एमपी की बेटी नीरू ढांडा ने रचा इतिहास: एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर तोड़ा 48 साल पुराना रिकॉर्ड, भारत को दिलाया पहला व्यक्तिगत स्वर्ण
महू की ट्रेनिंग से एशियन गेम्स के गोल्ड तक पहुंची नीरू
हरियाणा के जींद में जन्मी नीरू ढांडा भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं। वह कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस का हिस्सा हैं और मध्यप्रदेश के महू स्थित आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में ट्रेनिंग लेती हैं।
नीरू मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी से भी जुड़ी रही हैं। महू और भोपाल की शूटिंग सुविधाओं ने उनके खेल को नई दिशा दी। यहां लगातार अभ्यास और विशेषज्ञ प्रशिक्षण के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
एशियन गेम्स में उनकी जीत को मध्यप्रदेश के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जैसे ही नीरू के गोल्ड जीतने की खबर सामने आई, प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई।
फाइनल में 30 में से लगाए 28 सटीक निशाने
एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग स्पर्धा का फाइनल जापान के आइची प्रीफेक्चर जनरल शूटिंग गैलरी में आयोजित हुआ। इस मुकाबले में नीरू ढांडा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया।
नीरू ने फाइनल में 30 में से 28 निशाने सटीक लगाए और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने एशियाई रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इससे पहले इस स्पर्धा का रिकॉर्ड 24 निशानों का था।
नीरू की यह जीत भारतीय ट्रैप शूटिंग के लिए भी खास है। भारत को एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग के व्यक्तिगत वर्ग में करीब 48 साल बाद स्वर्ण पदक मिला है। इससे पहले 1978 बैंकॉक एशियन गेम्स में रंधीर सिंह ने पुरुष ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। अब नीरू ने महिला व्यक्तिगत ट्रैप में गोल्ड जीतकर इस इतिहास को आगे बढ़ाया है।
फाइनल में चीन की सुन युनोंग ने 26 अंक हासिल कर रजत पदक जीता। वहीं कुवैत की हाजर अब्दुलमलिक ने 21 अंक के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।
नीरू के रिकॉर्ड प्रदर्शन से भारत ने न सिर्फ एशियन गेम्स में स्वर्ण जीता, बल्कि ट्रैप शूटिंग में लंबे इंतजार को भी खत्म किया।
टीम इवेंट में भी जीता सिल्वर
नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में सिर्फ व्यक्तिगत स्पर्धा में ही नहीं बल्कि टीम इवेंट में भी शानदार प्रदर्शन किया।
महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में नीरू ने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर सिल्वर मेडल जीता।
इस तरह नीरू ने एक ही एशियन गेम्स में दो पदक अपने नाम किए। एक सिल्वर और एक गोल्ड के साथ वह भारत की सफल खिलाड़ियों में शामिल हो गईं।
किसान परिवार से निकलीं गोल्डन गर्ल
नीरू ढांडा का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उनका जन्म हरियाणा के जींद जिले में हुआ था। करीब एक दशक से अधिक समय पहले उनका परिवार मध्यप्रदेश के शिवपुरी में आकर बस गया था।
नीरू के पिता किसान हैं और मां गृहिणी हैं। साधारण परिवार से आने वाली नीरू के लिए शूटिंग जैसे महंगे खेल में आगे बढ़ना आसान नहीं था।
परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उनके सपनों का साथ दिया। मेहनत और परिवार के भरोसे ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
भाई की सफलता से मिली शूटिंग की प्रेरणा
नीरू ने शूटिंग को करियर बनाने का फैसला अचानक नहीं किया था। साल 2018 एशियन गेम्स में उनके कजिन लक्ष्य श्योराण ने ट्रैप शूटिंग में सिल्वर मेडल जीता था।
लक्ष्य की सफलता देखकर नीरू को भी शूटिंग में रुचि हुई। शुरुआत में उन्होंने लक्ष्य की बंदूक से अभ्यास किया।
इससे पहले वह परिवार की डबल बैरल बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना लगाने की प्रैक्टिस करती थीं। धीरे-धीरे उनका जुनून खेल में बदल गया।
इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश स्टेट शूटिंग अकादमी के ट्रायल में सफलता हासिल की और यहीं से उनके करियर को नई दिशा मिली।
एशियन गेम्स से पहले बीमारी से लड़ीं नीरू
नीरू की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स से कुछ दिन पहले वह स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थीं।
एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले भोपाल में वह गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती हुई थीं। कई दिनों तक वह ट्रेनिंग से दूर रहीं।
इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। कोच मंशर सिंह के प्रोत्साहन और अपने आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने वापसी की और इतिहास बना दिया।
वर्ल्ड कप में भी बना चुकी हैं रिकॉर्ड
एशियन गेम्स से पहले नीरू ने ISSF वर्ल्ड कप में भी शानदार प्रदर्शन किया था।
जुलाई 2026 में इटली के लोनाटो में हुए ISSF वर्ल्ड कप में उन्होंने महिला ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था।
वह ISSF वर्ल्ड कप में महिला ट्रैप का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। उन्होंने क्वालिफिकेशन में 121/125 का स्कोर किया था।
फाइनल में 30 में से 27 निशाने लगाकर उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और खेल मंत्री ने दी बधाई
नीरू ढांडा की सफलता पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुशी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं के ट्रैप व्यक्तिगत इवेंट में पहला स्वर्ण पदक जीतकर नीरू ने इतिहास रचा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीरू की उपलब्धि देश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।
मध्यप्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने भी नीरू के जीतने पर गदगद हैं। उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी की खिलाड़ी ने रिकॉर्ड प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया है।
MP की तीन खिलाड़ियों ने दिखाया दम
एशियन गेम्स 2026 में मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी से तीन महिला खिलाड़ी शामिल हुईं।
नीरू ढांडा के अलावा आशिमा अहलावत और मनीषा कीर ने भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।
महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में भारतीय टीम ने सिल्वर मेडल जीता है। इससे मध्यप्रदेश की शूटिंग प्रतिभा को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
अब नजर 2028 ओलंपिक पर
नीरू ढांडा अब अपने अगले लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं। उनका सपना 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है।
महू की शूटिंग रेंज से शुरू हुआ नीरू का सफर अब एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक तक पहुंच चुका है। उनकी सफलता मध्यप्रदेश और देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।