राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग से विधायकी जाने का खतरा नहीं
समझें क्या है पूरा मामला...
- MP में राज्यसभा का गणित: 228 विधायक, तीन सीटें, बड़ा खेल।
- बीजेपी का दांव, महेश केवट को जिताने की पूरी तैयारी।
- कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी, बीजेपी का जवाबी खेल।
- राज्यसभा चुनाव में व्हिप बेकार, सुप्रीम कोर्ट का भी यही फैसला।
मध्यप्रदेश के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी अपना तीसरा उम्मीदवार महेश केवट को मैदान में उतार चुकी है। बीजेपी का दावा है कि उन्हें जीत के लिए जरूरी 58 वोट मिल जाएंगे।
कांग्रेस अपने विधायकों को दूसरे राज्यों में भेजकर बाड़ाबंदी कर रही है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता। इसलिए क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक की सदस्यता नहीं जाती।
बीजेपी का तीसरा दांव
मध्यप्रदेश की विधानसभा में इस वक्त 228 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव की यह जंग बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट का नाम आगे किया है। पार्टी के रणनीतिकारों का दावा है कि उन्हें जीत के लिए जरूरी 58 वोट जुटा लिए जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है। शुरुआत में पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर एकमत नहीं थे। लेकिन अब पार्टी ने पूरी तैयारी कर ली है।
क्यों नहीं जाती विधायकी?
यह सवाल सबसे अहम है। अगर कोई विधायक पार्टी के उम्मीदवार को छोड़कर दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को वोट दे दे, तो क्या होगा?
जवाब साफ है- विधायकी नहीं जाती। पार्टी ज्यादा से ज्यादा उसे कारण बताओ नोटिस दे सकती है। पार्टी से निलंबित या निष्कासित कर सकती है। अगला टिकट रोक सकती है। लेकिन विधायकी खत्म करने का अधिकार पार्टी को नहीं है।
दल-बदल कानून यहां काम नहीं करता
दल-बदल विरोधी कानून यानी दसवीं अनुसूची मुख्य रूप से विधानसभा या संसद के भीतर होने वाली वोटिंग पर लागू होती है। राज्यसभा चुनाव इससे अलग है।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह साफ कर चुका है। कोर्ट ने माना है कि राज्यसभा चुनाव विधानसभा की कार्यवाही नहीं, बल्कि एक अलग चुनावी प्रक्रिया है। इसलिए इसमें पार्टी व्हिप का कोई कानूनी असर नहीं होता।
बीजेपी की रणनीति
बीजेपी उन विधायकों को टटोल रही है जो पिछला चुनाव बहुत कम अंतर से जीते थे। रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसे विधायकों को अगले चुनाव में टिकट का वादा किया जाए तो वे पाला बदल सकते हैं। इसके अलावा खरीद-फरोख्त की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा। यह राजनीति में पुराना खेल है।
कांग्रेस की बाड़ाबंदी
कांग्रेस को डर है कि उसके कुछ विधायक बीजेपी के प्रलोभन में आ सकते हैं। इसलिए पार्टी अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश या कर्नाटक भेजने की तैयारी कर रही है।
दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। यह रणनीति नई नहीं है। पहले भी कई राज्यों में ऐसे चुनावों से पहले विधायकों को दूसरे राज्यों में ले जाया जाता रहा है।
228 विधायक और जीत का गणित
मध्यप्रदेश विधानसभा में इस वक्त 228 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए एक निश्चित कोटे के वोट चाहिए होते हैं। बीजेपी के पास संख्याबल अधिक है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। यही इस चुनाव की असली चुनौती है।
FAQ
- क्रॉस वोटिंग करने पर विधायक की सदस्यता क्यों नहीं जाती?
राज्यसभा चुनाव को सुप्रीम कोर्ट विधानसभा की कार्यवाही नहीं मानता। दल-बदल विरोधी कानून यानी दसवीं अनुसूची केवल सदन के भीतर वोटिंग पर लागू होती है। इसलिए क्रॉस वोटिंग पर विधायक की सदस्यता नहीं जाती। - बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार को कितने वोट चाहिए?
बीजेपी के रणनीतिकारों के अनुसार महेश केवट को जीत के लिए 58 वोट की जरूरत है। पार्टी का दावा है कि यह वोट जुटाए जा चुके हैं। - कांग्रेस अपने विधायकों को दूसरे राज्यों में क्यों भेज रही है?
कांग्रेस को डर है कि बीजेपी उसके विधायकों को टिकट या अन्य प्रलोभन देकर क्रॉस वोटिंग करा सकती है। इससे बचने के लिए कांग्रेस अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश या कर्नाटक भेज रही है, जहां कांग्रेस की सरकारें हैं।
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