MP में 35 हजार रसोइयों का 14 करोड़ रुपए रोका, चूल्हे नहीं जले

Aman Vaishnav | Mar 29, 2026, 09:57 IST
mp school cooks payment blocked 14 crore
मध्यप्रदेश में स्कूली बच्चों का खाना बनाने वाले 35 हजार रसोइयों का 14 करोड़ रुपए का मासिक मानदेय जिलों ने रोक दिया है। शिवपुरी, बैतूल और रतलाम सबसे ज्यादा बकाया वाले जिलों में शामिल हैं।

News In Short

  • मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में 35 हजार रसोइए बच्चों को खाना बनाते हैं।
  • इन रसोइयों का 14 करोड़ रुपए का मासिक मानदेय जिलों ने रोक दिया है।
  • शिवपुरी, बैतूल और रतलाम जैसे 10 जिलों में सबसे ज्यादा भुगतान अटका है।
  • विदिशा, जबलपुर और उमरिया ने 100 फीसदी भुगतान कर दिया है।
  • रसोइए मानदेय बढ़ाने और समय पर भुगतान की मांग कर रहे हैं।

News In Detail

चूल्हा जला, पर जेब खाली रही

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में हर सुबह हजारों रसोइए बच्चों के लिए खाना बनाते हैं। वे सुबह जल्दी आते हैं, खाना पकाते हैं, बच्चों को परोसते हैं और फिर सफाई करते हैं। यह काम पार्ट-टाइम लगता है, लेकिन असल में पूरा दिन निकल जाता है। इस सब के बदले में उन्हें जो थोड़ा बहुत मानदेय मिलना चाहिए था वह भी नहीं मिला है।



प्रदेश में 35 हजार रसोइयों का 14 करोड़ रुपए का मानदेय जिलों ने रोक दिया है। यह राशि फरवरी 2026 तक की बकाया है।



किन जिलों ने सबसे ज्यादा रोका पैसा

शिवपुरी जिले में सबसे ज्यादा पांच हजार 962 रसोइए हैं और वहां दो करोड़ 38 लाख रुपए से ज्यादा रोके गए हैं। बैतूल में चार हजार 44 रसोइयों का एक करोड़ 60 लाख रुपए अटका है। रतलाम में तीन हजार 947 रसोइयों का करीब एक करोड़ 57 लाख रुपए बकाया है।



भिंड में तीन हजार 438 रसोइयों का एक करोड़ 37 लाख, देवास में तीन हजार 171 रसोइयों का एक करोड़ 26 लाख रुपए रोका गया है। वहीं छिंदवाड़ा में भी तीन हजार 373 रसोइयों का एक करोड़ 34 लाख रुपए रोका गया है। सीधी, टीकमगढ़, रीवा और सतना भी इस सूची में शामिल हैं।



इन जिलों ने किया पूरा भुगतान

जहां एक तरफ कई जिलों ने पैसा रोका वहीं कुछ जिले अपनी जिम्मेदारी में आगे रहे। विदिशा, जबलपुर और उमरिया ने 100 फीसदी भुगतान किया है। नीमच और मंडला ने 99.94 फीसदी, हरदा और मंदसौर ने 99.93 फीसदी, नरसिंहपुर ने 99.93 फीसदी और ग्वालियर ने 99.92 फीसदी भुगतान पूरा किया।



अफसरों की अनदेखी बनी वजह

रसोइयों का कहना है कि भुगतान से जुड़ी फाइलें करोड़ों रुपए की होती हैं। अफसर इन पर ध्यान नहीं देते। फाइलें दबी रह जाती हैं और रसोइए महीनों इंतजार करते रहते हैं।



जिलों को यह भुगतान हर महीने करना होता है लेकिन कई जिले इसमें लापरवाही बरत रहे हैं। यह लापरवाही सीधे उन परिवारों पर असर डालती है जो इस मानदेय पर निर्भर हैं।



मानदेय बढ़ाने की भी मांग

रसोइयों ने सिर्फ समय पर भुगतान ही नहीं बल्कि मानदेय बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि काम पूरे दिन का है लेकिन पैसे बेहद कम मिलते हैं। श्रम नियमों के हिसाब से इसे बढ़ाया जाना चाहिए। यह मुद्दा सिर्फ पैसों का नहीं है। यह उन लोगों के सम्मान का भी सवाल है जो हर रोज लाखों बच्चों का पेट भरते हैं।



FAQ

  1. मध्यप्रदेश में स्कूल रसोइयों का मानदेय कौन देता है?
    स्कूल रसोइयों को मानदेय देने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। राज्य सरकार फंड जारी करती है और जिले इसे रसोइयों तक पहुंचाते हैं। लेकिन कई जिले इस प्रक्रिया में देरी करते हैं, जिससे रसोइयों को महीनों इंतजार करना पड़ता है।
  2. किस जिले ने सबसे ज्यादा रसोइयों का पैसा रोका है?
    शिवपुरी जिले ने सबसे ज्यादा 5962 रसोइयों का 2 करोड़ 38 लाख रुपए से ज्यादा रोका है। इसके बाद बैतूल और रतलाम का नंबर आता है। ये तीनों जिले भुगतान रोकने वाले टॉप 3 जिलों में शामिल हैं।
  3. क्या किसी जिले ने 100 फीसदी भुगतान किया है?
    हां, विदिशा, जबलपुर और उमरिया ने 100 फीसदी भुगतान किया है। नीमच, मंडला, हरदा, मंदसौर, नरसिंहपुर, ग्वालियर और सीहोर भी 99.90 फीसदी से ज्यादा भुगतान कर चुके हैं। ये जिले बाकी जिलों के लिए उदाहरण बने हैं।

ये खबरें भी पढ़िए...



सड़क हादसों के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा, दलाल ले रहे फर्जी क्लेम से मुआवजा



1 अप्रैल से बढ़ेगा टोल किराया, भोपाल सहित इन रूट्स पर पड़ेगा असर



एमपी न्यूज: मध्य प्रदेश में जूनियरों के अधीन सीनियर अफसरों की पोस्टिंग



मध्यप्रदेश न्यूज: डॉ. अमरनाथ मित्तल की करोड़ों की प्रॉपर्टी की कुर्की के बाद ईडी का एक्शन



Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • एमपी न्यूज
  • मध्यप्रदेश न्यूज
  • बैतूल
  • शिवपुरी
  • मानदेय
  • सरकारी स्कूल