कंप्यूटर खरीदी घोटाला : डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता और स्कूल शिक्षा सचिव संजय गोयल का हटना तय
News in Short :
- डायरेक्टर की बदली के बाद डीपीआई कमिश्नर भी कार्रवाई की जद में।
- 3500 उपकरणों की खरीदी में 40 से 90 करोड़ रुपए तक बढ़ी लागत।
- टेंडर की शर्तों में बदलाव और बाजार से ज्यादा कीमत पर हुई खरीदी।
- स्कूल मरम्मत में फर्जी बिलों के जरिए की गई करोड़ों की गड़बड़ी।
- डीपीआई जांच कमेटी में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर सवाल।
INTRO
BHOPAL. स्कूल शिक्षा विभाग में कंप्यूटर खरीदी घोटाले की आंच अब विभागीय अफसरों तक पहुंच गई है। टेंडरों में गड़बड़ी के मामलों पर सरकार की नाराजगी के बाद डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता कार्रवाई की जद में आ सकती हैं। घोटालों की गूंज सीएम डॉ. मोहन यादव तक पहुंचने के बाद डीपीआई कमिश्नर के साथ ही स्कूल शिक्षा सचिव आईएएस संजय गोयल पर भी कार्रवाई तय है। जल्द ही दोनों को उनके पदों से हटाया जा सकता है। सरकार की नाराजगी के बाद डीपीआई से पहले ही अधिकारियों को हटाने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
News in Detail :
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा बीते तीन सालों में 3500 कंप्यूटर , यूपीएस एवं दूसरे उपकरणों की खरीदी की गई है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरूआत से ही विवादों में उलझ गई थी। टेंडर की शर्तों को पसंदीदा कंपनियों के लिए बदलने और कई गुना ज्यादा कीमत पर खरीदी की शिकायतें डीपीआई और सरकार तक पहुंची थीं।
स्कूल शिक्षा विभाग में घोटालों की शिकायतें लगातार मुख्यमंत्री तक पहुंच रही हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह पहले ही इन गड़बड़ियों पर नाराजगी जता चुके हैं। उनकी नाराजगी के बावजूद शिकायतों पर एक्शन न लेना स्कूल शिक्षा विभाग सचिव संजय गोयल और डीपीआई कमिश्नर पर भारी पड़ गया है।
दोगुना से ज्यादा हुई टेंडर की लागत
डीपीआई द्वारा 3500 कंप्यूटर, यूपीएस, प्रिंटर और दूसरे उपकरण खरीदी के लिए करीब 40 करोड़ रुपए के टेंडर जारी किए गए थे। हांलाकि चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाने और मुनाफा कमाने के लिए बाजार भाव से कई गुना ऊंची कीमत पर खरीदी की गई। इस वजह से टेंडर की लागत 40 से बढ़कर 90 करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी।
अत्यधिक ऊंची कीमत पर कंप्यूटर और दूसरे उपकरणों की खरीदी और टेंडर की शर्तों में मनमाने बदलाव पर प्रतिद्वंद्वी फर्मों ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी। शिकायतों के बावजूद अधिकारी उसे अनदेखा करते रहे।
स्कूलों की मरम्मत में करोड़ों की हेराफेरी
कंप्यूटर घोटाले की शिकायतें डीपीआई और स्कूल शिक्षा विभाग में ही दबकर रह गईं। इस बीच स्कूलों की मरम्मत में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी सामने आ गई। रीवा, सतना और मैहर जिलों के स्कूलों में मरम्मत और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान फर्जी बिलों के जरिए कर दिया गया।
साल 2024- 25 में स्कूलों की मरम्मत के लिए 149 करोड़ रुपए जारी किए गए थे। डीपीआई और स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह काम भोपाल के एक फर्म को सौंप दिया। भारी भरकम राशि के काम के लिए टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को भी अनदेखा किया गया।
सवालों के घेरे में उलझी जांच कमेटी
डीपीआई कमिश्नर आईएएस शिल्पा गुप्ता द्वारा मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय दल का गठन कर दिया। इस टीम में संयुक्त संचालक धर्मेंद्र शर्मा, उप संचालक (वित्त) अमित श्रीवास्तव, सहायक संचालक (वित्त) प्रकाशचंद्र सूर्यवंशी, सहायक यंत्री जिला शिक्ष केंद्र नरेश कुमार भतकरिया और सब इंजीनियर (सांदीपनि प्रकोष्ठ) सूर्यकांत मेहरा को रखा गया। जबकि टीम में शामिल ज्यादातर अधिकारी स्वयं ही शिकायतों के दायरे में हैं।
सांदीपनी प्रकोष्ठ सब इंजीनियर नरेश कुमार भतकरिया को भोपाल कलेक्टर सेवा से बाहर कर चुके हैं। हांलाकि संभागायुक्त द्वारा उन्हें सेवा में वापस लिया गया है। सब इंजीनियर सूर्यकांत मेहरा पर होशंगाबाद और राज्य शिक्षा केंद्र में पदस्थापना के दौरान गंभीर आरोप लग चुके हैं। अमित श्रीवास्तव और प्रकाशचंद्र सूर्यवंशी की पदस्थापना ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश मौर्य के अधीन होने से उनकी भूमिका भी संदेहास्पद है। क्योंकि स्कूल मरम्मत गड़बड़झाले में मौर्य पर भी आरोप लगे हैं।
डीपीआई से अफसरों की छुट्टी शुरू
कंप्यूटर खरीदी घोटालाऔर स्कूलों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों के घपले की आंच में लोक शिक्षण संचालनालय पूरी तरह घिरा हुआ है। स्कूल शिक्षा मंत्री के आदेश के बाद तीन अधिकारियों की पदस्थापना बदल दी गई है। डीपीआई संचालक डीएस कुशवाह को राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान भेजा गया है। संचालक कुशवाह के नाम पर भी इन गड़बड़ियों पर सवाल उठते रहे हैं। उनकी जगह राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान से प्रमोद कुमार सिंह को डीपीआई संचालक बनाया गया है। वहीं उप संचालक पीके सिंह बघेल को भी डीपीआई से हटाकर राज्य शिक्षा केंद्र में पदस्थ किया गया है। आने वाले दिनों में डीपीआई कमिश्नर (डीपीआई आयुक्त शिल्पा गुप्ता) सहित कई अधिकारियों की पदस्थापना भी बदलना तय माना जा रहा है।
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