MP में नर्स भर्ती पर बवाल, 5 हजार से ज्यादा पद खाली, भर्ती निकली सिर्फ 7 पदों पर
News In Short
- मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में कुल 5 हजार 722 नर्सिंग पद खाली हैं।
- हजारों वैकेंसी के बावजूद सरकार ने केवल 7 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है।
- जारी की गई भर्ती में OBC, SC और ST वर्ग के लिए एक भी पद आवंटित नहीं है।
- कई स्वास्थ्य केंद्रों में निर्धारित मानकों से 75% तक कम स्टाफ तैनात है।
- छात्र संगठनों ने मांगें न माने जाने पर प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
News In Detail
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों के लिए बुरी खबर है। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था इस समय नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी से वेंटिलेटर पर है।
सरकारी ऑडिट रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में कुल 5 हजार 722 पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार ने हाल ही में जो भर्ती निकाली है, वह मात्र 7 पदों के लिए है। इस मजाक ने नर्सिंग अभ्यर्थियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
पद खाली लेकिन भर्ती नहीं
विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो कमी का स्तर डराने वाला है। जिला अस्पतालों में 1 हजार 513 पद खाली हैं, जबकि सिविल अस्पतालों में 375 पद खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य केंद्रों (CHC/PHC) में 1 हजार 283 और मेडिकल कॉलेजों में 2 हजार 416 पदों पर कोई तैनाती नहीं है। आयुष विभाग में भी 135 पद खाली हैं। आलम यह है कि कई अस्पतालों में मानकों के मुकाबले 75% तक कम स्टाफ काम कर रहा है।
आरक्षण के नियमों की अनदेखी पर बढ़ा विवाद
नर्सिंग स्टाफ भर्ती में विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा सामाजिक न्याय का है। छात्र संगठन NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया है कि इन 7 पदों की भर्ती में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लिए एक भी पद आरक्षित नहीं किया गया है। आरक्षित वर्ग के लिए पदों की संख्या शून्य होना संवैधानिक नियमों की खुली उपेक्षा बताई जा रही है।
अस्पतालों में सुरक्षा और सेवा पर संकट
रिपोर्ट के मुताबिक जिला अस्पतालों की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में नर्स और शिशुओं का अनुपात मानकों से काफी कम है। मैटरनिटी डिपार्टमेंट्स में स्टाफ की कमी 61% तक पहुंच गई है। जब अस्पतालों में नर्स ही नहीं होंगी तो मरीजों की देखभाल कैसे होगी? यह सवाल अब प्रदेश का हर नर्सिंग छात्र पूछ रहा है।
आंदोलन की राह पर नर्सिंग छात्र
भोपाल NSUI जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर और छात्र नेताओं ने इस भर्ती प्रक्रिया को युवाओं के साथ क्रूर मजाक बताया है। उन्होंने सभी पंजीकृत नर्सिंग अभ्यर्थियों से इस भर्ती का लोकतांत्रिक बहिष्कार करने की अपील की है। युवाओं की मांग है कि खाली पदों की सही संख्या सार्वजनिक कर बड़े पैमाने पर नियमित भर्ती निकाली जाए।
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