एमपी के स्कूल शिक्षा विभाग में मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों का घोटाला, अब कलेक्टर करेंगे जांच

Aman Vaishnav | Mar 27, 2026, 13:02 IST
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मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर खरीद और मेंटेनेंस में बड़ी धांधली सामने आई है। शिक्षा मंत्री की नाराजगी के बाद अब प्रदेश के सभी कलेक्टरों को जांच के आदेश दिए गए हैं।

मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में कंप्यूटर खरीद और मेंटेनेंस के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले को लेकर विभागीय मंत्री ने नाराजगी जताई है। इसके बाद लोक शिक्षण संचनालय की कमिश्नर शिल्पा गुप्ता ने सभी जिलों के कलेक्टर को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने लिखा कि वे पिछले तीन साल में हुए सभी कामों की जांच करके रिपोर्ट भेजें।



इसमें तीन साल के दौरान जितना भी बजट आवंटित किया गया है और जो निर्माण कार्य हुए हैं उनकी पूरी जांच होनी चाहिए।



हालांकि इसमें इंटरएक्टिव पैनल का मामला नहीं शामिल किया गया है। जबकि इसको लेकर विभागीय मंत्री और अफसरों को पहले ही कई शिकायतें मिल चुकी हैं।



जांच की समय सीमा अभी तय नहीं

फिलहाल जांच के लिए अभी तक कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। जिलों में कलेक्टरों ने इस पत्र के बाद जांच कमेटी बनानी शुरू कर दी है। ये कमेटी कलेक्टरों की निगरानी में ही पूरे मामले की जांच करेगी।



अफसरों को हटाने की कार्रवाई

इस मामले में मंत्री उदय प्रताप सिंह के निर्देश के बाद तीन अफसरों को हटाने की कार्रवाई कर दी गई है । इनमें लोक शिक्षण के संचालक डीएस कुशवाह को राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान (सीमेट) का संचालक बनाकर भेजा गया है।



वहीं प्रमोद कुमार सिंह को सीमेट का संचालक बनाकर लोक शिक्षण विभाग भेजा गया है। इसके साथ ही उन्हें विभाग में उप सचिव भी बनाया गया है। इसके अलावा पीके सिंह बघेल (जो पहले उप संचालक लोक शिक्षण थे) को राज्य शिक्षा केंद्र में पदस्थ किया गया है।



149 करोड़ का मेंटेनेंस घोटाला!

मध्यप्रदेश में पिछले तीन सालों में स्कूलों में मेंटनेंस का काम हुआ है। पिछले साल ही करीब 149 करोड़ रुपए स्कूलों के मेंटेनेंस के लिए भेजे गए थे। इस काम का ठेका भोपाल की ही एक फर्म को दे दिया गया था। इस प्रक्रिया में जिला शिक्षा अधिकारी को नजरअंदाज कर बीईओ और प्राचार्य स्तर पर काम कराया गया।



रीवा, मैहर और सतना जिले में बिना काम के ही भुगतान किए जाने का मामला सामने आया था। यहां जांच में आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद यह मामला विधानसभा में उठाया गया था। फिर मंत्री ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे।



जिस पर आरोप उसी से पूछताछ नहीं

विभागीय मंत्री ने आईएएस अफसर की निगरानी में एक कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे। फिलहाल यह मामला होल्ड पर है। इस पूरी घटना में एक हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। इस मामले में वित्तीय स्वीकृति देने वाले लोक शिक्षण संचालनालय के वित्त अधिकारी राजेश मोर्य और उन फर्मों से अब तक कोई सवाल-जवाब नहीं हुआ है।



इन पर ही बिना काम किए भुगतान लेने का आरोप है। विभागीय अफसरों का कहना है कि कलेक्टर की रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में कुछ आगे बढ़ेगा।



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