई। रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि वे अगले दिन फैसला सुनाएंगे। लेकिन बीजेपी नेताओं ने उसी दिन फैसले की मांग कर दी।
शाम 5:30 बजे दोनों पक्षों को दोबारा बुलाया गया। फिर से करीब आधे घंटे दलीलें सुनी गईं। शाम 6:30 बजे रिटर्निंग ऑफिसर ने अपना आदेश सुना दिया। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया।
RO ने किस आधार पर रद्द किया पर्चा?
रिटर्निंग ऑफिसर ने अपने आदेश में तीन बड़ी बातें कहीं-
पहली यह कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना की एक अदालत में निजी परिवाद दर्ज था। कोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को उन्हें समन (Summon) जारी कर पेश होने का आदेश दिया था।
दूसरी बात यह कि यह मामला लंबित और सक्रिय माना गया।
तीसरी यह कि मीनाक्षी ने समन के जवाब में अपना पक्ष रखा था, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी।
इन तीनों आधारों पर रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि फॉर्म 26 (Form 26) यानी एफिडेविट अधूरा भरा गया। अहम जानकारी छिपाई गई। इसलिए हैंडबुक के अध्याय 6, पॉइंट 10(xiii) के तहत नामांकन रद्द करना जरूरी है।
नामांकन से लेकर परिणाम तक का शेड्यूल
| चुनाव कार्यक्रम | तारीख |
| अधिसूचना जारी होने की तारीख | 01 जून 2026 |
| नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि | 08 जून 2026 |
| नामांकन पत्रों की जांच | 09 जून 2026 |
| नाम वापसी की अंतिम तिथि | 11 जून 2026 |
| मतदान की तारीख | 18 जून 2026 (सुबह 9 से शाम 4 तक) |
| मतगणना और परिणाम | 18 जून 2026 (शाम 5:00 बजे से) |
कौन हैं तरुण चुघ?
तरुण चुघ फिलहाल भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। उनका जन्म 3 मई 1973 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उन्होंने एचआर (HR - Human Resources) विषय में एमबीए (MBA - Master of Business Administration) की पढ़ाई की है।
बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे और 1994 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के जरिए सक्रिय राजनीति में आए।
भारतीय जनता युवा मोर्चा में जिला अध्यक्ष, महासचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रहे। पंजाब भाजपा में कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और तेलंगाना के भाजपा प्रभारी भी रह चुके हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में भी उनकी अहम भूमिका रही।
कौन हैं रजनीश अग्रवाल?
रजनीश अग्रवाल भाजपा मध्य प्रदेश के प्रदेश मंत्री और बूथ प्रबंधन प्रभारी हैं। उनका जन्म 2 अप्रैल 1976 को हुआ। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक विज्ञान में स्नातक और प्रसारण पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। बचपन से आरएसएस से जुड़े रहे और 1990 में एबीवीपी के जरिए सक्रिय राजनीति में आए।
एबीवीपी में नगर संयोजक, विश्वविद्यालय प्रमुख, जिला दायित्व और प्रदेश कार्यालय मंत्री जैसी जिम्मेदारियां संभालीं। 2005 से भाजपा में सक्रिय संगठनात्मक भूमिका निभा रहे हैं। 2021 से भाजपा प्रदेश मंत्री और बूथ प्रबंधन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में बूथ प्रबंधन में उनकी भूमिका को खासतौर पर अहम माना गया था।
कौन हैं महेश केवट?
तीन दशकों का लंबा जमीनी राजनीतिक सफर
महेश केवट का जन्म 28 अगस्त 1973 को निवाड़ी जिले के ओरछा धाम में हुआ था। बीएससी (मैथ) की पढ़ाई करने वाले महेश केवट ने अपना सामाजिक और राजनीतिक सफर बहुत जल्दी शुरू कर दिया था।
1984 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में मुख्य शिक्षक के तौर पर काम करना शुरू किया और 1992 तक सेवा दी थी। इसके बीच 1990 से 1992 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ब्लॉक संयोजक और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की निवाड़ी प्रखंड कार्यकारिणी में सचिव भी रहे। साल 1995 में महेश केवट ने भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा था।
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