मध्य प्रदेश में जूनियरों के अधीन सीनियर अफसरों की पोस्टिंग

Sanjay Sharma | Mar 28, 2026, 22:12 IST
Photograph: (the sootr)
BHOPAL. मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग में सीनियरिटी की अनदेखी हो रही है। सीनियर अधिकारियों को जूनियर अफसरों के अधीन काम करना पड़ रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ रहा है।

News in Short :

  • एमपी ग्रामीण विकास विभाग में पदस्थापना में नियमों की अनदेखी हो रही है।
  • वरिष्ठता रखने वाले पात्र अधिकारियों को उनके ही कनिष्ठों के नीचे पदस्थ किया जा रहा है।
  • जूनियर को अधिकार दिए जाने से सीनियर अधिकारियों के साथ टकराव की स्थिति बन गई है।
  • एमपी के 10 संभागों में से 3 में जूनियर अफसर अपने सीनियर के ऊपर पदस्थ किए गए हैं।
  • वरिष्ठता के बावजूद उच्च पद मिलने के इंतजार में 20 अधिकारी हो चुके हैं सेवानिवृत्त।

Intro

मध्यप्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग में सीनियरिटी की अनदेखी हो रही है। वरिष्ठ अधिकारियों को छोड़कर कनिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर पोस्टिंग दी जा रही है। इस वजह से वरिष्ठ अधिकारी अपने ही जूनियरों के अधीन काम करने मजबूर हैं। इससे व्यवस्था में टकराव विभागीय कार्यप्रणाली पर बुरा असर डाल रहा है। सीनियर अफसर को कार्यालयों में सीमित कर दिया गया है, जबकि जूनियर संभाग आयुक्त कार्यालयों में दबदबा जमा रहे हैं।



News in Detail :

मध्यप्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग में वरिष्ठता की अनदेखी हो रही है। यहां पदों पर कनिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है। इससे विभाग में विवाद की स्थिति बन गई है। जबकि विभाग में पदस्थापना के लिए सक्षम अधिकारी उपलब्ध हैं। अब वरिष्ठों से कनिष्ठ अधिकारी बॉस बनकर कार्य कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब अधिकारियों की कोई कमी नहीं है।



अधिकारियों की हुई अनदेखी

मध्यप्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग में सीनियरिटी की अनदेखी हो रही है। 40 से ज्यादा संयुक्त आयुक्त अधिकारी पदस्थापना के लिए पात्र हैं। इसके बावजूद 33% पद नियम विरुद्ध भरे गए हैं। इससे सीनियर अफसरों में असंतोष बढ़ रहा है। सेवानिवृत्त के नजदीक पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी पदस्थापना में मनमानी पर मुखर भी हो रहे हैं।



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अतिरिक्त को बना दिया जेडी

अब सीनियर अफसरों को आईएएस या राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों द्वारा बदल दिया गया है। पहले उन्हें जिला पंचायत सीईओ जैसे पद मिलते थे। अब उनके पास केवल 10 संभागीय आयुक्त पद ही बचे हैं। इंदौर संभाग में अतिरिक्त संचालक दीतू सिंह राणदा को संयुक्त आयुक्त का पद सौंपा गया है। वरिष्ठता के बावजूद उनसे मूल पद से एक स्तर नीचे जूनियर पद पर काम कराया जा रहा है। यह स्थिति विभाग में विवाद का कारण बन गई है।



तीन संभाग में उच्च पद पर जूनियर

प्रदेश के 10 संभाग आयुक्त कार्यालयों में संयुक्त आयुक्त (विकास) का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हीं पदों को लेकर विभाग में खींचतान मची हुई है। संभाग आयुक्त कार्यालयों में पदस्थापना के लिए संयुक्त आयुक्त स्तर की पात्रता रखने वालों की संख्या 40 से ज्यादा है। जबकि जूनियरों को पदस्थापना मिलने की वजह से 20 पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।



वरिष्ठ अफसरों का घट रहा है कद

दो संभागों में जूनियर अधिकारियों को सीनियर पदों पर तैनात किया गया है। संभागीय संयुक्त आयुक्त के पद पर उन्हें बैठा दिया गया है जिनका मूल पद दो स्तर नीचे हैं। ये अधिकारी मूलत: जनपद सीईओ स्तर के अधिकारी हैं। पद खाली होने के बाद उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था की आड़ में उपायुक्त बना दिया गया है। भोपाल संभागीय कार्यालय में संयुक्त आयुक्त विनोद यादव के अधीन वरिष्ठ उपायुक्त वृंदावन मीना और अशोक उइके करीब डेढ़ साल से काम कर चुके हैं। वहीं नर्मदापुरम संभागीय कार्यालय में वरिष्ठ उपायुक्त दिवाकर पटेल से संयुक्त आयुक्त के मूल पद पर बैठे नवल मीना के नीचे काम कराया जा रहा है।



आईएएस-एसएएस की एंट्री से गड़बड़

मध्य प्रदेश में ग्रामीण विकास विभाग के संभागीय कार्यालयों में संभागीय विकास आयुक्त के साथ ही जिला पंचायत सीईओ स्तर के 13 पदों पर पदस्थापना की जाती थी। पिछले सालों में इस व्यवस्था को बदला गया और अब इन संभागीय पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अथवा राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अधिकारियों को पोस्टिंग दी जा रही है। इस वजह से सीनियरटी हासिल करने वाले विभागीय अधिकारियों के लिए केवल 10 संभागीय आयुक्त के पद ही बचे हैं।



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टकराव बिगाड़ रहा विभाग की व्यवस्था

ग्रामीण विकास विभाग में सीनियरिटी की अनदेखी से विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। वरिष्ठता के साथ पात्रता रखने वाले अधिकारी भी इन विवादों को खत्म करने के लिए नियमानुसार पदस्थापना की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है वरिष्ठ अधिकारी को जूनियर का मातहत बनाना विभागीय मैन्युअल का भी उल्लंघन है। अफसरों में तकरार और मनमुटाव होने से कामकाज पर भी इसका बुरा असर दिख रहा है। इसके सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत है।



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