एमपी में रिटायरमेंट पर वेतन से ज्यादा की रिकवरी, कर्मचारियों को नहीं मिल रहा इंक्रीमेंट का लाभ
मध्य प्रदेश में कई अफसरों और कर्मचारियों को उनकी नौकरी के दौरान उतना वेतन नहीं मिला, जितनी रिकवरी रिटायरमेंट के बाद की गई। ये रिकवरी 2 लाख 50 हजार रुपए से लेकर 25 लाख तक की है। इन मामलों में कोर्ट भी अपना फैसला दे चुका है। साथ ही सरकार ने आदेश भी जारी कर दिया है कि विभाग इस बारे में कार्रवाई करके इसे हल करें।
कर्मचारियों को नहीं मिल रहा बकाया भुगतान
दरअसल 2 हजार 500 से ज्यादा ऐसे मामले हैं जो 30 जून और 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले कर्मचारियों के हैं। इसमें यह साफ है कि जब कर्मचारी ने पूरे साल में 364 दिन काम किया हो और उसकी रिटायरमेंट बस अगले दिन हो, तो उसे वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ मिलना चाहिए लेकिन ये लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है।
हालात ये हैं कि वित्त विभाग के संयुक्त संचालक ने कर्मचारियों का वेतन तय किया, लेकिन उसी विभाग के पेंशन अफसरों ने इसे गलत मानते हुए उनसे पैसे की रिकवरी शुरू कर दी। इसका नतीजा यह हुआ कि रिकवरी का मामला अभी तक हल नहीं हो पाया है। इससे रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
25 लाख की रिकवरी निकाली गई
अक्टूबर 2024 में मंडला जिले के डॉ. सुनील बहल रिटायर होने वाले थे, लेकिन जुलाई 2024 में इनकी 25 लाख रुपए की रिकवरी निकाली गई थी। रिकवरी का कारण यह बताया गया कि उनका वेतन निर्धारण ज्यादा हो गया था। इसके खिलाफ डॉ. सुनील बहल ने कोर्ट में रिट याचिका (क्रमांक 43853/2025) दायर की है।
राज्य सरकार सभी रिकवरी मामलों की जांच करे
हाईकोर्ट ने रिट याचिका क्रमांक 815/2017 में मप्र राज्य बनाम जगदीश प्रसाद दुबे के मामले का निराकरण करते हुए कहा था कि, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के तहत राज्य सरकार को सभी रिकवरी मामलों की जांच करनी चाहिए।
कोई राशि गलत तरीके से वसूली गई है, तो उसे 6 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस किया जाए। इसके अलावा कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया था कि दिसंबर 2024 तक सभी रिकवरी मामलों का निपटारा किया जाए।
एसआर अग्रवाल की 2 लाख की रिकवरी
इंजीनियर एसआर अग्रवाल 2015 में सेवानिवृत्त हुए थे। इनकी भी 2 लाख 48 हजार रुपए की रिकवरी की गई थी। इसकी वजह उनके वेतन निर्धारण को बताया गया था। इस रिकवरी के खिलाफ उन्होंने याचिका (क्रमांक 4633/2017) दायर की थी। हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को इस मामले का निपटारा कर दिया था, लेकिन अब तक सरकार की तरफ से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
इंक्रीमेंट का फायदा देकर पेंशन तय
सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि जो कर्मचारी 30 जून या 31 दिसंबर को रिटायर होते हैं, उन्हें इंक्रीमेंट का फायदा देकर उनकी पेंशन तय की जाए। इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी कुछ मामलों में कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिए थे।
इन मामलों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 15 मार्च 2024 को नया आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जिनके पक्ष में कोर्ट के आदेश आए हैं, उन्हें एक काल्पनिक इंक्रीमेंट का लाभ दिया जाएगा।
फैसले के बाद भी नहीं मिला इंक्रीमेंट
इसके बाद इन मामलों की संख्या बढ़ गई और करीब 2500 मामले कोर्ट में पहुंच गए थे। फिर सरकार ने 18 नवंबर 2024 को एक और संशोधित आदेश जारी किया था। इस आदेश में यह कहा गया था कि 30 या 31 जून को रिटायर हुए सभी कर्मचारियों को एक इंक्रीमेंट दिया जाएगा। इसमें यह शर्त भी रखी गई थी कि 1 मई 2023 से पहले का बकाया नहीं दिया जाएगा।
हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद भी अब तक किसी भी कर्मचारी को यह इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिला है। सरकार का आदेश तो दूर की बात कोर्ट के फैसले पर तर्क है कि विभागों से स्वीकृति ली जा रही है।
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