स्पेशल PSC को लेकर सस्पेंस में उम्मीदवार, केवल बैकलॉग और OBC पद आएंगे या अनारक्षित वर्ग को भी मिलेगा मौका, जानें सब कुछ

Sanjay Gupta | Oct 23, 2026, 12:47 IST
MP में स्पेशल PSC की तैयारी, केवल बैकलॉग पद आएंगे या सामान्य को भी मिलेगा मौका
ओबीसी आरक्षण विवाद के बीच सीएम डॉ. मोहन यादव ने स्पेशल पीएससी की घोषणा की है। यह परीक्षा जनवरी या फरवरी में कराई जा सकती है। घोषणा के बाद उम्मीदवारों के मन में कई सवाल हैं। क्या भर्ती केवल बैकलॉग पदों के लिए होगी? क्या सामान्य वर्ग को भी मौका मिलेगा? लंबित रिजल्ट कब जारी होंगे?

जबलपुर हाईकोर्ट के 9 अक्टूबर के फैसले के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। सरकार पहले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लेने की कोशिश करेगी। राहत मिलने पर भर्ती और रिजल्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसके बाद सरकार 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के लिए प्रयास करेगी। फिलहाल स्पेशल पीएससी में पदों की संख्या और श्रेणियां तय नहीं हैं।



सीएम ने यह की थी घोषणा

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि आने वाला साल युवा वर्ष होगा। इस दौरान जनवरी या फरवरी में स्पेशल पीएससी परीक्षा कराई जाएगी। सरकार सभी खाली पदों को भरने की तैयारी कर रही है। भर्ती और पदोन्नति पर बराबर ध्यान दिया जा रहा है।



सीएम ने बताया था कि पुलिस विभाग में 18 हजार 500 पदों पर भर्ती होगी। अगले दो वर्षों में 22 हजार 500 खाली पद भरे जाएंगे। प्रदेश में कुल 85 हजार पदों पर नियुक्तियां करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य कोई भी पद खाली नहीं छोड़ना है।



अभी तक क्या हुई है स्पेशल पीएससी

मध्य प्रदेश में अभी तक स्पेशल पीएससी परीक्षा नहीं हुई है। साल 2006 में बैकलॉग पीएससी जरूर कराई गई थी। इसके जरिए एससी और एसटी वर्ग के खाली पद भरे गए थे। स्पेशल पीएससी और बैकलॉग पीएससी एक जैसी परीक्षाएं नहीं हैं। दोनों का मकसद और पदों का दायरा अलग होता है।



उम्मीदवारों को किस बात की चिंता?

स्पेशल पीएससी को लेकर उम्मीदवारों के मन में कई सवाल हैं। द सूत्र को भी लगातार इससे जुड़े मैसेज मिल रहे हैं। उम्मीदवार जानना चाहते हैं कि परीक्षा में किस तरह के पद आएंगे। उन्हें आशंका है कि भर्ती केवल बैकलॉग पदों के लिए होगी। ऐसे में अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को मौका नहीं मिलेगा।



स्पेशल PSC को लेकर क्या बोले उम्मीदवार

सामान्य प्रशासन विभाग की क्या योजना है?

द सूत्र ने भोपाल और इंदौर में अधिकारियों से जुड़े सूत्रों से बात की। जानकारी के मुताबिक बैकलॉग और स्पेशल पीएससी अलग-अलग होती हैं। स्पेशल परीक्षा 85 हजार खाली पदों से जुड़ी हो सकती है। ये पद लंबे समय से रुकी पदोन्नतियों के बाद खाली हुए हैं।



भर्ती में पदों की श्रेणी पुराने रोस्टर से तय होगी। एंट्री लेवल पर पद जिस श्रेणी के लिए था उसी में भरा जाएगा। एससी एसटी ओबीसी ईडब्ल्यूएस और अनारक्षित पद इसी आधार पर निकलेंगे।



इसका मतलब स्पेशल पीएससी केवल आरक्षित वर्गों के लिए नहीं होगी। अनारक्षित वर्ग के पद भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं। पदों की संख्या पदोन्नति के बाद बनी रिक्तियों से तय होगी। विभाग भी उसी आधार पर आयोग को अपनी मांग भेजेंगे।



स्पेशल पीएससी में कितने पद आएंगे?

पदों की संख्या पर अभी विभागीय स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ है। फिलहाल जीएडी का ध्यान सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले पर है। दूसरी तरफ विभागों से खाली पदों की जानकारी मांगी जा रही है।



डिमांड मिलने के बाद वित्त विभाग से मंजूरी ली जाएगी। वित्त विभाग ने पदों को तीन वर्षों में भरने का फॉर्मूला बनाया है। मंजूरी मिलने के बाद विभाग आयोग को प्रस्ताव भेजेंगे। सामान्य और स्पेशल पीएससी में इस बार ज्यादा पद आने की उम्मीद है।



क्या ओबीसी को मिल सकेंगे अधिक पद

इसमें सबसे बड़ा फोकस सरकार का ओबीसी वर्ग रहने वाला है। हाईकोर्ट में सरकार के ओबीसी केस में पिटने का एक अहम कारण ओबीसी की नौकरी वाला मुद्दा भी रहा है। सरकार ने कहा था कि ओबीसी का प्रतिनिधित्व कम है, लेकिन वहीं दूसरे पक्ष ने बताया कि प्रतिनिधित्व 28 फीसदी है, जो मौजूदा आरक्षण 14 फीसदी से दोगुना और चाहे गए आरक्षण 27 फीसदी से भी अधिक है।



लेकिन सरकार ने ही ओबीसी के लिए तय पद में से 51 फीसदी नहीं भरे हैं। यानी गलती सरकार की है। ऐसे में यह भी संभव है कि स्पेशल पीएससी में ओबीसी वर्ग को संभालने के लिए उनकी कैटेगरी के अधिक पदों को निकाला जाए।



क्या ओबीसी को ज्यादा पद मिलेंगे?

