एमपी राज्यसभा चुनाव: दिल्ली में महामंथन, कांग्रेस कैंडिडेट का ऐलान अगले दो दिन में
पांच पाइंट में समझें पूरा मामला
- राज्यसभा सीट पर सस्पेंस: मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस में मंथन तेज हो गया है।
- दिग्विजय सिंह का इनकार: मौजूदा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस बार चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया है।
- पांच बड़े दावेदार: रेस में अरुण यादव और मीनाक्षी नटराजन सहित पांच कद्दावर नेता शामिल हैं।
- कोरे फॉर्म पर दस्तखत: भोपाल में कांग्रेस विधायकों से कोरे नामांकन फॉर्म पर साइन करवा लिए गए हैं।
- जल्द होगा ऐलान: दिल्ली दरबार से अगले दो दिनों के भीतर उम्मीदवार के नाम की घोषणा हो जाएगी।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों पर सियासी पारा चढ़ गया है। चुनाव आयोग ने नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून तय की है। राज्य में कुल तीन सीटों पर इस बार राज्यसभा चुनाव होने जा रहे हैं। वर्तमान समीकरणों के हिसाब से इनमें से दो सीटें भाजपा के खाते में हैं। वहीं एक सीट पर लंबे समय से कांग्रेस पार्टी का कब्जा बना हुआ है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी सांसद हैं।
कांग्रेस की इस इकलौती सीट पर फिलहाल दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह का कब्जा है। दिग्विजय सिंह ने इस बार दोबारा चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है। उनके इनकार के बाद से ही नए चेहरे की तलाश तेज हो गई है। दिल्ली के हाईकमान दरबार में उम्मीदवारों के नामों पर लगातार मंथन चल रहा है। आज गुरुवार को भी दिल्ली में कई अहम दौर की बैठकें आयोजित हुईं। सूत्रों का दावा है कि अगले दो दिनों में नाम फाइनल हो जाएगा।
विधायकों से कोरे फॉर्म पर कराए दस्तखत
टिकट की रेस में शामिल सभी बड़े दावेदारों ने दिल्ली में डेरा डाला है। वे केंद्रीय नेताओं के सामने अपनी मजबूत दावेदारी पेश करने में जुटे हैं। इधर भोपाल में भी पार्टी ने अपनी अंदरूनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। कांग्रेस के सभी विधायकों से कोरे नामांकन फॉर्म पर साइन कराए गए हैं। विधायकों से बतौर प्रस्तावक पहले ही एडवांस में दस्तखत करवा लिए गए हैं। शनिवार को भोपाल में कांग्रेस विधायक दल की एक बड़ी बैठक बुलाई गई है।
यह महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को शाम पांच बजे प्रदेश मुख्यालय में आयोजित होगी। बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और अध्यक्ष जीतू पटवारी मौजूद रहेंगे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी विधायकों के साथ रणनीति पर चर्चा करेंगे। मुख्य सचेतक सोहन बाल्मीकि भी इस बैठक में मुख्य रूप से शामिल होंगे। इस बैठक में राज्यसभा चुनाव की वोटिंग को लेकर अंतिम रणनीति बनेगी। सभी विधायकों को एकजुट रखने के लिए व्हिप पर भी बात होगी।
कांग्रेस के इन पांच बड़े चेहरों के बीच फंसा है पेंच
अब बात करते हैं उन बड़े नामों की जो इस रेस में शामिल हैं।
1. अरुण यादव (ओबीसी का बड़ा चेहरा)
अरुण यादव कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके हैं। वे मध्य प्रदेश की राजनीति में यादव समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। पिछड़े वर्ग की राजनीति के लिहाज से उनका दावा काफी मजबूत माना जा रहा है। वे पिछले एक हफ्ते से दिल्ली में रहकर लॉबिंग कर रहे हैं।
2. मीनाक्षी नटराजन (राहुल गांधी की करीबी नेता)
मीनाक्षी नटराजन मंदसौर लोकसभा सीट से पहले सांसद रह चुकी हैं। वर्तमान समय में वे तेलंगाना राज्य की कांग्रेस प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। वे तमिल ब्राह्मण समुदाय से आती हैं और राहुल गांधी की बेहद करीबी हैं। हालांकि मध्य प्रदेश के कई स्थानीय बड़े नेता उनके नाम पर सहमत नहीं हैं।
3. प्रियव्रत सिंह (अनुभवी और मजबूत विकल्प)
प्रियव्रत सिंह साल 2000 में राजगढ़ जिला पंचायत के निर्विरोध सदस्य बने थे। वे खिलचीपुर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। कमलनाथ सरकार में वे ऊर्जा मंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठन में काम करने का उनके पास काफी लंबा और अच्छा अनुभव है। वे वर्तमान में राजगढ़ जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर काम कर रहे हैं।
4. प्रवीण पाठक (ग्वालियर-चंबल का युवा ब्राह्मण चेहरा)
प्रवीण पाठक ग्वालियर दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। वे युवा कांग्रेस में प्रदेश सचिव और महासचिव के पद पर रहे हैं। उन्होंने साल 2024 का लोकसभा चुनाव ग्वालियर सीट से लड़ा था। ग्वालियर-चंबल संभाग में उनकी छवि एक साफ-सुथरे युवा नेता की है।
5. शोभा ओझा (महिला विंग की कद्दावर नेता)
शोभा ओझा ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं। कमलनाथ सरकार के समय वे मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष थीं। वे पार्टी के भीतर महिला नेताओं का एक बहुत प्रमुख चेहरा हैं। महिला कोटे से उनका नाम भी दिल्ली की चर्चाओं में शामिल है।
दिल्ली दरबार में अंतिम फैसला, गुटबाजी दूर करने की चुनौती
कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सर्वसम्मति बनाने की है। पार्टी एक ऐसे चेहरे को मौका देना चाहती है जो सबको स्वीकार्य हो। मध्य प्रदेश की गुटबाजी को देखते हुए यह फैसला आसान नहीं है। राज्य के सभी वरिष्ठ नेताओं की राय को भी तवज्जो दी जा रही है। जातीय समीकरण और आगामी चुनावों को देखते हुए ही फैसला लिया जाएगा। अगले 48 घंटों में मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीति की तस्वीर साफ हो जाएगी।
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