एमपी में राजस्व संकट: शराब और रियल एस्टेट से एक दिन में चाहिए 6 हजार करोड़
News In Short
- मध्यप्रदेश सरकार की आय लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है।
- शराब नीति से आबकारी आय में बड़ा झटका लगा है।
- रियल एस्टेट की मंदी से पंजीयन आय घटी है।
- कई जिलों में शराब ठेके नहीं उठ पाए हैं।
- 31 मार्च को लक्ष्य पूरा करना अब मुश्किल दिख रहा है।
News In Detail
एमपी में क्यों बढ़ा राजस्व संकट
मध्य प्रदेश सरकार पर कर्ज का दबाव बढ़ रहा है। उधर आय उम्मीद से कम आ रही है। दो बड़े विभागों से ही सबसे ज्यादा कमाई होती है। ये विभाग पंजीयन और आबकारी हैं। वहीं, इस बार दोनों ही कमजोर दिख रहे हैं। सरकार अभी भी लक्ष्य से काफी पीछे है।
पंजीयन विभाग क्यों नहीं पहुंच पाया लक्ष्य तक
वित्तीय साल 2025-26 के लिए बड़ा लक्ष्य रखा गया था। इस बार लक्ष्य 13 हजार 920 करोड़ तय किया गया था। 30 मार्च तक आय 12 हजार 852 करोड़ के आसपास रही। अब भी एक हजार करोड़ से ज्यादा की कमी है। लक्ष्य पूरा करने के लिए सिर्फ एक दिन बचा है।
एमपी की शराब नीति से कैसे लगा बड़ा झटका
एमपी आबकारी विभाग को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। हर साल 20 फीसदी ज्यादा का लक्ष्य रखा जाता है। इस बार कई जिलों में ठेके नहीं उठे हैं। कई जगह 50 फीसदी से भी कम ठेके गए।
कुल लक्ष्य करीब 19 हजार 952 करोड़ रखा गया था। अभी तक करीब 15 हजार करोड़ के ठेके ही उठे हैं। यानी करीब 5 हजार करोड़ की कमी बनी हुई है।
किन जिलों में ठेके पूरे और कहां हाल खराब
कुछ छोटे जिलों में स्थिति बेहतर दिखी है। डिंडोरी, उमरिया और शहडोल में ठेके पूरे उठे। मंडला, सीधी और नर्मदापुरम में भी अच्छा प्रदर्शन रहा। खरगोन में भी 100 फीसदी ठेके उठे हैं। वहीं, कई बड़े जिले पीछे रह गए हैं।
नीमच और शाजापुर में हालत खराब है। रतलाम, अलीराजपुर और झाबुआ भी पीछे हैं। बुरहानपुर, श्योपुर और राजगढ़ में भी कमी है। यह सभी 50 फीसदी से भी नीचे हैं।
इंदौर, भोपाल में ये रही आय की स्थिति
सबसे ज्यादा राहत इंदौर जिले से मिली है। यहां 2102 करोड़ के लक्ष्य के बदले सरकार को अभी तक करीब 2050 करोड़ मिल चुका है, जो बड़ी राशि है। लेकिन भोपाल में 1431 करोड़ के बदले में 700 करोड़ तक ही आय पहुंची है।
ग्वालियर में 677 करोड़ लक्ष्य के बदले में करीब 640 करोड़ आय हो चुकी है। जबलपुर में 1104 करोड़ के बदले में करीब 570 करोड़ ही आय हुई है।
रियल एस्टेट में इंदौर क्यों पीछे रह गया
रियल एस्टेट से भी इस बार कमाई घटी है। इंदौर का हिस्सा पूरे प्रदेश में बड़ा होता है। इस बार 3097 करोड़ का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन 30 मार्च तक 2661 करोड़ ही आए। अब भी 436 करोड़ की कमी बाकी है।
अंतिम दिन ज्यादा आय की उम्मीद नहीं है। करीब 350 से 400 करोड़ की कमी रह सकती है। बीते साल इसी अवधि तक इंदौर में आय 2551 करोड़ थी। इस बार दस्तावेजों की संख्या घटी है। जो भी आय में बढ़ोतरी दिख रही है वह भी गाइडलाइन में अधिक बढ़ोतरी के कारण है।
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