Gen-Z और Gen-Alpha के स्कूल ठीक करो अभियान का असर, बजट बचाकर स्कूलों की सूरत बदलेगी सरकार

Aman Vaishnav | Aug 27, 2026, 15:09 IST
स्कूल ठीक करो अभियान का असर
जेन जी के स्कूल ठीक करो अभियान का असर अब मध्य प्रदेश सरकार पर भी दिखने लगा है। सरकार सरकारी स्कूलों की खराब हालत सुधारने पर ज्यादा ध्यान देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सांदीपनि स्कूलों की संख्या करीब 25 फीसदी तक कम करने पर विचार किया जा रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में जेन जी और जेन अल्फा छात्रों के प्रदर्शन का असर अब सरकार पर दिख रहा है।
  • सरकार सांदीपनि स्कूलों की संख्या करीब 25 फीसदी तक घटाने पर विचार कर रही है।
  • एक सांदीपनि स्कूल पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च होता है।
  • इससे बचने वाला बजट बाकी सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने में लगेगा।
  • इस प्रस्ताव पर लगभग सहमति बन चुकी है और जल्द इसे लागू किया जा सकता है।

पिछले कुछ हफ्तों में मध्य प्रदेश के स्कूलों को लेकर लगातार गुस्सा सामने आया है। छात्रों ने बस किराए से लेकर स्कूल बंद करने तक हर मुद्दे पर आवाज उठाई। अब इसी दबाव के बीच सरकार का यह नया प्रस्ताव सामने आया है।



सांदीपनि स्कूलों में कटौती की योजना क्या है

सरकार का मानना है कि हर सांदीपनि स्कूल पर भारी खर्च होता है। एक स्कूल बनाने में करीब 40 करोड़ रुपए लग जाते हैं। इतनी बड़ी रकम में कई सामान्य सरकारी स्कूल सुधारे जा सकते हैं।



इसलिए सरकार अब सांदीपनि स्कूलों की संख्या घटाने की तैयारी में है। तय योजना के मुताबिक इनकी संख्या में करीब 25 फीसदी तक कमी हो सकती है।



इस कदम से बचने वाला बजट दूसरी जगह इस्तेमाल होगा। सरकार इसे जर्जर स्कूलों की मरम्मत में लगाएगी। साथ ही जरूरी सुविधाएं बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रस्ताव पर सरकार के भीतर लगभग सहमति बन चुकी है।



जेन जी और जेन अल्फा के आंदोलन ने बदली तस्वीर

बता दें कि यह फैसला अचानक नहीं आया है। बीते कुछ हफ्तों में मध्य प्रदेश में स्कूलों को लेकर कई प्रदर्शन (जेन जी प्रोटेस्ट) हुए हैं। भोपाल के नीलम पार्क में स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने बड़ा कन्वेंशन किया था।



इसमें 36 जिलों से छात्र, शिक्षक और अभिभावक पहुंचे थे। सभी ने सरकारी स्कूल बंद न करने की मांग रखी थी।



इसी दौर में उज्जैन के सराफा स्कूल का मामला भी सामने आया था। छात्राओं के विरोध के बाद स्कूल की शिफ्टिंग टाल दी गई थी।



सीएम मोहन यादव के दखल के बाद यह फैसला हुआ। सीहोर के भेरूंदा में भी छात्राओं ने बस किराए को लेकर धरना दिया था। तेज बारिश में भी वे डटी रहीं।



पुराने आंदोलनों का असर पहले भी दिखा

अशोकनगर, गुना, देवास और इंदौर में भी छात्रों ने स्कूल बंद होने से बचाया था। विदिशा के सिरोंज में भी बस किराए को लेकर विरोध हुआ था।



हर बार प्रशासन को छात्रों की मांग के आगे झुकना पड़ा। इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि छात्रों की आवाज अब अनसुनी नहीं की जा सकती।



बजट को लेकर लंबे समय से उठ रहे थे सवाल

कन्वेंशन में बताया गया था कि देशभर में बीते दस साल में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए। इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 हजार स्कूल अकेले मध्य प्रदेश में बंद हुए।



इस वजह से लाखों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई। वक्ताओं ने यह भी कहा था कि सरकारी स्कूलों के बजट में लगातार कटौती हो रही है। इसी वजह से कई स्कूलों की सालों से मरम्मत नहीं हुई।



अब सरकार का नया प्रस्ताव इसी शिकायत का जवाब माना जा रहा है। सांदीपनि स्कूलों पर खर्च कम करके सामान्य स्कूलों को मजबूत करने की कोशिश होगी।



आगे क्या हो सकता है

सरकार का फोकस अब स्कूलों में जरूरी सुविधाएं बढ़ाने पर रहेगा। जर्जर इमारतों की मरम्मत को प्राथमिकता दी जा सकती है।



प्रस्ताव जल्द लागू होने की उम्मीद है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि किन जिलों के सांदीपनि स्कूलों में कटौती होगी। छात्र संगठन इस फैसले पर आगे भी नजर बनाए रखेंगे।



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