सड़क हादसों के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा, दलाल ले रहे फर्जी क्लेम से मुआवजा
मध्यप्रदेश और आसपास के राज्यों में अब सड़क हादसे केवल एक संयोग नहीं रह गए हैं। अब ये एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं जो बीमा मुआवजा वसूलने का काम करता है।
जैसे ही कोई दुर्घटना होती है सरकारी अस्पताल, पुलिस चौकी और मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसिटी) में दलालों का जाल तुरंत फैल जाता है।
यह सिंडिकेट फर्जी एफआईआर, गवाहों और साठगांठ का इस्तेमाल करके बीमा कंपनियों को करोड़ों का नुकसान पहुंचा रहा है। हैरानी की बात है कि पिछले पांच सालों में ऐसे 1500 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।
वाहनों का फर्जी क्लेम केस
बीमा कंपनियों के रिकॉर्ड से इस रैकेट की गंभीरता साफ हो जाती है। श्रीराम जनरल इंश्योरेंस के पास 2020 से 2025 के बीच छह हजार 592 क्लेम केस आए थे। इनमें से पांच हजार 253 मामलों में क्लेम दिया गया, लेकिन कोर्ट ने एक हजार 61 मामलों को शक के आधार पर खारिज कर दिया।
जांच में यह सामने आया कि जिन वाहनों को हादसे में शामिल बताया गया उनसे कभी कोई एक्सीडेंट हुआ ही नहीं था। आईसीआईसीआई (ICICI) लोम्बार्ड की जांच में भी पता चला कि आरोपी केवल 25-30 हजार रुपए लेकर अपनी गाड़ी को फर्जी क्लेम केस में शामिल करवा लेते थे।
फर्जी मोटर क्लेम गंभीग खतरा- हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में फर्जी मोटर क्लेम को न्यायिक सिस्टम के लिए बड़ा खतरा बताते हुए चिंता जताई थी। श्रीराम जनरल इंश्योरेंस के एक हजार 61 मामलों को कोर्ट ने शक के आधार पर खारिज कर दिया है। दमोह एमएसिटी ने भी छतरपुर के बड़ा मल्हेरा हादसे में 88 लाख और 69 लाख के दो बड़े दावे खारिज करते हुए उन्हें फर्जी बताया है।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
हैरानी की बात ये है कि यह फर्जी क्लेम नेटवर्क अब मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र तक फैल चुका है। 7 मार्च 2026 को जलगांव (महाराष्ट्र) में 50 लाख रुपए के फर्जी क्लेम का खुलासा हुआ था।
श्रीराम जनरल इंश्योरेंस की शिकायत पर हुई जांच में चालीसगांव के मेडिकल अफसर और 4 पुलिसकर्मी भी आरोपी पाए गए थे। अब तक इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
8 क्लेम पर एक ही मालिक
ड्राइवर और गाड़ियों के बीच फर्जी क्लेम का मामला सामने आया है। श्रीराम जनरल इंश्योरेंस के मुताबिक गुजरात पासिंग टवेरा (GJ 09 BA 1430) से 8 क्लेम किए गए थे। हर बार मालिक और ड्राइवर के रूप में प्रतीक राजबीर गोस्वामी पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि प्रतीक अन्य हादसों में भी अलग-अलग गाड़ियों में ड्राइवर के तौर पर दिखा जबकि मालिक बदलते रहे।
धामनोद हादसे में गाड़ी MP 09 AG 9767 का ड्राइवर प्रतीक था और मालिक गौरव जाधव को बताया गया। वहीं MP 13 ZH 2698 केस में मालिक राजेश और ड्राइवर फिर प्रतीक थे। 2020 से 2025 के बीच ऐसे 15 क्लेम केस सामने आए हैं जिनमें उमेश सांखला का नाम भी बार-बार जुड़ा है।
ऐसे करते हैं फर्जी क्लेम
फर्जी मोटर दुर्घटना क्लेम एक बड़े नेटवर्क के जरिए किए जाते हैं। पहले तो हादसे की झूठी कहानी बनाई जाती है। इसके बाद पुलिस में फर्जी एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इसके बाद दलाल तय गवाह और घायल लोग तैयार कर देते हैं जिन्हें पैसे देकर शामिल किया जाता है।
फिर सरकारी अस्पताल से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनवाने के बाद एमएसीटी में केस डाला जाता है। कई बार तो गाड़ी और ड्राइवर भी झूठे तरीके से हादसे में शामिल किए जाते हैं। जैसे ही सारे कागजात पूरे होते हैं, बीमा कंपनी से मुआवजा मिल जाता है, जिसे ये लोग आपस में बांट लेते हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...
एमपी न्यूज: फर्जी दस्तावेज़ बना हड़प लिए 58 लाख का बीमा क्लेम, आरोपियों में बीमा कंपनी के दो कर्मचारी भी
फसल बीमा योजना में 423 करोड़ के फर्जी क्लेम, जानिए एआई की मदद से कैसे पकड़ा पूरा मामला
मध्यप्रदेश न्यूज: कंप्यूटर खरीदी घोटाला, डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता और स्कूल शिक्षा सचिव संजय गोयल का हटना तय
KBC फेम तहसीलदार अमिता सिंह तोमर गिरफ्तार, श्योपुर बाढ़ घोटाले में हुई कार्रवाई