एमपी राज्यसभा चुनाव: महेश केवट ने भरा पर्चा, दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
समझें क्या है पूरा मामला
- भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने भरा पर्चा, सियासत गरमाई।
- कांग्रेस में इस्तीफा, दिग्विजय बोले सब एकजुट हैं।
- तीसरी राज्यसभा सीट पर भाजपा-कांग्रेस में आर-पार की जंग।
- कांग्रेस विधायक दिल्ली रवाना, बाड़ाबंदी की तैयारी शुरू।
- कौन जीतेगा,दोनों दलों के दिग्गज नेताओं की साख दांव पर।
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट अब महज एक चुनाव नहीं रह गई है। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट के नामांकन के साथ राजनीतिक लड़ाई खुलकर मैदान में आ गई है। दोनों दलों के बड़े नेता आमने-सामने हैं और बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
इस सीट का नतीजा सिर्फ एक सांसद नहीं चुनेगा, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की राजनीतिक ताकत और प्रभाव का भी पैमाना बनेगा। यही वजह है कि चुनावी गणित के साथ-साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
एक नजर में पूरा सियासी घमासान
- भाजपा ने तीसरी सीट पर महेश केवट को उम्मीदवार बनाया।
- महेश केवट ने सोमवार को नामांकन दाखिल कर दिया।
- कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में पार्टी एकजुटता का दावा कर रही है।
- कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा देकर नई बहस छेड़ दी।
- भाजपा और कांग्रेस दोनों एक-दूसरे पर विधायकों को प्रभावित करने के आरोप लगा रहे हैं।
- दिग्विजय सिंह, कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कई नेता खुलकर मैदान में हैं।
महेश केवट के नामांकन से भाजपा ने दिया संदेश
भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने सोमवार को विधानसभा स्थित रिटर्निंग ऑफिसर कार्यालय में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मंत्री, विधायक और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
भाजपा ने इस शक्ति प्रदर्शन के जरिए साफ संकेत दिया कि पार्टी तीसरी सीट को लेकर पूरी तरह गंभीर है और चुनाव को प्रतिष्ठा का विषय मान रही है।
सीएम मोहन यादव का दावा: तीनों सीटें भाजपा जीतेगी
नामांकन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वास जताया कि भाजपा राज्यसभा की तीनों सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पूरी रणनीति और राजनीतिक विश्वास के साथ तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। मुख्यमंत्री ने महेश केवट को भगवान राम का आशीर्वाद मिलने की बात भी कही। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का राजनीतिक गणित पूरी तरह मजबूत है।
विजयवर्गीय बोले- विकास के लिए विधायक भाजपा को वोट देंगे
भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी के पास अतिरिक्त वोट हैं, इसलिए उम्मीदवार उतारा गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के विकास और प्रगति के साथ खड़े विधायक भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मतदान करेंगे। विजयवर्गीय के इस बयान को भाजपा की बढ़ती आत्मविश्वासपूर्ण रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस का पलटवार: भाजपा गलतफहमी में है
भाजपा के दावों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तीखा जवाब दिया है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि भाजपा बड़ी गलतफहमी में है। कांग्रेस के सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। किसी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़ेगी और पार्टी उम्मीदवार को पूरा समर्थन मिलेगा।
कांग्रेस में इस्तीफे से बढ़ी बेचैनी
राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी का इस्तीफा नई चर्चा का विषय बन गया है। ज्ञानचंदानी ने अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भेजा है। बताया जा रहा है कि वे उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से नाराज थे और मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी पर सार्वजनिक रूप से असहमति भी जता चुके थे। उनके इस्तीफे ने कांग्रेस की अंदरूनी एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन हैं नरेश ज्ञानचंदानी?
नरेश ज्ञानचंदानी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय रहे हैं। राज्यसभा उम्मीदवार चयन को लेकर उनकी नाराजगी पहले भी सामने आ चुकी थी। ऐसे समय में उनका इस्तीफा कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
भाजपा का जवाब: कांग्रेस में नूरा-कुश्ती चल रही है
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर पहले से ही अंतर्विरोध और गुटबाजी मौजूद है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस में चल रही नूरा-कुश्ती का भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है। नरेश ज्ञानचंदानी का इस्तीफा कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को उजागर करता है। भाजपा अपनी नीति और रीति के अनुसार राजनीति करती है और आगे भी करती रहेगी।
कांग्रेस क्यों कर रही विधायकों की बाड़ाबंदी की तैयारी?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को दूसरे राज्य भेजने की रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद दिल्ली पहुंचे हैं और विधायकों के समन्वय की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। तेलंगाना शिफ्टिंग की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि कांग्रेस किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की आशंका को हल्के में नहीं लेना चाहती।
नतीजा तय करेगा किसका बढ़ेगा राजनीतिक कद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीसरी राज्यसभा सीट का परिणाम कई नेताओं के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा। यदि भाजपा अपने उम्मीदवार महेश केवट को जिताने में सफल रहती है तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन के रणनीतिकारों की राजनीतिक साख और मजबूत होगी।
वहीं यदि कांग्रेस यह सीट जीत लेती है तो प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी। इसके उलट यदि कांग्रेस यह सीट गंवाती है तो संगठन की रणनीति और नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े होना तय माना जा रहा है।
अब बयान नहीं, वोट बताएंगे किसकी ताकत ज्यादा
राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट पर अब सियासी तापमान चरम पर है। भाजपा जीत का दावा कर रही है तो कांग्रेस एकजुटता का भरोसा जता रही है। आरोप, पलटवार, इस्तीफे और रणनीतिक बैठकों के बीच यह मुकाबला प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। अब सारी निगाहें मतदान और उसके नतीजे पर हैं, क्योंकि यह राज्यसभा चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बड़े नेताओं की ताकत और प्रभाव का भी।
तीन राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 18 को
मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर 18 जून 2026 को मतदान होगा। मतदान का समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा।
मतगणना उसी दिन शाम को शुरू होगी और कुछ ही घंटों में परिणाम घोषित हो जाएगा।
पूरा चुनाव कार्यक्रम इस प्रकार है:
- 1 जून- अधिसूचना जारी
- 8 जून- नामांकन की अंतिम तारीख
- 9 जून- नामांकन पत्रों की जांच
- 11 जून- नाम वापसी की अंतिम तारीख
- 18 जून- मतदान एवं मतगणना
तीनों सांसदों का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है, इसलिए चुनाव आयोग ने यह तारीखें तय की हैं।
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