MP में 237 पर्यावरण मंजूरियों पर सवाल, SEIAA अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से की अफसरों के निलंबन और CBI जांच की मांग

Sumit Kumar | Oct 16, 2026, 23:07 IST
SEIAA अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पर्यावरण मंजूरियों में कथित अनियमितताओं की CBI जांच और संबंधित अधिकारियों के निलंबन की मांग की है।
मध्य प्रदेश में 237 पर्यावरण मंजूरियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। SEIAA अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने वरिष्ठ अधिकारियों पर नियमों की अनदेखी और प्राधिकरण का काम रोकने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर चार अधिकारियों के निलंबन, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।
MP SEIAA chairman Shivnarayan Singh Chauhan CBI probe into alleged irregularities environmental clearances and demanded suspension of officials concerned.

237 पर्यावरण मंजूरियों पर क्या है आरोप?

SEIAA अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने 16 अक्टूबर 2026 को मुख्य सचिव से शिकायत की। उनका आरोप है कि पर्यावरण विभाग में पदस्थ प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और सदस्य सचिव ने 237 ‘डीम्ड ईसी’ जारी कीं।



ईसी का मतलब पर्यावरणीय मंजूरी है। ‘डीम्ड ईसी’ को आसान भाषा में ऐसी मंजूरी समझ सकते हैं, जिसे स्वीकृत मान लिया गया हो। चौहान का दावा है कि कानून में इसका प्रावधान नहीं है। उनके मुताबिक, पर्यावरणीय मंजूरी जारी करने का अधिकार केवल भारत सरकार और SEIAA को है।



अनिरुद्ध मुखर्जी और हर्षल पंचोली की भूमिका पर सवाल

चौहान ने पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी और SEIAA के सदस्य सचिव हर्षल पंचोली पर प्राधिकरण के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में मुखर्जी को एप्को का महानिदेशक भी बताया गया है।



SEIAA अध्यक्ष का आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर पर्यावरण कानून और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया है। उन्होंने तत्कालीन सदस्य सचिव उमा महेश्वरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ये आरोप चौहान की ओर से लगाए गए हैं।





तीन महीने से पोर्टल बंद होने का दावा

चौहान के मुताबिक, उनके कक्ष का इंटरनेट बंद कर दिया गया है। प्राधिकरण का पोर्टल भी तीन महीने से बंद है। उनका आरोप है कि काम जानने वाले कर्मचारियों को हटाकर ऐसे कर्मचारियों को तैनात किया गया, जो संबंधित काम करने में सक्षम नहीं हैं।



उन्होंने दावा किया कि एक साल में 20 से ज्यादा बार स्टाफ बदला गया। साथ ही, निष्ठा और समर्पण से काम करने वाले कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने का आरोप लगाया।



निजी सहायक की तैनाती पर भी उठाए सवाल

चौहान ने अपने निजी सहायक के रूप में पुस्तकालय सहायक रजनीश की तैनाती पर सवाल उठाया है। उनके अनुसार, संबंधित कर्मचारी को टाइपिंग नहीं आती और उसने खुद यह बात स्वीकार की है।



उन्होंने भृत्य के रूप में तैनात कर्मचारी की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का भी उल्लेख करते हुए नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। इन दावों के समर्थन में शिकायत के साथ दस्तावेजों और वीडियो का हवाला दिया गया है।



कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने का आरोप

SEIAA अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की ओर से पदस्थ अश्विनी कुमार की सेवा समाप्त कराए जाने का आरोप भी लगाया है। चौहान का कहना है कि उन्हें हटाने के लिए अनिरुद्ध मुखर्जी ने केंद्र सरकार को पत्र भेजा और संबंधित सचिव को बार-बार फोन किया।



इसके अलावा कार्यालय सहायक पूनम झा को सेवा समाप्ति का नोटिस दिए जाने की बात भी कही गई है। चौहान ने इन कदमों को प्राधिकरण के काम में बाधा डालने से जोड़ा है।



बैठकें टालने और मंजूरी पत्र रोकने का आरोप

चौहान के मुताबिक, सदस्य सचिव की ओर से SEIAA की बैठकें नियमित रूप से नहीं कराई जातीं। बैठकों का समय बार-बार बदला जाता है और कार्यवाही का विवरण भी समय पर तैयार नहीं होता।



उनका आरोप है कि प्राधिकरण से पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद भी मंजूरी पत्र जारी नहीं किए जाते। उन्होंने इसे कामकाज में रुकावट की एक और वजह बताया है।



मुख्य सचिव से चार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

चौहान ने मुख्य सचिव से अनिरुद्ध मुखर्जी, हर्षल पंचोली, नवनीत मोहन कोठारी और तत्कालीन सदस्य सचिव उमा महेश्वरी को तत्काल निलंबित करने की मांग की है।



उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई और आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने का अनुरोध भी किया है। साथ ही, पूरे मामले से जुड़े काम और रिकॉर्ड की CBI जांच कराने की मांग रखी है।



शिकायत पत्र केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव और SEIAA की सदस्य डॉ. सुनीता सिंह को भी भेजी गई हैं।

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