एमपी में हर घंटे हो रहे 12 एक्सीडेंट, शिकार होने वाले युवा सबसे ज्यादा

Aman Vaishnav | Jun 11, 2026, 11:59 IST
एमपी में सड़क हादसे
मध्य प्रदेश में सड़क हादसे तेजी से बढ़ रहे हैं। डायल-108 एंबुलेंस सेवा की रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में 1 लाख से अधिक हादसे हुए। इनमें सबसे ज्यादा 16 से 30 साल के युवा शिकार हुए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में एक साल के भीतर कुल एक लाख तीन हजार 294 सड़क हादसे हुए हैं।
  • इन दुर्घटनाओं में 16 से 30 साल के युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा यानी 61% है।
  • सागर जिला छह हजार 61 हादसों के साथ प्रदेश में पहले नंबर पर है। भोपाल तीसरे स्थान पर है।
  • मई के महीने में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट हुए हैं और त्योहारों के समय भी ग्राफ बढ़ा है।
  • ओवर स्पीडिंग पर लगाम लगा लें, तो 60% हादसे कम हो सकते हैं।

MP की सड़कों पर हर घंटे 12 हादसे

डायल-108 एंबुलेंस सेवा की ताजा रिपोर्ट सामने आई है। इसमें बताया गया है कि प्रदेश में एक साल में एक लाख तीन हजार 294 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। यानी हर दिन करीब 283 और हर घंटे लगभग 12 हादसे।



युवाओं की जान ले रही हैं सड़कें

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा युवाओं से जुड़ा है। 16 से 30 साल के युवा कुल हादसों में 61 प्रतिशत पीड़ित हैं। 31 से 45 साल के लोगों की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत है।



15 साल से कम उम्र के बच्चे 4 प्रतिशत और 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग 3 प्रतिशत शामिल हैं। 46 से 60 साल के लोगों की संख्या 9 प्रतिशत रही।



यह आंकड़ा बताता है कि सड़क पर सबसे ज्यादा खतरे में वही लोग हैं जिनकी जिंदगी अभी शुरू हुई है।



मध्य प्रदेश में सड़क हादसे


सागर सबसे खतरनाक, इंदौर-भोपाल भी पीछे नहीं

जिलेवार आंकड़ों में सागर सबसे ऊपर है। यहां छह हजार 61 हादसे दर्ज हुए। इंदौर में चार हजार 853 और भोपाल में चार हजार 546 दुर्घटनाएं रहीं।



छिंदवाड़ा में तीन हजार 406, जबलपुर में तीन हजार 398 और धार में तीन हजार 363 हादसे हुए। रीवा में तीन हजार 289, सतना में दो हजार 912, विदिशा में दो हजार 786 और खरगोन में दो हजार 748 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं।



मध्य प्रदेश में सड़क हादसे


मई 2025 में सबसे ज्यादा हादसे

महीनेवार आंकड़ों के अनुसार मई 2025 में सबसे ज्यादा 12 हजार 47 हादसे दर्ज हुए। जून-जुलाई में थोड़ी कमी आई, लेकिन अगस्त से फिर ग्राफ चढ़ा। अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के दौरान भी उछाल देखा गया।



क्यों होते हैं इतने हादसे?

मध्यप्रदेश 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि, हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनने से चोटें बेहद गंभीर हो जाती हैं। उन्होंने ट्रैफिक नियमों का पालन और ओवर स्पीडिंग से बचने की अपील की है।



मध्य प्रदेश में सड़क हादसे


हादसे के प्रमुख कारण ये हैं

ओवर स्पीडिंग सबसे बड़ा कारण है। शराब पीकर वाहन चलाना दूसरे नंबर पर है। हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनना तीसरी बड़ी वजह है। सड़कों पर ब्लैक स्पॉट और गड्ढे भी दुर्घटनाओं को न्योता देते हैं। इसके अलावा क्षमता से अधिक सवारी और स्टंट करना भी जानलेवा साबित होते हैं।



गति सीमा मानें तो 60% हादसे रुकें

भोपाल आरटीओ जितेंद्र शर्मा का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं (मध्यप्रदेश में सड़क हादसा) की सबसे बड़ी वजह ओवर स्पीडिंग है। लोग तय गति सीमा का पालन करें तो हादसों में करीब 60 प्रतिशत कमी आ सकती है। यह छोटा सा बदलाव हजारों जिंदगियां बचा सकता है।



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