मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी तेज, सरकार ने बनाई हाई लेवल कमेटी

Ramanand Tiwari | Apr 27, 2026, 23:57 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई है। समिति विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर समीक्षा करेगी।

News In Short

समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए कमेटी बनाई गई।


समिति विवाह, तलाक, लिव-इन सहित अन्य कानूनों की समीक्षा करेगी।


महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर खास ध्यान दिया जाएगा।


समिति 60 दिनों में रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सौंपेगी।


UCC से कानूनी समानता और स्पष्टता की उम्मीद है।



News In Detail

मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जो विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन जैसे मुद्दों पर मौजूदा कानूनों की समीक्षा कर एक समान और व्यावहारिक कानूनी ढांचा तैयार करेगी।



क्या है पूरा मामला?

अभी राज्य में अलग-अलग धर्म और परंपराओं के आधार पर व्यक्तिगत और पारिवारिक कानून लागू हैं। इससे कई बार कानूनी जटिलताएं और असमानता की स्थिति बनती है। इन्हीं चुनौतियों को खत्म करने के लिए सरकार एक समान कानून लाने की तैयारी में है।



कौन-कौन हैं कमेटी में?

सरकार ने इस काम के लिए अनुभवी लोगों की टीम बनाई है-



  • न्यायमूर्ति रंजना प्रसाद देसाई (सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज)- अध्यक्ष
  • शत्रुघ्न सिंह (सेवानिवृत्त IAS)- सदस्य
  • अनूप नायर (कानूनविद)- सदस्य
  • गोपाल शर्मा (शिक्षाविद)- सदस्य
  • बुधपाल सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता)- सदस्य
  • अजय कटेसरिया (अपर सचिव)- सचिव

कमेटी क्या-क्या करेगी?

समिति को कई अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं-



  • विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े कानूनों का अध्ययन।
  • उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों के मॉडल का विश्लेषण।
  • समाज, संस्कृति और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए संतुलित कानून का मसौदा तैयार करना।
  • आम जनता, धार्मिक संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव लेना।
  • जरूरत पड़ने पर जनसुनवाई आयोजित करना।
  • महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा पर खास फोकस।
  • लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और अधिकारों पर सुझाव देना।

क्या होगा आगे?

समिति को 60 दिनों के भीतर एक Draft Bill और विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। इसके आधार पर आगे कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।



क्यों है यह कदम अहम?

अगर समान नागरिक संहिता लागू होती है, तो सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा। इससे कानूनी स्पष्टता बढ़ेगी और महिलाओं व बच्चों के अधिकारों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।



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