एमपी में 12 लाख परिवारों को राशन शक्कर बंद, विपक्ष बोला- इथेनॉल में उपयोग
समझें क्या है पूरा मामला...
- 12 लाख गरीब परिवारों को राशन की शक्कर मिलनी बंद।
- 5 महीने से खाली है सरकारी शक्कर का कोटा।
- 20 रुपए वाली शक्कर अब 70 रुपए किलो बिक रही।
- इथेनॉल उत्पादन पर विपक्ष ने उठाए तीखे सवाल।
- चाय दुकानदारों की जेब पर भी पड़ी महंगाई की मार।
मध्यप्रदेश में अंत्योदय परिवारों को राशन की शक्कर मिलनी बंद हो गई है। अप्रैल से अगस्त तक आवंटन शून्य दर्ज है। करीब 12 लाख कार्डधारी परिवार प्रभावित हुए हैं। मऊगंज जिले में अकेले 17,385 परिवार शक्कर से वंचित हैं। बाजार में शक्कर की कीमत अब दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।
मऊगंज में सबसे ज्यादा असर
मऊगंज जिले में दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत हजारों परिवार जुड़े हैं। इन्हें उचित मूल्य दुकानों से सस्ती शक्कर मिलती थी। अप्रैल से यह सुविधा पूरी तरह बंद है। AePDS पोर्टल पर लगातार पांच महीने आवंटन शून्य दिख रहा है।
जनवरी में जिले को 13,163 किलो शक्कर मिली थी। फरवरी में यह आंकड़ा 15,197 किलो और मार्च में 15,910 किलो रहा। इसके बाद अचानक आवंटन रुक गया। मैदानी अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से ही सप्लाई नहीं आ रही।
बाजार में दोगुनी हुई कीमत
सरकारी कोटे की शक्कर न मिलने से बाजार पर दबाव बढ़ा है। स्थानीय बाजार में शक्कर 65 से 70 रुपए किलो बिक रही है। पहले 50 किलो की बोरी करीब 2,000 रुपए की मिलती थी। अब यही बोरी करीब 3,225 रुपए में मिल रही है।
छोटे दुकानदारों पर बोझ
महंगी शक्कर का असर आम कारोबार पर भी पड़ रहा है। चाय दुकान चलाने वाले राजेश्वर प्रसाद पटेल पहले 10 रुपए में चाय बेचते थे। अब शक्कर महंगी होने से लागत बढ़ गई है। कीमत बढ़ाने पर ग्राहक महंगी चाय नहीं लेना चाहते, जिससे कमाई घट रही है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
मऊगंज अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष शेख मुख्तार सिद्दीकी ने सरकार को घेरा। उनका आरोप है कि अप्रैल से अंत्योदय परिवारों की शक्कर बंद कर दी गई। उन्होंने इसे एथेनॉल उत्पादन से जोड़ा।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दलों का भी यही आरोप है। उनका कहना है कि ज्यादा गन्ना इथेनॉल बनाने में जा रहा है। इससे चीनी उत्पादन और उपलब्धता, दोनों प्रभावित हुए हैं।
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इस कारण-परिणाम की पुष्टि अभी नहीं हुई है। शासन की ओर से अब तक स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। इसलिए सरकार का स्पष्टीकरण आना बाकी है।
पूरे प्रदेश में एक जैसी तस्वीर
यह संकट सिर्फ मऊगंज तक सीमित नहीं है। पूरे मध्य प्रदेश में करीब 12 लाख अंत्योदय कार्डधारियों की शक्कर अप्रैल से बंद है। जनवरी में प्रदेश को 12,51,418 किलो शक्कर मिली थी। फरवरी और मार्च में भी यह आंकड़ा 12 लाख किलो के आसपास रहा।
इसके बाद अप्रैल से अगस्त तक आवंटन पूरी तरह शून्य है। उचित मूल्य दुकानों पर 20 रुपए किलो मिलने वाली शक्कर अब कहीं उपलब्ध नहीं है। अधिकारी सिर्फ इतना कह रहे हैं कि शासन स्तर से आवंटन नहीं आ रहा।
आगे क्या
गरीब परिवार अब दोबारा आवंटन शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। बढ़ती महंगाई के बीच उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। मांग है कि सरकार जल्द शक्कर बहाल करे और असल वजह भी साफ बताए।
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