एमपी में सड़क हादसे में 17% बढ़ीं मौतें, पुरुषों की संख्या पांच गुना ज्यादा
मध्य प्रदेश में सड़क हादसों से मौत का आंकड़ा एक साल में तेजी से बढ़ा है। पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (PTRI – Police Training and Research Institute) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में प्रदेश में कुल 58 हजार 183 सड़क हादसे हुए थे। इनमें 15 हजार 976 लोगों की जान गई थी।
वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा 13 हजार 661 मौतों का था। यानी मौतों में करीब 17% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हादसों की संख्या में भी बढ़त देखी गई, हालांकि यह बढ़त सिर्फ 2.7% रही।
ओवरस्पीडिंग बनी सबसे बड़ी वजह
रिपोर्ट में हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार ड्राइविंग बताई गई है। अकेले ओवर स्पीडिंग से जुड़े मामलों में 12 हजार 818 मौतें दर्ज हुईं। गलत दिशा में वाहन चलाने से 713 लोगों की जान गई।
वहीं शराब पीकर गाड़ी चलाने से 271 और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल यूज करने से 112 मौतें हुईं।
चौंकाने वाला आंकड़ा हेलमेट को लेकर सामने आया है। कुल छह हजार 793 लोगों की मौत सिर्फ हेलमेट न पहनने की वजह से हुई। यह आंकड़ा बताता है कि छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
शाम का समय सबसे खतरनाक
रिपोर्ट के मुताबिक शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। इस दौरान 12 हजार 328 हादसों में तीन हजार 711 लोगों की जान गई।
यह समय दिनभर के मुकाबले सबसे जोखिम भरा माना गया है। ऑफिस से घर लौटने और अंधेरा होने की वजह से जोखिम और बढ़ जाता है।
गांव की सड़कें ज्यादा जानलेवा
शहरों के मुकाबले गांव की सड़कों पर मौतें कहीं ज्यादा हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 11 हजार 937 लोगों की जान गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा चार हजार 39 रहा।
सीधी सड़कों पर भी हादसे ज्यादा हुए। कुल 37 हजार 116 हादसे सीधी सड़कों पर हुए, जिनमें नौ हजार 956 लोगों की मौत हुई।
इसके उलट गड्ढे वाली सड़कों पर सिर्फ 300 मौतें दर्ज हुईं। यह आंकड़ा बताता है कि खराब सड़क से ज्यादा खतरनाक तेज रफ्तार और लापरवाही है।
रिपोर्ट में एक और तथ्य सामने आया है। पांच साल से कम पुरानी गाड़ियों से 16 हजार 64 हादसे हुए। इनमें चार हजार 579 लोगों की मौत हुई। साफ मौसम में भी नौ हजार 872 मौतें दर्ज हुईं। यानी नई गाड़ी और अच्छा मौसम भी सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं देते।
युवाओं की सबसे ज्यादा मौत
मरने वालों में हर दूसरा व्यक्ति 18 से 35 साल की उम्र का था। 18 से 25 साल के आयु वर्ग में तीन हजार 850 मौतें हुईं। वहीं 25 से 35 साल के वर्ग में यह आंकड़ा चार हजार 301 रहा।
दोनों वर्ग मिलाकर कुल मौतों का 51% से ज्यादा हिस्सा बनते हैं। यह आंकड़ा सबसे ज्यादा चिंता की बात है, क्योंकि यही उम्र किसी परिवार की कमाई और सहारे की होती है।
पुरुषों की मौत महिलाओं से पांच गुना ज्यादा
कुल 15 हजार 976 मृतकों में 13 हजार541 पुरुष थे। महिलाओं की संख्या दो हजार 435 रही। यानी सड़क हादसों में पुरुषों की मौत महिलाओं के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा रही।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी वजह पुरुषों का ज्यादा सफर करना और दोपहिया वाहन ज्यादा चलाना हो सकती है।
कुल मिलाकर रिपोर्ट यह साफ करती है कि हादसों की वजह सड़क की हालत से ज्यादा ड्राइविंग का तरीका है। तेज रफ्तार, हेलमेट न पहनना और लापरवाही सबसे बड़े कारण बनकर उभरे हैं।
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