एमपी में बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, अकेलेपन के साए और अपनों से दूर होने पर बढ़ रही मुसीबतें
रिटायर्ड आईएएस की हत्या से उठे सवाल
भोपाल में बुधवार 30 सितंबर को रिटायर्ड आईएएस अग्रवाल की हत्या हुई है। इस वारदात ने मध्यप्रदेश में बुजुर्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में अकेले रहने वाले वृद्धजन लगातार असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
17 बूथों की वोटर लिस्ट में बड़ा खुलासा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजधानी भोपाल के तीन मुख्य इलाकों के 17 मतदान केंद्रों की सूचियां जांची गईं। तब जाकर ये सच्चाई निकलकर सामने आई। इन 17 बूथों में कुल 13 हजार 253 मतदाता दर्ज मिले। इनमें 70 साल से अधिक उम्र के 1,127 बुजुर्ग शामिल हैं। कुल 274 यानी 24.3 प्रतिशत बुजुर्ग ऐसे घरों में रहते हैं। इन 210 मकानों में 60 वर्ष से कम का कोई वोटर नहीं है।
भोपाल के प्रमुख इलाकों की जमीनी स्थिति
साकेत नगर में 415 बुजुर्गों में से 125 अकेले रह रहे हैं। यहां ऐसे 85 मकान हैं, जो कुल का 30.1 प्रतिशत है। ईदगाह हिल्स में 366 में से 89 बुजुर्ग अकेले पाए गए। अरेरा कॉलोनी के 40 मकानों में 60 बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं।
पुलिस डेटा और सुरक्षा तंत्र की हकीकत
वहीं भोपाल पुलिस के पास भी अकेले रह रहे बुजुर्गों का कोई अलग डेटा नहीं है। वरिष्ठ नागरिक सेल में पूरे शहर से सिर्फ 172 बुजुर्ग ही पंजीकृत हैं। जबकि महज 17 बूथों पर ही ऐसे 210 मकान सामने आ चुके हैं। अकेले रहने से बुजुर्गों को बाहरी सहायकों और केयरटेकर पर निर्भर रहना पड़ता है।
मध्य प्रदेश में बुजुर्गों का स्वास्थ्य और निर्भरता
इंडिया एजिंग रिपोर्ट के अनुसार कई बुजुर्ग तो गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं। राज्य में 31.5 प्रतिशत बुजुर्ग उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रस्त हैं। वहीं 18.7 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिक मधुमेह की बीमारी से पीड़ित हैं। 74 प्रतिशत बुजुर्गों के पास किसी भी प्रकार का स्वास्थ्य बीमा नहीं है। 46 प्रतिशत महिलाएं अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं।
अकेलेपन का दंश झेलते बुजुर्ग
मध्य प्रदेश के शहरों और कस्बों में आज हालात तेजी से बदल रहे हैं। घरों में या तो बुजुर्ग दंपती अकेले जीवन बिता रहे हैं या फिर सिर्फ एक बुजुर्ग। बच्चों के नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहरों या विदेश चले जाने से घर खाली हो गए हैं।
दवा लानी हो, राशन जुटाना हो या कोई रोजमर्रा का काम, बुजुर्गों के सामने मदद का संकट खड़ा है। यह स्थिति सामाजिक ताने-बाने में आ रहे एक दर्दनाक बदलाव को दर्शाती है।
बिखरते संयुक्त परिवार और घटता सहारा
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब 57% परिवार एकल (न्यूक्लियर) हो चुके हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि हर 10 में से लगभग 6 घरों से बुजुर्गों को मिलने वाला संयुक्त परिवार का पारंपरिक सहारा छिन चुका है। उम्र के आखिरी पड़ाव में अपनों की मौजूदगी न होना बुजुर्गों को गहरे अकेलेपन में धकेल रहा है।
बढ़ती आबादी, बीमारी और आर्थिक असुरक्षा
केंद्र सरकार और नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भविष्य में यह संकट और गहराने वाला है।
- आबादी में उछाल: साल 2036 तक देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या बढ़कर करीब 23 करोड़ हो जाएगी, जो कुल आबादी का 15% हिस्सा होगी।
- बीमारी की मार: देश के 75% बुजुर्ग किसी न किसी पुरानी और गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं।
- अक्षमता की चुनौती: लगभग 40% बुजुर्ग शारीरिक अक्षमता और 20% मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
- पेंशन का अभाव: देश के 78% बुजुर्गों के पास बुढ़ापे में पेंशन जैसी नियमित आर्थिक सुरक्षा का कोई साधन नहीं है।
अपराधियों के आसान निशाने पर बुजुर्ग
अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए सिर्फ बीमारी और आर्थिक तंगी ही चुनौती नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा भी गंभीर खतरे में है। NCRB Report 2024 (एनसीआरबी रिपोर्ट 2024) के अनुसार, बुजुर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में मध्य प्रदेश पूरे देश में शीर्ष पर है।
- साल 2024 में राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध के पांच हजार 875 मामले दर्ज किए गए, जो साल 2023 के पांच हजार 738 मामलों से अधिक हैं।
- वर्ष 2024 के दौरान अकेले मध्य प्रदेश में बुजुर्गों की हत्या के 144 मामले और गंभीर चोट पहुंचाने के 376 मामले सामने आए हैं।