सरकार का आदेश बेअसर, एमपी में सोलर पैनल पर शुल्क खत्म, फिर भी वसूली जारी
5 प्वाइंट में समझें पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने सोलर पैनल पर सभी शुल्क खत्म कर दिए हैं।
- आदेश 17 अप्रैल का है लेकिन 21 दिन बाद भी वसूली जारी है।
- उपभोक्ताओं पर अभी भी सात से 13 हजार रुपए का बोझ पड़ रहा है।
- पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मार्च 2027 तक पांच लाख घरों को फायदा मिलना है।
- तीनों विद्युत वितरण कंपनियों ने अब तक अपना अलग आदेश नहीं जारी किया है।
आयोग ने हटाए शुल्क, कंपनियों ने माना नहीं
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने 17 अप्रैल को एक अहम आदेश जारी किया था। इसमें छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क खत्म कर दिया गया था।
साथ ही प्रोसेसिंग शुल्क, मीटर जांच शुल्क और इंस्टालेशन-कमीशनिंग शुल्क को पूरी तरह खत्म कर दिया था। भौतिक अनुबंधों की जगह डिजिटल एग्रीमेंट लागू करने का निर्देश भी दिया गया था।
हैरानी की बात है कि 21 दिन बीत जाने के बाद भी अवैध वसूली जारी है। राज्य की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों ने न तो अपना अलग आदेश जारी किया और न ही वसूली रोकी।
- मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPCZ)
- मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MP-East/MPEZ)
- मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MP-West/MPWZ)
सोलर पैनल लगवाने की इच्छा रखने वाले उपभोक्ताओं को अभी भी सात से 13 हजार रुपए का बोझ उठाना पड़ रहा है। यह वही शुल्क हैं जिन्हें आयोग पहले ही खत्म कर चुका है।
5 लाख उपभोक्ताओं का हक दांव पर
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना फरवरी 2024 में शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य देश के एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर उन्हें मुफ्त बिजली देना है। मध्यप्रदेश में इस योजना के तहत मार्च 2027 तक पांच लाख उपभोक्ताओं को फायदा मिलना है।
उपभोक्ताओं और वेंडर्स की इस परेशानी को मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम ने देखा था। इसी के साथ निगम ने आयोग में याचिका भी दाखिल की थी। मांग थी कि शुल्कों को हटाया जाए और कागजी प्रक्रिया को डिजिटल किया जाए।
आयोग ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए आदेश जारी कर दिया था। मकसद साफ था कि सोलर संयंत्र की स्थापना सस्ती हो और काम तेज गति से हो सके।
सरकार दे रही सब्सिडी
केंद्र सरकार इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को अच्छी-खासी सब्सिडी दे रही है। एक किलोवाट का सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार रुपए रुपए की सब्सिडी मिलती है।
वहीं दो किलोवाट पर 60 हजार रुपए और तीन किलोवाट या उससे अधिक पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा कम ब्याज पर कर्ज की सुविधा भी उपलब्ध है।
इतनी बड़ी सब्सिडी के बावजूद जब कंपनियां अवैध शुल्क वसूलती हैं, तो उपभोक्ता का कुल फायदा घट जाता है। यही वजह है कि आयोग ने इन शुल्कों को हटाने का फैसला किया था।
जमीन पर क्या हाल ?
अब तक मध्यप्रदेश में कुल एक लाख 89 हजार 147 आवेदन आ चुके हैं। इनमें से एक लाख 18 हजार 796 संयंत्र लग हो चुके हैं। कुल स्थापित क्षमता 445 मेगावाट है। अब तक 790 करोड़ 67 लाख रुपए की सब्सिडी जारी की जा चुकी है।
ये आंकड़े बताते हैं कि योजना जमीन पर चल तो रही है, लेकिन कंपनियों की अनदेखी से इसकी रफ्तार और दायरा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। जिन लोगों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है वे अतिरिक्त शुल्क की वजह से पीछे हट सकते हैं।
कंपनियों की चुप्पी पर सवाल
आयोग के आदेश के बाद तीनों विद्युत वितरण कंपनियों को अपने-अपने क्षेत्र के लिए अलग आदेश जारी करना था। यह प्रक्रिया जरूरी थी ताकि आदेश जमीनी स्तर पर लागू हो सके। वहीं 21 दिनों की चुप्पी यह बता देती है कि व्यवस्था कहीं न कहीं लड़खड़ा रही है।
अब सवाल यह है कि जब नियामक आयोग ने स्पष्ट आदेश दे दिया है, तो कंपनियां यह वसूली क्यों जारी रख रही हैं? उपभोक्ता कहां शिकायत करें? और इसका जवाब कौन देगा?
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि यह सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में हो रही गड़बड़ी को उजागर करती है। पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए है।
जब सरकारी कंपनियां खुद नियामक आयोग के आदेश की अनदेखी करें, तो यह जवाबदेही का संकट है। भारतीय संविधान के तहत नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार है और ऊर्जा तक सस्ती पहुंच उसी का हिस्सा है।
डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के नजरिए से भी यह गलत है कि नियम बदलने के बाद भी उपभोक्ता से पुराने दर पर पैसा वसूला जाए। यह खबर उन लाखों परिवारों से सीधे जुड़ी है जो इस योजना से लाभ पाने की कतार में हैं।
FAQ
- पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में कौन-कौन से शुल्क खत्म किए गए हैं?
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने 17 अप्रैल के अपने आदेश में रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क, मीटर जांच शुल्क और इंस्टालेशन-कमीशनिंग शुल्क खत्म कर दिए हैं। इसके अलावा कागजी यानी भौतिक अनुबंधों की जगह डिजिटल एग्रीमेंट लागू करने का भी आदेश दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि सोलर पैनल लगवाना अब पहले से सस्ता और आसान होना चाहिए। - मध्यप्रदेश में पीएम-सूर्य घर योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिलती है?
केंद्र सरकार की ओर से एक किलोवाट के सोलर संयंत्र पर 30 हजार रुपए, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपए और तीन किलोवाट या उससे अधिक पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी दी जाती है। साथ ही कम ब्याज पर ऋण की सुविधा भी है। योजना का लक्ष्य 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देना है। - अगर बिजली कंपनी गलत शुल्क वसूल रही हो तो उपभोक्ता क्या करें?
अगर कोई विद्युत वितरण कंपनी आयोग के आदेश के बाद भी शुल्क वसूल रही है, तो उपभोक्ता मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर भी शिकायत की जा सकती है। पीएम-सूर्य घर पोर्टल पर भी अपनी समस्या दर्ज कराने का विकल्प उपलब्ध है।
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