सरकार का सबसे ज्यादा ध्यान ओबीसी वर्ग पर रह सकता है। हाईकोर्ट में ओबीसी प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा था। सरकार ने नौकरियों में ओबीसी प्रतिनिधित्व कम बताया था। दूसरे पक्ष ने इसे करीब 28 फीसदी बताया।



यह आंकड़ा मौजूदा 14 फीसदी आरक्षण से दोगुना है। यह मांगे गए 27 फीसदी आरक्षण से भी अधिक है। सरकार ओबीसी के निर्धारित 51 फीसदी पद अभी तक नहीं भर सकी है।



स्पेशल पीएससी में ओबीसी के ज्यादा रिक्त पद निकाले जा सकते हैं। इससे दो राजनीतिक लाभ होंगे, पहला ओबीसी वर्ग की नाराजगी दूर होगी। दूसरा फिर सुप्रीम कोर्ट में भी बताया जा सकेगा कि पद रिक्त नहीं हैं, भरे गए हैं, लेकिन यह आबादी 50 फीसदी की तुलना में कम प्रतिनिधित्व है, इसलिए आरक्षण अधिक किया जाए।



हाई कोर्ट में पेश ओबीसी पदों के आंकड़े

हाई कोर्ट में सरकारी नौकरियों से जुड़े आंकड़े पेश किए गए। ऑल इंडिया सर्विस में ओबीसी के 176 पद बताए गए। प्रथम श्रेणी में 2 हजार 258 पद हैं। द्वितीय श्रेणी में 17 हजार 924 पद बताए गए।



तृतीय श्रेणी में करीब 1.29 लाख पद हैं। चतुर्थ श्रेणी में ओबीसी के 19 हजार 818 पद हैं। सभी श्रेणियों में कुल 1.69 लाख पद बताए गए। यह कुल सरकारी पदों का 28.16 फीसदी है।



आईएएस में ओबीसी की हिस्सेदारी 13.76 फीसदी बताई गई। प्रथम श्रेणी में यह हिस्सेदारी 9.55 फीसदी है। द्वितीय श्रेणी में ओबीसी के 23 फीसदी पद हैं। तृतीय श्रेणी में यह आंकड़ा 28.33 फीसदी है। चतुर्थ श्रेणी में हिस्सेदारी 33.56 फीसदी बताई गई।



आंकड़ों के मुताबिक ओबीसी के 51 फीसदी निर्धारित पद खाली हैं। इन पदों को सरकार अभी तक नहीं भर सकी है।



किस वर्ग के कितने पद?

मध्य प्रदेश की सरकारी नौकरियों में एससी की हिस्सेदारी 17.58 फीसदी है। एसटी वर्ग की हिस्सेदारी 17.99 फीसदी बताई गई है। ओबीसी वर्ग के पास 28.16 फीसदी पद हैं। तीनों वर्गों की कुल हिस्सेदारी 63.76 फीसदी बताई गई है।



रिजल्ट आने की क्या अभी संभावना है

द सूत्र के पास लगातार संदेश आ रहे हैं कि रिजल्ट कब आएंगे। इस संबंध में द सूत्र 10 अक्टूबर को ही विस्तृत न्यूज दे चुका है। वहीं भोपाल स्तर से भी मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से जब तक स्टे नहीं मिल जाता है, तब तक रिजल्ट की उम्मीद नहीं है।



वैसे भी सरकार के पास हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए 90 दिन का यानी 9 जनवरी तक का समय है। नौ अक्टूबर को फैसला आया था। यदि अभी रिजल्ट निकाला तो सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के बिंदु 221 के तहत सौ फीसदी पर रिजल्ट देना होगा। इसमें 14 फीसदी आरक्षण लागू होगा, जो सरकार नहीं चाहती है।



यदि यह रिजल्ट निकल गया तो सरकार के फिर सुप्रीम कोर्ट जाने का मतलब नहीं रहेगा। इसलिए सरकार वेट एंड वॉच की स्थिति में है और पहली कोशिश हाईकोर्ट आदेश पर स्टे लेने की रहेगी। लेकिन यह केस सुप्रीम कोर्ट में भी दिवाली के बाद ही जाता दिख रहा है। यानी अभी रिजल्ट की उम्मीद बहुत ही कम है।



पीएससी और ईएसबी को जीएडी के आदेश का इंतजार है। इसके बाद ही आगे मामला बढ़ेगा और जीएडी फिलहाल कोई निर्देश जारी नहीं करने जा रहा है।



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