एमपी के सरकारी कॉलेजों में छात्रों को मिलेगी निवेश की ट्रेनिंग, ठगी से बचाने के लिए सेबी चलाएगा प्रोजेक्ट जागरूक
सरकारी कॉलेजों में चलेगा अभियान
सेबी मध्य प्रदेश के सभी सरकारी कॉलेजों में प्रोजेक्ट जागरूक चलाने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को निवेश की सही जानकारी देना है। साथ ही उन्हें वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के तरीके भी सिखाए जाएंगे। छात्रों को बताया जाएगा कि शेयर बाजार कैसे काम करता है। निवेश करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। किसी योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी जांच कैसे करनी चाहिए। इसके अलावा निवेश से जुड़े जोखिम भी समझाए जाएंगे।
ज्यादा मुनाफे का लालच देने वाली योजनाओं से करेंगे सावधान
अभियान में फर्जी निवेश योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। छात्रों को बताया जाएगा कि ठग किस तरह लोगों को निशाना बनाते हैं। कई बार कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता है। ऐसे ऑफर के जरिए लोगों से पैसा निवेश कराया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को संदिग्ध योजनाओं की पहचान करना सिखाया जाएगा। उन्हें साइबर ठगी से बचने के तरीके भी बताए जाएंगे। इसका मकसद है कि युवा निवेश से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें।
सेबी अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को भेजा पत्र
सेबी (SEBI) अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने इस अभियान को लेकर पत्र भेजा है। यह पत्र मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल (Ashok Barnwal) को भेजा गया है। पत्र में प्रोजेक्ट जागरूक की रूपरेखा और इसके संचालन का प्रस्ताव दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने अभियान को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की तैयारी शुरू होगी। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन को भी पत्र भेजा गया है। अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी को भी प्रस्ताव की जानकारी दी गई है। संबंधित विभाग अभियान को लागू करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
पुलिस और सरकारी कर्मचारियों को भी ट्रेनिंग
प्रोजेक्ट जागरूक केवल कॉलेज के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा। सेबी ने पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया है। प्रशिक्षण में उन्हें वित्तीय धोखाधड़ी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी दी जाएगी। इसके जरिए वे खुद भी संदिग्ध निवेश योजनाओं से सावधान रह सकेंगे। जरूरत पड़ने पर आम लोगों को भी इनके बारे में जागरूक कर सकेंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी कर्मचारियों को भी शामिल करने की तैयारी है। इन कर्मचारियों के जरिए वित्तीय जागरूकता आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास होगा।
विश्वविद्यालय और पंचायत विभाग भी जुड़ेंगे
अभियान में कई सरकारी विभागों की भागीदारी प्रस्तावित है। इनमें उच्च शिक्षा और कौशल विकास विभाग शामिल हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की भी इसमें भूमिका रहेगी। पुलिस और पंचायती राज विभाग को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। विश्वविद्यालयों की भागीदारी भी सुनिश्चित करने की तैयारी है। अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने में सहयोग करेंगे। इससे कॉलेजों के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ाने का प्रयास होगा।
हर विभाग में नोडल अधिकारी होंगे
प्रोजेक्ट जागरूक को लागू करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। ये अधिकारी अपने विभाग में अभियान से जुड़ी तैयारियां देखेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन में भी उनकी भूमिका रहेगी। अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं अधिकारियों की होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना है।
पोंजी स्कीम और साइबर ठगी की जानकारी मिलेगी
अभियान में पोंजी स्कीम से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाएगा। ऐसी योजनाओं में लोगों को ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता है। कई मामलों में नए निवेशकों के पैसों से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता है। छात्रों को ऐसी योजनाओं से जुड़े खतरे समझाए जाएंगे। साथ ही ऑनलाइन माध्यमों से होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण का जोर निवेश से पहले सही जानकारी जुटाने पर रहेगा। छात्रों को समझाया जाएगा कि केवल ज्यादा मुनाफे का वादा देखकर निवेश नहीं करना चाहिए।
ट्रेनिंग कब शुरू होगी?
उच्च शिक्षा विभाग से मंजूरी मिलने के बाद अब कार्ययोजना तैयार की जाएगी। संबंधित विभाग आपसी समन्वय से प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कॉलेजों में ट्रेनिंग कब शुरू होगी। किस कॉलेज में किस तारीख को प्रशिक्षण होगा इसकी जानकारी भी नहीं आई है। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और विभागीय तैयारियों के बाद कार्यक्रम तय किए जाएंगे। इसके बाद प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में प्रोजेक्ट जागरूक को लागू किया जा सकेगा।