MP में SIR को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, हेमंत खंडेलवाल ने राहुल गांधी पर लगाए आरोप, कांग्रेस ने मांगा हिसाब
दूसरी तरफ कांग्रेस ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
हेमंत खंडेलवाल ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि देश में अब तक 12 बार मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा चुका है। इनमें से 10 बार यह प्रक्रिया कांग्रेस की सरकारों के दौरान हुई थी। ऐसे में कांग्रेस अब इसका विरोध क्यों कर रही है? खंडेलवाल ने कहा कि Voter List से मृत लोगों और एक से ज्यादा जगह दर्ज मतदाताओं के नाम हटाना जरूरी है। उन्होंने राहुल गांधी पर देश को अस्थिर करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। इसके अलावा खंडेलवाल ने पश्चिम बंगाल की आबादी में हुई बढ़ोतरी से जुड़े आंकड़ों की जांच कराने की जरूरत बताई।
कांग्रेस ने हटाए गए मतदाताओं का मांगा हिसाब
दूसरी तरफ कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी की मांग है कि मतदाता सूची से हटाए गए सभी नामों की बूथवार जानकारी सार्वजनिक की जाए। अक्टूबर में कांग्रेस प्रतिनिधियों ने निर्वाचन अधिकारियों से Form-6 के लंबित आवेदनों की जानकारी मांगी थी। कांग्रेस नेता ललित सेन ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पहले भी फॉर्म-7 के कथित गलत इस्तेमाल पर सवाल उठा चुके हैं। उनका आरोप है कि पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से सूची से हटाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड और संबंधित प्रक्रिया की जांच से ही हो सकती है।
प्रेम शुक्ला ने कांग्रेस की चुनावी हार पर उठाए सवाल
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार के लिए कभी EVM तो कभी SIR को जिम्मेदार ठहराती है। शुक्ला ने राहुल गांधी से सवाल किया कि अगर मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाए गए हैं, तो ऐसे मतदाताओं की जानकारी सामने क्यों नहीं रखी जा रही? उन्होंने रामलीला मैदान में हुई रैली को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। शुक्ला ने दावा किया कि रैली के कारण कारोबार प्रभावित हुआ। उन्होंने अपने बयान में 25 हजार कार्यकर्ताओं और तीन लाख प्रतिष्ठानों से जुड़े आंकड़ों का भी जिक्र किया।
भाजपा ने पेश किए विधायकों की संख्या के आंकड़े
प्रेम शुक्ला ने कांग्रेस और भाजपा के विधायकों की संख्या की तुलना करते हुए कई आंकड़े पेश किए। उनके मुताबिक, 2004 में कांग्रेस के 1,182 और भाजपा के 899 विधायक थे। साल 2014 में कांग्रेस के विधायकों की संख्या 843 रह गई, जबकि भाजपा के विधायक बढ़कर 1,035 हो गए। शुक्ला ने दावा किया कि 2017 में कांग्रेस के 807 और भाजपा के 1,365 विधायक थे। वहीं, 2024 में कांग्रेस के 654 और भाजपा के 1,588 विधायक होने की बात कही। उन्होंने मौजूदा संख्या को लेकर दावा किया कि कांग्रेस के 663 और भाजपा के 1,819 विधायक हैं। हालांकि, ये सभी आंकड़े प्रेम शुक्ला के दावे हैं। इनका स्वतंत्र चुनावी रिकॉर्ड से मिलान नहीं किया गया है।
SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की वैधता से जुड़े मामले में फैसला दिया था। वहीं, अक्टूबर में अन्य राज्यों की प्रक्रियाओं और दस्तावेजों से जुड़ी नई याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर Political Debate जारी है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची से गलत और दोहरे नाम हटाना जरूरी है। वहीं, कांग्रेस प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग कर रही है। ऐसे में चुनाव आयोग के सामने मतदाता सूची को सही रखने के साथ यह सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।