मध्यप्रदेश स्क्रैप पॉलिसी: भोपाल में 3 हजार सरकारी कंडम वाहन लंबित, पांच साल बाद भी व्यवस्था की सुस्त रफ्तार

Ramanand Tiwari | Nov 02, 2026, 23:33 IST
मध्यप्रदेश स्क्रैप पॉलिसी सवालों में, भोपाल में 3 हजार सरकारी कंडम वाहन लंबित
MP scrap policy under question, 3k govt condemned vehicles pending in Bhopal
मध्यप्रदेश की स्क्रैप पॉलिसी पांच वर्ष बाद सरकारी विभागों की सुस्त कार्रवाई से सवालों में है। भोपाल में विभागों के करीब तीन हजार कंडम वाहन स्क्रैप होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, इस वर्ष 25 अक्टूबर तक राजधानी में केवल 636 चारपहिया वाहन ही स्क्रैप हुए। नीति के अमल में यह अंतर सरकारी जवाबदेही और निगरानी की गंभीर जरूरत दिखाता है।

सरकारी विभागों में ही अटकी पुरानी गाड़ियों की विदाई

स्क्रैप नीति में सबसे पहले सरकारी विभागों के पंद्रह वर्ष पुराने वाहन हटाने पर जोर था। निजी वाहनों के लिए स्क्रैपिंग स्वैच्छिक है, जबकि सरकारी वाहनों पर अलग अनिवार्य नियम लागू हैं। परिवहन विभाग ने विभागों को पत्र भेजे, लेकिन कई वाहनों का निस्तारण अब भी बाकी है। भोपाल के सरकारी विभागों में करीब तीन हजार कंडम वाहन होने की जानकारी सामने आई है। इन वाहनों की विभागवार स्क्रैपिंग का पूरा विवरण उपलब्ध आंकड़ों से स्पष्ट नहीं होता है।



विधानसभा में भी सामने आया अधूरा काम

फरवरी 2026 में भोपाल पुलिस के वाहनों पर विधानसभा में सरकार से जवाब मांगा गया था। सरकार ने जवाब में 610 वाहन स्क्रैप होने और शेष प्रक्रिया जारी रहने की जानकारी दी। यह जवाब सरकारी बेड़े की पुरानी गाड़ियों के निस्तारण में प्रक्रियागत चुनौतियों को भी दिखाता है। हालांकि, इन 610 वाहनों को भोपाल के तीन हजार वाहनों से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।



राजधानी में लाखों पुराने वाहन, स्क्रैपिंग सीमित

उपलब्ध विवरण अनुसार भोपाल में पंद्रह वर्ष से पुराने वाहनों की संख्या तीन लाख पार है। इसी वर्ष 25 अक्टूबर तक भोपाल में केवल 636 चारपहिया वाहन स्क्रैप होने की सूचना है। पुराने वाहनों की कुल संख्या में सभी श्रेणियां हैं, जबकि 636 केवल चारपहिया वाहन हैं। पिछले वर्ष त्योहारी सीजन में महज 123 चारपहिया वाहन अधिकृत स्क्रैप सेंटर तक पहुंचे थे।



दोनों आंकड़ों की अवधि अलग है, इसलिए इनके आधार पर सीधी वार्षिक तुलना सही नहीं होगी।



सेंटर उपलब्ध, मगर सरकारी प्रक्रिया बनी बाधा

भोपाल में दो पंजीकृत स्क्रैप केंद्र हैं, फिर भी सरकारी गाड़ियां निस्तारण प्रक्रिया में अटकी हैं। प्रदेश के दूसरे शहरों में भी स्क्रैप सेंटर हैं, लेकिन सरकारी मंजूरी की प्रक्रियाएं बाकी हैं। सरकारी विभागों के पंद्रह वर्ष पुराने वाहनों का पंजीकरण नवीनीकरण भी केंद्रीय नियमों में प्रतिबंधित है। इससे सरकारी बेड़े की पहचान और समयबद्ध निस्तारण की जरूरत अब अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।



नई गाड़ी पर छूट, पुरानी टैक्स माफी खत्म

स्क्रैप सेंटर का Certificate of Deposit नई गाड़ी की खरीद पर कर रियायत दिला सकता है। चुनिंदा पुरानी उत्सर्जन श्रेणियों के वाहनों पर अधिकतम पचास प्रतिशत मोटरयान कर छूट का प्रावधान है। लेकिन बकाया टैक्स पर नब्बे प्रतिशत की पुरानी छूट की अवधि मार्च 2026 में समाप्त हुई। इसलिए वाहन मालिकों को वर्तमान लाभ और पात्रता की पुष्टि संबंधित परिवहन कार्यालय से करनी चाहिए।



अब निगरानी और जागरूकता दोनों की परीक्षा

भोपाल आरटीओ जीतेन्द्र शर्मा के अनुसार, लोग कार्यालय में स्क्रैप नीति की जानकारी लेने पहुंचते हैं। पूर्व परिवहन उपायुक्त अजय गुप्ता लोगों की सोच बदलने और जागरूकता बढ़ाने को आवश्यक मानते हैं। लेकिन सिर्फ Awareness Campaign चलाने से सरकारी विभागों की लंबित गाड़ियों का निस्तारण अपनेआप नहीं होगा। इसके लिए विभागवार Vehicle Scrapping प्रगति सार्वजनिक करना जवाबदेही बढ़ाने का उपयोगी कदम हो सकता है। पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को हटाने से प्रदूषण नियंत्रण तथा सड़क सुरक्षा की कोशिशें मजबूत होंगी। फिलहाल भोपाल के आंकड़े सरकार से नीति के वास्तविक अमल का स्पष्ट हिसाब मांग रहे हैं।



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