मध्य प्रदेश SEIAA में बड़ा विवाद: अध्यक्ष ने सदस्य सचिव पर लगाए गंभीर आरोप, मुख्य सचिव से की हटाने की मांग
इस पत्र में हर्षल पंचोली को तुरंत पद से हटाने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
SEIAA अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
मध्यप्रदेश में पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी देने वाले प्राधिकरण (SEIAA) के कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं। सिया के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने 20 अक्टूबर को मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने सदस्य सचिव हर्षल पंचोली के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
अध्यक्ष का आरोप है कि बैठकों का एजेंडा तैयार करने में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। पुराने लंबित मामलों को एजेंडे में शामिल करने में भी लापरवाही बरती जा रही है। पर्यावरण मंजूरी से जुड़े पत्र जारी करने में भी नियमों की अनदेखी हो रही है।
अध्यक्ष का कहना है कि इन गड़बड़ियों से प्राधिकरण का कामकाज प्रभावित हो सकता है। इसका असर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े फैसलों पर भी पड़ सकता है।
500 मामले लंबित, एजेंडे पर उठाए सवाल
पत्र के मुताबिक, मध्यप्रदेश SEIAA में करीब 500 मामले लंबित हैं। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण की 974वीं और 975वीं बैठकों का एजेंडा तैयार करने में नियमों का पालन नहीं हुआ। पुराने मामलों को पहले रखने के बजाय बाद में आए आवेदनों को जगह दी गई। यानी कुछ पुराने मामले छोड़ दिए गए और नए मामलों को एजेंडे में शामिल कर लिया गया। अध्यक्ष ने पत्र के साथ ऐसे मामलों की सूची भी भेजी है, जिन्हें बैठकों के एजेंडे में शामिल किया जाना चाहिए था।
SEAC के मामलों को SEIAA के एजेंडे में रखने का आरोप
अध्यक्ष ने 974वीं बैठक के एजेंडे में शामिल चार प्रकरणों पर भी सवाल उठाए हैं। पत्र के अनुसार, ये मामले SEIAA के बजाय राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) में लंबित थे।
इसके बावजूद इन्हें SEIAA की बैठक के एजेंडे में शामिल करने का आरोप लगाया गया है। अध्यक्ष ने इसे पर्यावरण मंजूरी की निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत बताया है।
NGT के आदेश का भी दिया हवाला
पत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 3 फरवरी 2026 के आदेश का उल्लेख किया गया है।
अध्यक्ष के अनुसार, NGT ने पर्यावरण मंजूरी से जुड़े कुछ मामलों में SEIAA की विधिवत स्वीकृति आवश्यक बताई थी।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि संबंधित मामलों को प्राधिकरण के समक्ष विचार के लिए रखने के निर्देशों का पालन नहीं हुआ। हालांकि, NGT के आदेश के वास्तविक अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित आदेश और सरकारी रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच आवश्यक होगी।
पर्यावरण मंजूरी के पत्र जारी करने में देरी का आरोप
अध्यक्ष ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। उनके मुताबिक, SEIAA की ओर से पर्यावरण मंजूरी दिए जाने के बाद भी संबंधित मंजूरी पत्र समय पर जारी नहीं किए जा रहे हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि इस देरी के कारण आवेदकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
अध्यक्ष ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या सदस्य सचिव को प्राधिकरण के फैसलों को अपने स्तर पर रोकने या बदलने का अधिकार है? उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की आवश्यकता बताई है।
बैठकों की कार्यवाही अपलोड करने में 23 दिन तक देरी
अध्यक्ष ने SEIAA की बैठकों के कार्यवाही विवरण (MoM) को पर्यावरण पोर्टल पर अपलोड करने में देरी का भी आरोप लगाया है।
- 8 सितंबर 2026 को हुई 966वीं बैठक का कार्यवाही विवरण 1 अक्टूबर को अपलोड किया गया। इसमें 23 दिन लगे।
- 18 अगस्त 2026 को हुई 965वीं बैठक का कार्यवाही विवरण 5 सितंबर को अपलोड किया गया। इसमें 18 दिन लगे।
अध्यक्ष ने EIA अधिसूचना, 2006 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा है कि बैठक की कार्यवाही निर्धारित समय में सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का भी उल्लेख
अध्यक्ष के अनुसार, केंद्र सरकार के एक पत्र के माध्यम से कुछ पर्यावरण मंजूरी मामलों को SEIAA के समक्ष विचार के लिए रखने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद संबंधित सभी मामलों को एजेंडे में शामिल नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पत्र में कहा गया है कि इससे पर्यावरण संबंधी निर्णयों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अध्यक्ष ने लगाए सात प्रमुख आरोप
चार पन्नों के पत्र में सदस्य सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्य रूप से सात तरह की अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है:
- SEIAA की बैठकों का नियमित आयोजन न करना।
- लंबित मामलों को निर्धारित क्रम में एजेंडे में शामिल न करना।
- बैठकों की कार्यवाही समय पर पोर्टल पर अपलोड न करना।
- पर्यावरण मंजूरी पत्र जारी करने में देरी करना।
- प्राधिकरण के कर्मचारियों के कामकाज में बार-बार बदलाव करना।
- कुछ एजेंडे अध्यक्ष की अनुमति के बिना अपलोड करने का आरोप।
- पर्यावरण संबंधी नियमों और निर्देशों के पालन में कथित लापरवाही।
ये सभी आरोप अध्यक्ष के पत्र पर आधारित हैं। इन्हें किसी जांच एजेंसी द्वारा प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
केंद्र और राज्य सरकार को भी भेजी शिकायत
SEIAA अध्यक्ष ने अपने पत्र की प्रतियां केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और मध्य प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी हैं।
अध्यक्ष ने सदस्य सचिव हर्षल पंचोली को तत्काल पद से हटाने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
अब सरकार के फैसले पर नजर
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पर्यावरण मंजूरी देने वाले महत्वपूर्ण प्राधिकरण के भीतर उठे आरोपों पर राज्य सरकार क्या कदम उठाएगी।
क्या लंबित मामलों और मंजूरी पत्र जारी करने में देरी की जांच होगी? क्या बैठकों के एजेंडे और कार्यवाही विवरण की समीक्षा की जाएगी?