एमपी में सड़क निर्माण घोटाला, पेट्रोल कंपनियों के नाम पर ऐंठे 55 करोड़

Aman Vaishnav | Jun 22, 2026, 09:00 IST
एमपी में सड़क निर्माण घोटाला
मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण में घोटाला हुआ है। ईडी ने रीवा और जबलपुर में छापेमारी कर 23 लाख 50 हजार कैश जब्त किया है। साथ ही दो करोड़ 93 लाख रुपए फ्रीज किए। यह घोटाला पेट्रोलियम कंपनियों के फर्जी बिलों से हुआ है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
  • ईडी ने रीवा और जबलपुर में 19 जून को छापेमारी की था।
  • टीम ने 23 लाख 50 हजार रुपए नकद जब्त किए।
  • साथ ही दो करोड़ 93 लाख रुपए की बैंक राशि फ्रीज कर दी गई है।
  • ठेकेदारों ने पेट्रोलियम कंपनियों के नाम पर फर्जी बिल बनाए थे।

क्या है पूरा घोटाला

मध्यप्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों के नाम पर सरकारी भुगतान हासिल करने में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। ठेकेदारों ने फर्जी बिल लगाकर करोड़ों रुपए का भुगतान ले लिया। यह मामला सड़क निर्माण से जुड़े सरकारी फंड की हेराफेरी का है।



जांच में सामने आया कि ठेकेदारों ने MPRRDA ( Madhya Pradesh Rural Road Development Authority) के परियोजना अधिकारियों के साथ मिलकर यह साजिश रची। दोनों पक्षों ने मिलकर फर्जी कागजात तैयार किए। इसके बाद सरकार से भुगतान हासिल कर लिया गया।



जानकारी के अनुसार भुगतान के लिए इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नाम से बिल बनाए गए। ये बिल पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत थे। इन कंपनियों का इस घोटाले से कोई सीधा संबंध नहीं है, सिर्फ इनके नाम का दुरुपयोग किया गया।



इन फर्जी बिलों के आधार पर लगभग 55 करोड़ 60 लाख रुपए का भुगतान प्राप्त किया गया। इससे सरकारी खजाने को इतनी ही रकम का नुकसान हुआ। यह रकम जनता के टैक्स से जुड़ी सरकारी योजनाओं का पैसा है।



कैसे हुई ईडी की कार्रवाई

यह जांच ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद ईडी ने अपनी जांच शुरू की।



टीम ने 19 जून को रीवा और जबलपुर में एक साथ छापेमारी की। टीम ने ठेकेदारों और जुड़े लोगों के ठिकानों की जांच की। तलाशी के दौरान 23 लाख 50 हजार रुपए नकद बरामद हुए।



इसके अलावा ईडी ने दो करोड़ 93 लाख रुपए की बैंक जमा राशि फ्रीज कर दी है।



कैसे हुआ 55 करोड़ का नुकसान

जानकारी के अनुसार ठेकेदारों ने असली काम से ज्यादा भुगतान दिखाने के लिए फर्जी बिल बनाए। इन बिलों में पेट्रोलियम कंपनियों के नाम का गलत इस्तेमाल हुआ।



इस तरह सरकारी फंड से 55 करोड़ 60 लाख रुपए निकाल लिए गए। यह रकम सीधे सड़क निर्माण से जुड़े बजट का हिस्सा थी। अब यह पूरा पैसा घोटाले की भेंट चढ़ गया।



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