शादी का झांसा देकर ACS के PA ने युवती से बनाए संबंध, पुलिस बाहर ढूंढती रही, वो मंत्रालय में करता रहा काम

Aman Vaishnav | Nov 03, 2026, 09:14 IST
अपर मुख्य सचिव के पीए दीपक अहिरवार पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप लगा है, जिसे जिला अदालत से झटका मिलने के बाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली।
MP Secretariat PA Deepak Ahirwar Case False Promise of Marriage and High Court Anticipatory Bail Updates
मध्य प्रदेश के मंत्रालय (सचिवालय) से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पदस्थ एक अपर मुख्य सचिव यानी एसीएस के पीए दीपक अहिरवार पर 27 साल की एक युवती ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का कहना है कि दीपक ने शादी का झूठा वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में मुकर गया।

इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात पुलिस की जांच को लेकर सामने आई है। राजधानी भोपाल की टीटी नगर थाना पुलिस फाइलों में आरोपी की तलाश करती रही, उधर आरोपी आराम से अपनी छुट्टी पूरी करके 6 अक्टूबर को सीधे सचिवालय पहुंचकर अपनी ड्यूटी करने लगा।



सोशल मीडिया से दोस्ती और फिर शादी का झांसा

जानकारी के अनुसार पीड़ित युवती की उम्र 27 साल है। उसने पुलिस को बताया कि साल 2023 में सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान दीपक अहिरवार से हुई थी। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और जान-पहचान दोस्ती में बदल गई। लगभग छह महीने बीतने के बाद आरोपी दीपक ने युवती के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया।



युवती का आरोप है कि अगस्त 2024 में दीपक उसे अपने सरकारी आवास पर लेकर गया। वहां उसने शादी का पक्का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। इसके कुछ समय बाद जब शादी की बात आगे बढ़ी, तो आरोपी अपने वादे से साफ मुकर गया और शादी करने से मना कर दिया।



पुलिस केस और जिला अदालत से झटका

लगातार धोखे का शिकार होने के बाद पीड़िता ने कानून का सहारा लिया। टीटी नगर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए 19 अगस्त 2026 को आरोपी दीपक अहिरवार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।



केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी से बचने के लिए दीपक अहिरवार ने भोपाल की विशेष अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई। हालांकि जिला अदालत ने 1 सितंबर 2026 को उसकी यह याचिका पूरी तरह खारिज कर दी। अदालत का कहना था कि मामला शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का है जो कि गंभीर है।



हाईकोर्ट से कैसे मिली आरोपी को राहत?

भोपाल की विशेष अदालत से अर्जी खारिज होने के बाद आरोपी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई।



जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने 12 अक्टूबर को आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ कहा कि अगर पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करती है, तो उसे 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की जमानत पर तुरंत रिहा कर दिया जाए। इसके साथ ही अदालत ने यह सख्त शर्त भी रखी है कि आरोपी को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करना होगा। उसने सहयोग नहीं किया तो उसकी जमानत रद्द कर दी जाएगी।



यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर सीधे तौर पर आम जनता के भरोसे और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ी है। जब राजधानी की पुलिस किसी आरोपी को फाइलों में तलाशती रहे और वही आरोपी बेखौफ होकर राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक केंद्र यानी सचिवालय में बैठकर ड्यूटी करता रहे, तो पुलिस की जांच व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।



यह मामला बताता है कि सोशल मीडिया पर बनी पहचान कैसे धोखे और बड़े कानूनी विवाद की वजह बन सकती है। साथ ही इससे आम लोगों को यह भी समझने का मौका मिलता है कि शादी का झूठा वादा करने जैसे मामलों में धारा 69 क्या कहती है। जिला अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक जमानत पाने के लिए कानूनी अधिकार कैसे काम करते हैं, यह भी इस मामले से समझा जा सकता है।



Tags:
  • टीटी नगर थाना पुलिस
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
  • Madhya Pradesh High Court
  • सोशल मीडिया
  • शादी का झांसा देकर संबंध बनाए