मप्र में एसआरएस रिपोर्ट 2024 : 55 साल में पहली बार शिशु मृत्युदर में कमी, बची 10 हजार मासूमों की जान!
मध्य प्रदेश को पहली बार नवजात बच्चों की जान बचाने में ऐतिहासिक सफलता मिली है। भारत सरकार की ताजा 'एसआरएस रिपोर्ट 2024' ने सबको चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में शिशु मृत्युदर में भारी गिरावट आई है।
मप्र में शिशु मृत्युदर 40 से घटकर 35 पर आ गई है। साल 1971 में जब पहला सर्वे हुआ था, तब यह आंकड़ा 135 था। बीते 55 साल में यह अब तक का सबसे बेहतरीन और सुखद सुधार है।
हर साल जन्म लेते हैं 20 लाख बच्चे, ऐसे बची 10 हजार जानें
मध्य प्रदेश की मौजूदा आबादी इस समय करीब 8.7 करोड़ के आसपास है। इस आबादी के हिसाब से राज्य में हर साल 20 लाख बच्चे जन्म लेते हैं। नई रिपोर्ट बताती है कि हर हजार जन्म पर 5 बच्चों की मौत कम हुई है। गणित लगाएं तो एक साल में सीधे 10,000 नवजात बच्चों की जान बचाई गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार इसे अपनी बड़ी राजनीतिक और सामाजिक जीत मान रही है। सरकारी डॉक्टरों और ग्राउंड स्टाफ की मेहनत रंग लाती दिख रही है। ग्रामीण इलाकों में संस्थागत प्रसव बढ़ने से यह बड़ा बदलाव मुमकिन हो पाया है।
जमीनी हकीकत और बड़ी चुनौतियां
शिशु मृत्युदर में मप्र अभी भी कई राज्यों से पीछे
सुधार के बावजूद मध्य प्रदेश देश के सबसे खराब राज्यों की सूची में है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का आंकड़ा यहां 41 है। नवजात मृत्यु दर (पहले 28 दिन) का आंकड़ा भी अभी 26 पर बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों में आज भी स्वास्थ्य सेवाएं उतनी मजबूत नहीं हो पाई हैं।
केरल और तमिलनाडु मॉडल से सीखे मध्य प्रदेश
अगर हम दूसरे राज्यों से तुलना करें तो मप्र बहुत पीछे दिखाई देता है। केरल में शिशु मृत्यु दर केवल 8 और तमिलनाडु में 11 है। पूर्वोत्तर के छोटे राज्य मणिपुर में यह आंकड़ा सिर्फ 2 पर टिका हुआ है। मप्र सरकार को इन राज्यों के हेल्थ मॉडल से बहुत कुछ सीखना होगा।
मातृ मृत्युदर में 25 साल बाद आया 363 अंकों का सुधार
मप्र के लिए दूसरी राहत की खबर गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य को लेकर है। राज्य में मातृ मृत्युदर (MMR) अब घटकर 135 पर आ गई है। पिछले साल के सर्वे में यह गंभीर आंकड़ा 159 पर दर्ज था। साल 1999 में राज्य में पहली बार मातृ मृत्युदर 498 दर्ज की गई थी।
25 सालों में पहली बार इसमें 363 अंकों की बड़ी गिरावट आई है। हालांकि, राष्ट्रीय औसत 87 के मुकाबले मप्र का प्रदर्शन अभी भी खराब है। देश में उत्तर प्रदेश (154) के बाद मप्र सबसे खराब स्थिति में है। केरल में यह आंकड़ा 24 और महाराष्ट्र में केवल 37 है।
डिप्टी सीएम का दावा: 2030 तक स्वास्थ्य का ढांचा बदल देंगे
इस ऐतिहासिक रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य कर्मियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार हुआ है।
इधर, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने भी बड़ा राजनीतिक संकल्प सामने रखा है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य 2030 तक एमएमआर को 70 से नीचे लाना है। इसके लिए ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों और गायनेकोलॉजिस्ट की संख्या बढ़ाई जाएगी। हर जिले के अस्पतालों में बच्चों के लिए विशेष आईसीयू बेड बनेंगे।
FAQ
- एसआरएस रिपोर्ट 2024 के अनुसार मध्य प्रदेश में शिशु मृत्युदर की ताजा स्थिति क्या है?
ताजा एसआरएस रिपोर्ट 2024 के अनुसार मध्य प्रदेश में शिशु मृत्युदर 40 से घटकर 35 अंक पर आ गई है। इससे राज्य में एक साल के भीतर लगभग 10,000 नवजात बच्चों की जान बचाने में बड़ी सफलता मिली है। - मातृ मृत्युदर के मामले में मध्य प्रदेश का राष्ट्रीय औसत क्या कहता है?
मध्य प्रदेश में मातृ मृत्युदर घटकर 135 पर आ गई है, जो पहले 159 थी। हालांकि, यह अभी भी भारत के राष्ट्रीय औसत (87) से काफी पीछे है और देश में यूपी के बाद मप्र दूसरे सबसे खराब स्थान पर है। - मध्य प्रदेश सरकार का साल 2030 के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या लक्ष्य है?
मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के अनुसार, सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक मातृ मृत्युदर (MMR) को घटाकर 70 से नीचे लाना है। इसके लिए ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे और रेफरल सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में यूसीसी पर पहली बैठक, महापौर बोले देश में किसी को भी चार शादी, 24 बच्चे पैदा करने का अधिकार नहीं
रेलवे कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा: वंदे भारत समेत 155 ट्रेन हाई स्पीड लिस्ट में शामिल
एमपी में लाखों शिक्षकों के वेतन में होगी कटौती, सरकार ने 26 मई को बुलाई बैठक
एमपी में फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार: सीहोर में सरकारी रेडियोग्राफर था आरोपी