एमपी शिक्षक भर्ती 2025: नियम बदलने से 800 शिक्षकों की नियुक्ति अटकी

Amresh Kushwaha | Aug 05, 2026, 10:15 IST
एमपी शिक्षक भर्ती 2025
मध्यप्रदेश की प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में करीब 800 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति विवाद में फंस गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती शुरू होने के बाद पात्रता शर्त बदल दी गई है। दस्तावेज सत्यापन के दौरान नई डिग्री समय-सीमा लागू करने पर विवाद बढ़ा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में 800 चयनित शिक्षकों की नियुक्ति विवाद में फंस गई है।
  • अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती के बीच पात्रता शर्त बदल दी गई है।
  • डीवी के दौरान डिग्री समय-सीमा को लेकर नया नियम लागू हुआ था।
  • 29 जुलाई को सीएम मोहन यादव ने कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए थे।
  • 10 अगस्त से अगले सत्यापन चरण से पहले फैसले पर सबकी नजर है।

मध्यप्रदेश की प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में करीब 800 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पात्रता विवाद में फंस गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता की शर्त बदल दी गई थी। आवेदन के समय जारी नियमों के आधार पर उन्होंने परीक्षा दी और चयनित भी हुए थे। वहीं, दस्तावेज सत्यापन यानी डीवी (Document Verification) के दौरान अलग नियम लागू कर उनकी नियुक्ति रोक दी गई है।



800 शिक्षकों की नियुक्ति अटकी

18 जुलाई से दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसी दौरान कई अभ्यर्थियों को यह कहते हुए रोक दिया गया कि आवेदन की अंतिम तिथि 25 अगस्त 2025 तक उनकी डिग्री और अंकसूची उपलब्ध नहीं थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह शर्त शुरुआत में तय नहीं थी। उनका आरोप है कि नियम बीच में बदल दिए गए, जो सरासर गलत है।



क्लॉज-49 पर अभ्यर्थियों का तर्क

अभ्यर्थियों का कहना है कि आवेदन फॉर्म के क्लॉज-49 में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति पहले ही दी गई थी। शर्त सिर्फ इतनी थी कि दस्तावेज सत्यापन के समय अंतिम वर्ष की अंकसूची या उपाधि उपलब्ध होनी चाहिए। अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने यह शर्त पूरी भी की थी। फिर भी उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी गई थी।



17 जुलाई का विवादित आदेश

ईएसबी यानी कर्मचारी चयन मंडल (Employee Selection Board) की नियम पुस्तिका के अध्याय-1 के क्लॉज-3 में आवेदन फॉर्म को भर्ती नियमों का हिस्सा माना गया है। इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने 17 जुलाई को एक नया आदेश जारी किया।



इस आदेश के क्लॉज-9.3 में आवेदन की अंतिम तिथि तक डिग्री पूरी होना अनिवार्य कर दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती शुरू होने के बाद नई शर्त लागू करना नियमों के खिलाफ है।



मुख्यमंत्री ने बांटे नियुक्ति पत्र

29 जुलाई को उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए थे। इस कार्यक्रम में कई शिक्षकों को नौकरी की सौगात मिली थी। वहीं, इसी बीच कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति नई शर्त के चलते अटक गई। इससे चयनित अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।



पहले भी उठा था ऐसा मामला

यह पहला मौका नहीं है जब भर्ती के बीच में नियम बदलने का मुद्दा उठा हो। जनजातीय कार्य विभाग की वर्ग-1 भर्ती 2023 में भी आवेदन की अंतिम तिथि तक डिग्री अनिवार्य करने का आदेश जारी हुआ था। तब विरोध के बाद विभाग को अपना आदेश वापस लेना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में यह कह चुका है कि भर्ती शुरू होने के बाद पात्रता या चयन के मानदंड बदलना न्यायसंगत नहीं है।



10 अगस्त से अगला चरण

अब 10 अगस्त से दस्तावेज सत्यापन का अगला प्रस्तावित चरण शुरू होने वाला है। इससे पहले स्कूल शिक्षा विभाग के फैसले पर सभी अभ्यर्थियों की नजर टिकी है। अभ्यर्थी उम्मीद कर रहे हैं कि विभाग पुराने विवादों से सबक लेकर सही फैसला लेगा। यदि नियम में बदलाव नहीं हुआ तो 800 अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक सकता है।



निष्पक्ष जांच की मांग

अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरी ईमानदारी से आवेदन किया और तय शर्तें पूरी कीं। उनकी मांग है कि विभाग बीच में बदले नियमों को वापस ले। कई अभ्यर्थी अब इस मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे कानूनी रास्ता भी अपना सकते हैं।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सीधे युवाओं के रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी है। संविधान हर नागरिक को समान अवसर और निष्पक्ष प्रक्रिया का अधिकार देता है। भर्ती के बीच नियम बदलना अभ्यर्थियों के भरोसे और कानूनी अधिकारों पर सीधा असर डालता है।



सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि प्रक्रिया शुरू होने के बाद मानदंड बदलना उचित नहीं। यह खबर सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को भी सामने रखती है। स्कूलों में शिक्षकों की समय पर नियुक्ति बच्चों की पढ़ाई से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है।



FAQ

  1. मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती 2025 में कितने अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटकी है?
    प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में करीब 800 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति दस्तावेज सत्यापन के दौरान नई डिग्री समय-सीमा शर्त के चलते रुक गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह शर्त भर्ती शुरू होने के बाद जोड़ी गई।

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